Tuesday, February 27, 2024
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अहिंदा के दम पर सिद्धारमैया बनेंगे मुख्यमंत्री, डीके शिवकुमार संभालेंगे पार्टी की कमान

खत्म हुआ टशन, शुरू हुआ जश्न डीके शिवकुमार की रणनीतिक कारीगरी के दम पर कांग्रेस 2024 के लोकसभा चुनाव तक ले जाना चाहेगी इस जीत का जश्न लंबी माथापच्ची के बाद आखिरकार कांग्रेस ने तय कर लिया है कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनेंगे। सिद्धारमैया राजनीति तिकड़म के पुराने खिलाड़ी हैं। वह […]

खत्म हुआ टशन, शुरू हुआ जश्न

डीके शिवकुमार की रणनीतिक कारीगरी के दम पर कांग्रेस 2024 के लोकसभा चुनाव तक ले जाना चाहेगी इस जीत का जश्न

लंबी माथापच्ची के बाद आखिरकार कांग्रेस ने तय कर लिया है कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ही कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनेंगे। सिद्धारमैया राजनीति तिकड़म के पुराने खिलाड़ी हैं। वह सही समय पर सटीक चाल चलते हैं और बाजी भी जीतते हैं। पर चाल चलने से ज्यादा उनका फोकस खेल में अपने मोहरों को सही स्पेश देना होता है ताकि चाल में चूक होने पर मोहरे खेल संभाल सकें। इस बार भी सिद्धारमैया जानते थे कि कर्नाटक में कांग्रेस को इस जीत तक तक लाने के पीछे डीके शिवकुमार का अहम रोल है इसलिए डीके की दावेदारी भी बड़ी होगी इस लिए डीके शिवकुमार के इर्द-गिर्द भी उन्होंने अपने मोहरे इतने कारीने से सजा दिए थे कि डीके को यह कभी पता ही नहीं चला कि वह जिन मोहरों को आगे बढ़ा रहे हैं, वह दरअसल उनके मोहरे ही नहीं हैं। कर्नाटक चुनाव का परिणाम आते ही सिद्धारमैया के समर्थकों ने स्पष्ट कर दिया कि 135 जीते विधायकों में से 90 का समर्थन सिद्धारमैया के पक्ष में है।

[bs-quote quote=”सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस की कोशिश होगी कि वह 2024 के लोकसभा चुनाव में अपनी इस बढ़त को आगे ले जा सके। डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया किसी के भी नाराज़ होने से लोकसभा में इस जीत को दोहरा पाना मुश्किल होगा। डीके शिवकुमार की रणनीतिक क्षमता हर बार पहले से ज्यादा बेहतर होकर सामने आती रही है, इसलिए पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी संगठन को डीके की जरूरत है। ऐसे में कांग्रेस हाईकमान कर्नाटक में कोई गलती नहीं करना चाहता।” style=”style-2″ align=”center” color=”” author_name=”” author_job=”” author_avatar=”” author_link=””][/bs-quote]

इस खुलासे ने राज्य से लेकर हाईकमान तक यह सेट कर दिया कि सिद्धारमैया के हित की अनदेखी करना इस खुशी पर ग्रहण लगा सकता है। दूसरी तरफ थे, कांग्रेस के संकट मोचक डीके शिवकुमार। हर बुरे वक्त में कांग्रेस की नैया पार लगाने को शिवकुमार अपनी नैतिक जिम्मेदारी  की तरह निर्वाह करते रहे हैं। सिद्धारमैया के नेतृत्व में कांग्रेस कर्नाटक में अपना प्रभाव जब गंवा चुकी थी, तब डीके ने ही अपने रणनीतिक कौशल से राज्य में ना सिर्फ पार्टी को मजबूत किया, बल्कि अपनी फूल प्रूफ प्लानिंग से कांग्रेस के हिस्से में बहुमत पार का आंकड़ा भी डाला। डीके शिवकुमार की पूरी राजनीति पर अगर नज़र डाली जाए तो साफ दिखता है कि उन्होंने कभी विद्रोह और मोलभाव की राजनीति का रास्ता नहीं अख्तियार किया। वह भावुक आदमी हैं। उन्होंने हमेशा पार्टी को अपनी माँ कहा और उसके सम्मान के प्रति वफादार भी रहे। मुख्यमंत्री पद न मिलने से डीके बगावत नहीं करेंगे यह सब को पता है। यह भी पता है कि सिद्धारमैया कांग्रेस तक आए ही इसलिए थे कि मुख्यमंत्री बन सके। सिद्धारमैया की राजनीतिक जमीन कांग्रेस नहीं बल्कि जेडीएस थी। जब सिद्धारमैया को यह समझ में आ गया कि यहाँ एचडी देवगौड़ा के पुत्र कुमार स्वामी से आगे जाकर कभी भी मुख्यमंत्री पद हासिल कर पाना संभव नहीं होगा, तब उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया। ऐसा भी नहीं था कि कांग्रेस में आते ही उन्हें सबकुछ थाल में सजाकर मिल गया था। सिद्धारमैया ने कर्नाटक में सामाजिक न्याय की लड़ाई को एक अलग पहचान दी। उन्होंने अहिंदा यानी अल्पसंख्यक, अन्य पिछड़ा वर्ग और दलित के सम्मान की लड़ाई हर मोर्चे पर लड़ी। खुद भी पिछड़ी जाति कुरबा (गड़रिया) से तालुक रखते हैं। उनके यह संघर्ष ही उनकी जमीन को कर्नाटक में मजबूत करते हैं। राज्य के आर्थिक और गणित विषय पर उनकी मजबूत पकड़ है। जिसकी वजह से वह अपने हर कदम को दूरदर्शिता के साथ नपे तुले अंदाज में बढ़ाते हैं।

