कृषि कानून के खिलाफ लड़ी जायेगी आरपार की लड़ाई

कमल नयन मधुकर, संवाददाता, गाँव के लोग डॉट कॉम

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मोदी सरकार द्वारा लाए गये कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले एक वर्ष से किसानों द्वारा शुरू किये गये आंदोलन की आंच अब उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के जिलों में फैलने लगी है। महात्मा गांधी की जयन्ती 2अक्टूबर को बिहार प्रदेश के चम्पारन से शुरू हुई लोकनीति सत्याग्रह जनजागरण पदयात्रा बुधवार को वाराणसी कचहरी स्थित लालबहादुर शास्त्री घाट पहुँची।

शास्त्रीघाट पर पदयात्री

यात्रा के समापन अवसर पर आयोजित किसान पंचायत में किसानों ने आंदोलन को तेजी से पूरे देश में फैलाने का संकल्प लिया। ताकि सरकार को किसान विरोधी कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए मजबूर किया जा सके। इस मौके पर यहाँ किसान पंचायत में शामिल होने कर्नाटक प्रदेश के किसान नेता बी.आर पाटिल ने घोषणा की कि आगामी 7 नवम्बर को कन्याकुमारी से पदयात्रा निकाली जायेगी जो 26नवम्बर को दिल्ली पहुंचेगी। श्री पाटिल ने किसानों में जोश भरते हुए कहा कि मैं दक्षिण भारत के लोगों का संदेश लेकर यहाँ आया हूँ । पिछले चुनावों में किसानों ने मोदी द्वारा दिखाए गये सपनों में बहक कर उन्हें प्रधानमंत्री बनाने का काम किया। लेकिन मोदी ने कृषि कानूनों को लाकर किसानों को तबाह कर देने का काम किया है।

पूर्वाञ्चल बहुजन मोर्चा के संयोजक अनूप श्रमिक

उन्होंने कहा कि किसानों ने यहाँ मोदी सरकार को चुनौती दे दी है कि हम आपके संसदीय क्षेत्र से इस किसान विरोधी सरकार को उखाड़ फेंकने का संंकल्प लेते हैं। मध्यप्रदेश के पूर्व विधायक डा. सुनीलम ने कहा कि खेती किसानी से जुड़े एक भी आदमी से सरकार ने सलाह ली होती तो यह काला कानून पास नहीं हुआ होता। पीएम मोदी ने यह कानून अडानी अम्बानी को लाभदेने और किसानों को बर्बाद कर देने के लिए बनाया है। सरकार किसानों को कारपारेट घरानों के हाँथों गुलाम बनाने का काम कर रही है। किसानों के आंदोलन को करोड़ों देशवासियों का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार तालिबानियों और आतंवादियों को प्रश्रय देने वाले देश पाकिस्तान से तो बातचीत तो कर रही है , लेकिन किसानो के बारे में ध्यान देने के सवाल पर चुप्पी साध रही है। हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति या पार्टी के खिलाफ नहीं बल्कि सरकार के खिलाफ है। हमारी लड़ाई अडानी, अम्बानी के हाथों देश सौंपने की साजिश के खिलाफ है। अब देश फैसला करे कि अडानी, अम्बानी क्या देश चलायेंगे। उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों के लागू होने से देशभर में मण्डियां और एफसीआई के गोदाम बंद हो जायेंगे। अनाज और सब्जियों की खरीद एवं बिक्री की नीतियां पूंजीपति घराने तय करेंगे।

फासिस्ट सरकार को ललकारते हुये किसान नेता रामजनम

यात्रा संयोजक हिमांशु तिवारी ने कहा कि आज हम यहाँ मोदी के क्षेत्र में यह चुनौती देन आए है कि पूर्वांचल का किसान चुप नहीं उद्वेलित है और 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा सरकार को उखाड़ कर बदला लेगा। 104 साल पहले अंग्रेजी हुकूमत ने चम्पारण में किसानों पर कान्ट्रेक्टर फार्मिंग थोपी थी और मोदी सरकार ने अंबानी-अडानी को लाभ देने तथा किसानों को बर्बाद कर देने के लिए काला कानून पास किया है। किसी भी हालत में इस कानून को हम लागू नहीं होने देंगे। मैग्ससे पुरस्कार विजेता संदीप पाण्डेय ने कहा कि गत चुनाव में जिनको अपना जनप्रतिनिधि चुना है वह किसी लायक नहीं है। उन्हें तो किसान कानून की जानकारी भी नहीं है। उन्हें जिन लोगों ने चुना है वे उनक ा क्या हाल करेंगे यह उन्हें पता नहीं है। यह सरकार पूरी तरह जनविरोधी है। किसानों,मजदूरों एवं नौजवानों के सवाल पर चुप रहती है। यह सरकार केवल कारपोरेट घरानों के हितों के लिए काम कर रही है। नवनिर्माण संगठन उड़ीसा के नेता उमाकांत ने कहा कि पूरे देश में अडानी- अम्बानी द्वारा पूरे देश में गोदाम बनवाए जा रहे है। यह देश किसानों, मजदूरों और नौजवानों का है। हम मोदी के काले कानून को किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे तथा लागू नहीं होने देंगे। हम हर हालत में किसानों के आनाज कारपारेट घरानों के गोदामों में नहीं जाने देंगे।

सर्वसेवा संघ, वाराणसी में कार्यकर्ताओं के साथ प्रशांत भूषण

किसान यात्रा के वाराणसी के चौबेपुर पहुँचने पर किसानों का हौसला बढाने सुप्रीम कोर्ट के प्रख्यात अधिवक्ता प्रशांत भूषण यहां पहुँचे तथा पदयात्रियों से मिले। यहाँ से वे राजघाट स्थित सर्वसेवा संघ के पुस्तकालय भवन आये और पत्रकारों से मुखातिब हुए। श्री भूषण ने कहा कि कृषि कानूनों के लागू होने से खेती और किसानी खत्म हो जायेगी। सरकार के पूंजीपति लोगों के लिए लागू किये गए इस कानून से खेती घाटे का सौदा बनकर रह जायेगी। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों लखीमपुर खीरी में केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री की गाड़ी से चार किसानों एवं एक पत्रकार की हत्या किये जाने के मामले में मोदी ने अब तक चुप्पी साध रखी। मंत्री अजय मिश्रा की बर्खास्तगी और घटना के आरोपी उनके बेटे की अब तक गिरफ्तारी न होना मोदी की कार्यशैली पर सवालिया निशान उठा रही।
यहाँ किसान जनजागरण पदयात्रा के समापन अवसर पर हुई पंचायत में वक्ताओं में कृषि को कानून को लेकर जबरदस्त गुस्सा था। सभी वक्ताओं ने एक स्वर से आरपार की लड़ाईलड़ने का संकल्प लिया। पंचायत की अध्यक्षता प्रसिद्ध समाजवादी चिंतक विजय नारायण ने की । पंचायत को ईश्वरचन्द्र त्रिपाठी, फादर आनन्द, रवि कोहाण, राघवेन्द्र, रामाश्रय, रामजन्म, दलजीत कौर सहित दर्जनों लोगों ने सम्बोधित किया।

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