राजस्थान सरकार ने की पेंशन की बहाली

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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को जननायक क्यों कहते हैं, बुधवार 23 फरवरी को एक बार फिर से उन्होंने साबित कर दिया कि  वास्तव में वे जनता के शुभचिंतक हैं। वे जनभावनाओं के अनुरूप सत्ता में रहकर जनता के लिए कार्य भी करते हैं।

2004 से देशभर में सरकारी महकमों में भर्ती हुए कर्मचारी अपनी पेंशन को लेकर लगातार चिंतित और परेशान थे, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य विधानसभा में, वर्ष 2022-23 का बजट पेश करते हुए राजस्थान के लाखों कर्मचारियों और उनके परिवारों के चेहरे खिला दिए जब उन्होंने 2004 में बंद हुई कर्मचारियों की पेंशन को बहाल करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पास वित्त मंत्रालय भी है। अशोक गहलोत ने यूं तो राज्य के बजट में अनेक जनकल्याणकारी योजनाओं की घोषणा की है, मगर सबसे बड़ी घोषणा राज्य कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली करने की घोषणा है।

देश के कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली की मांग लंबे समय से कर रहे थे, उन्होंने राज्य कर्मचारियों की भावनाओं को समझा और निर्णय कर बुधवार 23 फरवरी को राज्य विधानसभा में बजट के दरमियान पुरानी पेंशन बहाल करने की घोषणा की। अब सवाल उठता है कि क्या केंद्र की मोदी सरकार और देश के अन्य राज्य भी अशोक गहलोत की तरह पुरानी पेंशन को बहाल करने की घोषणा करेंगे।

गहलोत की निगाहें 2023 में संपन्न होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव पर है और निशाना केंद्र की भाजपा सरकार पर है। क्योंकि सरकारी कर्मचारियों की पेंशन बंद करने का आदेश अटल बिहारी वाजपेई सरकार ने किया था।

देश के कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली की मांग लंबे समय से कर रहे थे, उन्होंने राज्य कर्मचारियों की भावनाओं को समझा और निर्णय कर बुधवार 23 फरवरी को राज्य विधानसभा में बजट के दरमियान पुरानी पेंशन बहाल करने की घोषणा की। अब सवाल उठता है कि क्या केंद्र की मोदी सरकार और देश के अन्य राज्य भी अशोक गहलोत की तरह पुरानी पेंशन को बहाल करने की घोषणा करेंगे।

क्या 2024 के लोकसभा चुनाव में अन्य मुद्दों के अलावा कांग्रेस का सबसे बड़ा मुद्दा कर्मचारियों की पेंशन बहाली का होगा।

शायद अशोक गहलोत ने इसकी नींव रख दी है। बजट में  स्वास्थ्य सुविधाओं को और अधिक बेहतर करने की भी घोषणा की है।

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देश में चल रही बेरोजगारी की समस्या को देखते हुए बेरोजगार युवाओं के लिए भी अनेक विभागों में हजारों की संख्या में, नियुक्तियां निकालने की घोषणा की है। नौकरियों की घोषणा से बेरोजगार युवाओं में नौकरी की आस जगी है।

विपक्षी पार्टियां सरकारों पर आरोप लगाते हुए दिखाई देते थे कि कांग्रेस की सरकारें, भर्ती क्यों नहीं खोल रही है अशोक गहलोत ने सरकारी भर्ती खोलकर सत्ताधारी केंद्र सरकार के नेताओं का भी मुंह बंद किया है, और भाजपा सरकार के नेताओं को चुनौती दी है कि जो काम राजस्थान की कांग्रेस सरकार ने किया है वही काम भाजपा शासित प्रदेशों और केंद्र सरकार भी करके दिखाएं।

अशोक गहलोत की इस चुनौती का भाजपा सरकारों पर क्या असर पड़ता है इसका हमें इंतजार करना होगा।

देवेंद्र यादव कोटा स्थित वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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