असल सत्य यहाँ है

डॉ. ओमशंकर

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सोने का चम्मच लेकर पैदा लिए हुए अमीरों के अक्षम बच्चों का आर्थिक आधार पर उल्टा आरक्षण पाने से किसी भी बुद्धिजीवियों को कोई दिक्कत नहीं होती है परंतु हज़ारों सालों से सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक तथा राजनैतिक तौर पर उपेक्षित तथा कमजोर वर्ग के लोगों के आरक्षण से नौकरी पाने पर लोग मरने लगते हैं तथा मेरिट का हनन शुरू हो जाता है ऐसा दोहरा चरित्र क्यों?

विदेशों में ‘आर्थिक आधार पर उल्टा आरक्षण पाने वाले’ अमीरों के ज्यादातर बच्चे अक्षम बच्चों थे क्योंकि उनमें मात्र 8% बच्चे हीं विगत 5 सालों में भारत के होनेवाले आसान सा मेडिकल लाइसेंसिंग परीक्षा पास कर पाए!

भारतवर्ष से विदेशों में MBBS की डिग्री लेने ज्यादातर अमीर माता-पिता के वैसे हीं अक्षम बच्चे जाते हैं जो यहां की NEET परीक्षा में पास नहीं कर पाते हैं तो क्या यह आर्थिक रूप से गरीब लोगों के बदले पैसेवालों के बच्चों के लिए उल्टा आरक्षण नहीं है?

विदेशों से MBBS की डिग्री लेने जाने वाले अमीर माता-पिता के ज्यादातर बच्चे अक्षम होते हैं इसके दो प्रमाण हैं- पहला कि वे भारत में NEET परीक्षा पास नहीं कर पाते और दूसरा यह कि वहां से पढ़कर लौटेने के बाद ज्यादातर बच्चे यहां होने वाले लाइसेंसिंग परीक्षाओं में फेल हो जाते!

महामना की बगिया में सिर्फ एक हीं चीज की कमी थी वो है बाउंसर (गुंडों) की आधिकारिक नियुक्तियां! पता नहीं इसके आड़ में कौन से अधिकारी नई नियुक्तियां कर पैसे खाने और अपने रिश्तेदारों को सेट करने की शॉर्ट पिच, इन स्विंग, आउट स्विंग और गुगली रेजीडेंटों के पीछे खड़ा होकर डाल रहा है, परंतु सबसे अहम सवाल यह है कि अगर बाउंसर महिला चिकित्सकों को छेड़ना शुरू करेंगे तो उनकी सुरक्षा उसने कौन करेगा, इस देश में पुलिस का प्रावधान क्यों है और उनकी क्या जिम्मेदारी है?

 

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महामना की बगिया में सिर्फ एक हीं चीज की कमी थी वो है बाउंसर (गुंडों) की आधिकारिक नियुक्तियां! पता नहीं इसके आड़ में कौन से अधिकारी नई नियुक्तियां कर पैसे खाने और अपने रिश्तेदारों को सेट करने की शॉर्ट पिच, इन स्विंग, आउट स्विंग और गुगली रेजीडेंटों के पीछे खड़ा होकर डाल रहा है, परंतु सबसे अहम सवाल यह है कि अगर बाउंसर महिला चिकित्सकों को छेड़ना शुरू करेंगे तो उनकी सुरक्षा उसने कौन करेगा, इस देश में पुलिस का प्रावधान क्यों है और उनकी क्या जिम्मेदारी है?

जबतक BHU अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक अयोग्य और अस्थायी तौर पर बनेंगे, डाइरेक्टर की नियुक्ति में कुलपति महोदय का हाथ रहेगा तथा उमंग फार्मेसी/CT/MRI स्कैन से अवैध वसूली का धंधा चलता रहेगा, डॉक्टर पिटते/पीटवाते जाते रहेंगे!

माननीयगण सबरीमाला मंदिर के फैसले के वक्त अगर थोड़ा और बड़ा दिल दिखाते हुए सभी मंदिरों में ‘प्रवेश से लेकर पुजारियों की नियुक्तियों तक में’ जाति और लिंगभेद हटा दिए होते तो यह वास्तव में नए भारत के निर्माण में मील का पत्थर साबित होता!

डॉ. ओमशंकर सर सुन्दरलाल अस्पताल के मशहूर हृदय रोग विभाग के विभागध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता हैं।

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