Wednesday, July 24, 2024
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ज्ञानवापी मस्जिद मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तहखाने में पूजा करने की अनुमति के पक्ष में सुनाया फैसला

वाराणसी कोर्ट ने 31 जनवरी को ज्ञानवापी मस्जिद में हिन्दू पक्ष को पूजा की इजाजत दी थी जिसे आज हाई कोर्ट ने सही बताते हुए कहा कि आगे भी पूजा होती रहेगी, इस पर कोई रोक नहीं लगाई। इस याचिका पर सुनवाई हाई कोर्ट के न्यायधीश रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच इस ने किया।

इलाहाबाद। हाई कोर्ट ने ज्ञानवापी मस्जिद के तहखाने में पूजा जारी रखने की अनुमति के पक्ष में फैसला सुनाया। मुस्लिम पक्ष अर्थात अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी ने वाराणसी जिला जज को हाई कोर्ट में पूजा की अनुमति दिये जाने के खिलाफ चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी।

मस्जिद में चार तहखाने हैं। वाराणसी कोर्ट ने 31 जनवरी को ज्ञानवापी मस्जिद में हिन्दू पक्ष को पूजा की इजाजत दी थी जिसे आज हाई कोर्ट ने सही बताते हुए आगे भी पूजा होती रहेगी, इस पर कोई रोक नहीं लगाई। इस याचिका पर सुनवाई हाई कोर्ट के न्यायधीश रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच इस ने किया।

इसके पहले 15 फरवरी को कोर्ट ने दोनों पक्षों की लंबी बहस के बाद फैसले को सुरक्षित कर लिया था। हिन्दू पक्ष की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायधीश एडवोकेट सीएस वैद्यनाथन एवं विष्णुशंकर जैन ने बहस करते हुए अपनी बात रखी थी जबकि मुस्लिम पक्ष के एडवोकेट सय्यद फरमान अहमद नक़वी और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता पुनीत गुप्ता ने पक्ष रखा था।

ज्ञानवापी मस्जिद विवाद क्या है 

ज्ञानवापी मस्जिद जिसे कभी-कभी आलमगीर मस्जिद भी कहा जाता है, यह वाराणसी में स्थित है। यह मस्जिद काशी विश्वनाथ मंदिर से सटी हुई है। काशी विश्वनाथ मंदिर और उससे सटी ज्ञानवापी मस्जिद को किसने बनवाया, इसको लेकर कई तरह की अटकलों और विवाद की स्थिति वर्षों से बनी हुई है। लेकिन मंदिर-मस्जिद विवाद को लेकर कोर्ट में कई याचिका लगाई जा चुकी हैं। लगाई गयी याचिकाओं को लेकर सुनवाई की तारीख भी आगे-पीछे हो रही है। ऐसें में 5 फरवरी 2024 एक और याचिका जिला कोर्ट में लगाई गई है।

यह याचिका ज्ञानवापी में बंद तहखानों से सम्बंधित है। याचिका श्रृंगार गौरी नियमित दर्शन की मुख्य याचिकाकर्ता राखी सिंह की ओर से उनके अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने दायर की। वहीं, इस मामले में सुनवाई 6 फरवरी यानी आज हो सकती है। याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता सौरभ तिवारी का कहना है कि, कुल आठ तहखाने में छह का ही एएसआई सर्वे हुआ था। जबकि अभी भी दो तहखानो को पत्थर से बंद किया गया है, जिसके एएसआई सर्वे की मांग की गयी है। अधिवक्ता ने आगे कहा याचिका में तहखानों का नक्शा भी लगाया गया है। उन गुप्त तहखानों का रहस्य भी सामने आना चाहिए। इसको लेकर याचिका डाली गयी है। बता दें कि, राखी सिंह की याचिका को कोर्ट ने स्वीकार भी कर लिया है।

ज्ञानवापी मामले में अब तक क्या हुआ इस ओर रुख करते हैं तब मीडिया रिपोर्ट से कई तथ्य हमारे सामने आते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1991 में वाराणसी कोर्ट में एक याचिका दायर की गयी। यह याचिका स्थानीय पुजारियों द्वारा दाखिल की गयी। याचिका में पुजारियों ने ज्ञानवापी मस्जिद क्षेत्र में पूजा की अनुमति मांगी थी। पुजारियों का दावा था कि, काशी विश्वनाथ मंदिर के एक हिस्से को गिराकर मस्जिद बनाई गई थी। साथ-साथ पुजारियों ने कहा था कि, 16वीं शताब्दी में औरंगजेब के आदेश पर मंदिर के हिस्से को गिराकर मस्जिद बनाई गयी।

लेकिन, याचिका को लेकर केंद्र सरकार ने प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट बना दिया। एक्ट के मुताबिक, 5 अगस्त 1947 से पहले अस्तित्व में आए किसी पूजा स्थल को किसी अन्य धर्म के पूजा स्थल में परिवर्तित नहीं कर सकते। ज्ञानवापी पर साल 1993 में फिर सुनवाई शुरू हुयी। लेकिन अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी ने हाईकोर्ट में यह तर्क दिया कि, मामले की सुनवाई सिविल कोर्ट में नहीं हो सकती। हाइकोर्ट ने सिविल कोर्ट में सुनवाई पर रोक लगाई।

22 साल बाद 2019 में भगवान विश्वेश्वर की ओर से विजय शंकर ने बनारस कोर्ट में मुकदमा कर एएसआई सर्वे कराने की मांग की। 2020 में ही अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी ने याचिका का विरोध किया। आगे हुआ यह कि वर्ष 2021 में शृंगार दर्शन की मांग करते हुये पाँच महिलाओं रेखा पाठक, मंजु व्यास, लक्ष्मी देवी, राखी सिंह और सीता साहू ने एक अन्य याचिका दायर की।

इसके बाद वर्ष 2022 में अदालत ने शृंगार गौरी विग्रह का पता लगाने के लिए कमिश्नर नियुक्त किया। 26 अप्रैल 2022 को सिविल कोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर के सर्वेक्षण का आदेश दे दिया। जुलाई 2022 में मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। कोर्ट ने जिला आदालत के फैसले का इंतज़ार करने को कहा। दिसम्बर 2022 में फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में एक अन्य मुक़दमे में वजूखाने में मिले शिवलिंगनुमा आकृति की पूजा करने का अधिकार, मुस्लिमों के प्रवेश पर रोक, अवैध ढांचे को हटाने सम्बन्धी मामले की सुनवाई हुयी।

फिर, मई 2023 में ज्ञानवापी मस्जिद में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग का हाईकोर्ट ने आदेश दिया। सात दिन बाद सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पर रोक लगा दी थी। बाद में 23 मई 2023 को वाराणसी जिला जज की ओर से महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि, ज्ञानवापी मामले में सभी सातों केस एक साथ सुने जायेंगे।

वहीं फिर जब वर्ष 2024 आया तब 24 जनवरी को जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश ने अदालत में ज्ञानवापी पर फैसला सुनाया। रिपोर्ट 25 जनवरी 2024 को सार्वजनिक की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, ज्ञानवापी में एक मंदिर का ढांचा मिला है। इस पर हिंदू पक्ष ने खुशी जताई। ऐसे में, 31 जनवरी 2024 को वाराणसी जिला अदालत ने हिंदू पक्ष को व्यास तहखाने में पूजा करने की इजाजत दे दी। इस फैसले पर मुस्लिम पक्ष दावा यह रहा कि 1669 में किसी के भी आदेश पर कोई मंदिर नहीं तोड़ा गया था।

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