2013 में सिद्धारमैया ने कांग्रेस को कर्नाटक में जीत दिलाई थी और सरकार बनाने पर उन्होंने कई प्रभावी योजनाओं को मूर्त रूप देने का प्रयास किया था, जिसमें अन्न भाग्य योजना के तहत हर इंसान को सात किलो चावल देना था। इसके साथ दुग्ध उत्पादकों को सब्सिडी,  दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदाय के लिए एक बार कर्जमाफ़ी और बिजली का बिल माफ करने जैसी योजनाओं ने उन्हें बड़ी लोकप्रियता देने का काम किया था।

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लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देने के मामले मे सिद्धारमैया ने उदारता तो बरती थी पर कुछ निर्णायक चूक भी उनसे हुई। जिसका फायदा उठाकर भाजपा ने कांग्रेस की छवि लिंगायत विरोधी बना दी। कर्नाटक में लिंगायत को नाराज कर सत्ता में नही रहा जा सकता। सिद्धारमैया कर्नाटक में ऐसे नेता के रूप में जाने जाते हैं जो लफ्फाजी नहीं करता, बल्कि वह स्पष्ट और सच कहने का साहस रखने वाले नेता के रूप में जाने जाते हैं।

सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस की कोशिश होगी कि वह 2024 के लोकसभा चुनाव में अपनी इस बढ़त को आगे ले जा सके। डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया किसी के भी नाराज़ होने से लोकसभा में इस जीत को दोहरा पाना मुश्किल होगा। डीके शिवकुमार की रणनीतिक क्षमता हर बार पहले से ज्यादा बेहतर होकर सामने आती रही है, इसलिए पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के रूप में भी संगठन को डीके की जरूरत है। ऐसे में कांग्रेस हाईकमान कर्नाटक में कोई गलती नहीं करना चाहता। कर्नाटक में भले ही सिर्फ कांग्रेस की जीत हुई है पर इसने पूरे देश के विपक्ष को एक नई उम्मीद दे दी है। कुछ दिनों पहले भी कांग्रेस ने हिमाचल प्रदेश में भाजपा से सत्ता वापस छीनी थी पर कर्नाटक में जिस तरह से कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी के जादू को फिसड्डी साबित किया है। उनकी पूरी राजनीति को नफरती राजनीति का चेहरा स्थापित कर दिया है। उसका बड़ा खामियाजा नरेंद्र मोदी की छवि को होने जा रहा है।

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राहुल गांधी को पप्पू बताने में भाजपा कई साल से मेहनत करने बावजूद भी उतनी सफलता नहीं पा सकी थी, जितनी राहुल ने एक चुनाव में नरेंद्र मोदी को नफरती बताने में हासिल कर ली है। राहुल गांधी की इस चुनाव की सबसे बड़ी जीत यही है कि उन्होंने जहां अपनी छवि को ज्यादा सहज, आम और विनम्र बनाने में कामयाबी हासिल की है। वहीं भाजपा को विभाजनकारी और नरेंद्र मोदी को नफरत का नेता स्थापित करने की सफलता पाई है। राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी ने भी प्रधानमंत्री को जिस तरह से चुनौती देने का काम किया और जीत हासिल की है उससे यह तो तय हो गया है कि अब नरेंद्र मोदी को भी भाषाई शिष्टाचार सही करना होगा। वरना कर्नाटक में मिलने वाली 91 गालियां अगले राज्यों में कई गुना ज्यादा बढ़ सकती हैं। अब जनता भी समझ चुकी है कि चुनाव तक ही मदारी का तमाशा देखने को मिलेगा। उस तमाशे में उछले हुए जुमले सत्य का जामा नहीं पहनने वाले। फिलहाल, 18 मई को मुख्यमंत्री के रूप में सिद्धारमैया के शपथ ग्रहण की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री के साथ डीके शिवकुमार समेत कई और मंत्री भी शपथ ले सकते हैं।

कुमार विजय गाँव के लोग डॉट कॉम के मुख्य संवाददाता हैं।

गाँव के लोग
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