उत्तर प्रदेश में नेताओं का आया राम गयाराम का खेल शुरू

देवेंद्र यादव

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के एलान के बाद, जैसे ही राजनीतिक दलों में प्रत्याशी चयन का मंथन शुरू हुआ, वैसे ही राजनीतिक दलों में टिकट के लिए उम्मीद लगाए बेटे नेताओं में आशंकाओं का दौर शुरू हो गया।
भाजपा पहले चरण के उम्मीदवारों को लेकर दिल्ली में मंथन कर ही रही थी कि उत्तर प्रदेश भाजपा सरकार में शामिल कद्दावर मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने भाजपा छोड़ने का ऐलान कर दिया। मौर्य के इस्तीफे की खबर मीडिया के माध्यम से तेजी से फैली और राजनीतिक गलियारों में चर्चा होने लगी की मौर्य किस पार्टी में जाएंगे। उत्तर प्रदेश में भाजपा कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के भीतर बड़े-बड़े नेताओं के इस्तीफे की घटनाएं, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौर की याद दिलाता है।

कुछ ऐसा ही नजारा उत्तर प्रदेश में दिखाई दे रहा है, सत्ताधारी भाजपा के मंत्री और विधायकों का इस्तीफा देने का दौर शुरू हो गया है क्या यह मंत्री और विधायक भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल होंगे? और क्या उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी सरकार बनाने जा रही है? या फिर पश्चिम बंगाल की तरह इतिहास दोहराया जाएगा, इसका तो अभी 10 मार्च तक इंतजार करना होगा।

 

पश्चिम बंगाल में भी चुनाव की घोषणा होने से पहले और होने के बाद सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के भीतर टूट शुरू हो गई थी, सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के विधायक और नेता तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर भाजपा में शामिल होने लगे थे, तब राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह थी कि पश्चिम बंगाल से विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस का सफाया होने जा रहा है और बंगाल में पहली बार भाजपा सरकार बनाने जा रही है, मगर जब परिणाम सामने आए तो बंगाल में लगातार तीसरी बार तृणमूल कांग्रेस ने अपनी सरकार बनाई।
कुछ ऐसा ही नजारा उत्तर प्रदेश में दिखाई दे रहा है, सत्ताधारी भाजपा के मंत्री और विधायकों का इस्तीफा देने का दौर शुरू हो गया है क्या यह मंत्री और विधायक भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल होंगे? और क्या उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी सरकार बनाने जा रही है? या फिर पश्चिम बंगाल की तरह इतिहास दोहराया जाएगा, इसका तो अभी 10 मार्च तक  इंतजार करना होगा।
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मगर क्या उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव भाजपा के चाणक्य केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के लिए बड़ी चुनौती है, यदि पश्चिम बंगाल और दिल्ली विधानसभा चुनाव की बात करें तो इन दोनों ही प्रतिष्ठित राज्यों में भाजपा लाख कोशिश करने के बाद भी चुनाव हारी थी और इन दोनों ही राज्यों में अमित शाह की चुनाव जीतने के लिए बड़ी रणनीति थी। अमित शाह ने दोनों ही राज्यों में जबरदस्त प्रचार भी किया था लेकिन नतीजा भाजपा के लिए चुनाव हार के रूप में सामने आया। कमोबेश ऐसी ही स्थिति बिहार विधानसभा चुनाव के भीतर रही भाजपा ने पहली बार राज्य में अपने दमखम पर सरकार बनाने का प्रयास किया लेकिन वहां भी पूरी ताकत लगाने के बाद भी भाजपा को जेडीयू के साथ ही सरकार में बैठने का अवसर मिला।
पश्चिम बंगाल दिल्ली और बिहार के बाद क्या अमित शाह की रणनीति उत्तर प्रदेश में इतिहास दोहरायेगी या उत्तर प्रदेश में लगातार दूसरी बार बहुमत के साथ सरकार बना कर इतिहास रचेगी? उत्तर प्रदेश में अमित शाह की सक्रियता बढ़ती हुई नजर आ रही है, पता चला है कि उत्तर प्रदेश में अमित शाह इस समय डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं। उत्तर प्रदेश में जो नेता भाजपा को छोड़ रहे हैं उन नेताओं की चुनाव की दृष्टि से अपनी मजबूत राजनीतिक हैसियत है, इन नेताओं की मजबूत राजनीतिक हैसियत के कारण ही भाजपा हाईकमान चिंतित नजर आ रहा है, और इसीलिए भाजपा के नेता नाराज नेताओं को समझाने में जुट गए हैं। नाराज नेताओं को भाजपा के नेता समझाने में कितने सफल होते हैं, यह तो भाजपा की प्रत्याशियों की घोषणाओं के बाद ही पता चलेगा?
 
देवेंद्र यादव कोटा स्थित वरिष्ठ पत्रकार हैं।
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