अग्निवीर यानी नौजवानों को खतरनाक झांसा (डायरी 21 जून, 2022)

नवल किशोर कुमार

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पत्रकारिता करने के अनेक तरीके हैं। मुझे तो दो तरह की पत्रकारिता ही अच्छी लगती है। एक खोजी पत्रकारिता और दूसरी वह जिसमें सीधे-सीधे जनता से जुड़ाव होता है। खोजी पत्रकारिता में भी लोगों से सीधे संवाद होता है, लेकिन उसकी अपनी सीमा होती है। हमें बहुत कुछ छिपाकर रखना पड़ता है। हालांकि खबर लिखते समय हम इसका ध्यान अवश्य रखते हैं कि कोई भी बात जो खबर को संपुष्ट करती हो, शेष ना रह जाय। दूसरे तरह की पत्रकारिता बेहद आसान है। इसके लिए बस आपके पास एक विषय होना चाहिए।
जैसे ही कल जब दफ्तर से घर के लिए निकला तब जेहन में एक सवाल था कि आम जनता अग्निवीर के बारे में क्या सोचती है। शुरुआत एक चाय दुकानदार से की। यह दुकानदार एकदम नौजवान है और मुश्किल से इसकी उम्र 20-21 साल की होगी। नेहरू प्लेस के परिसर में पतली गली में इसकी दुकान है। चूंकि सप्ताह में एक-दो बार इसके यहां चाय पीने जाता ही हूं तो अब एक तरह से जान-पहचान हो गई है।
उससे पूछा कि क्या तुम अग्निवीर बनना चाहोगे?
जवाब मिला– मैं क्यों बनने लगा। मेरी अपनी यह दुकानदारी ही ठीक है।
क्यों, क्या तुम देश की सुरक्षा नहीं करना चाहते?

दिल्ली नगर निगम वाले तो अपने हैं। जब कोई ऊपर से आदेश देता है कि उसे धन चाहिए तो वे लोग दबिश बढ़ाते हैं और हर रेहड़ी वाला कुछ ना कुछ दे देता है तो सब मैनेज हो जाता है। और यह भी कोई परेशानी है। आप ही बताइए कि छह महीने में कोई नौजवान पूरी तरह सैनिक कैसे बन सकेगा। सरकार तो उसको सीधे मौत के मुंह में भेज रही है।

 

सर, यह सब बकवास बात है। कोरोना के पहले साल में मेरी मां मर गयी। वह यहीं पर चाय बेचती थी और मैं पढ़ता था। तब देश कहां था?
लेकिन देश सुरक्षित है तो हम सब सुरक्षित है।
सर, हम कहां सुरक्षित हैं। अभी दिल्ली नगर निगम वाले आएंगे और हमें यहां से लाठी मारकर भगा देंगे। गालियां देंगे अलग से।
तो अग्निवीर बनो, वहां तुम्हें सम्मान मिलेगा। पैसा तो मिलेगा ही।
सर, फौज में कितना सम्मान मिलता है, यह हम जानते हैं। चार साल के लिए ठेका के मजदूर का कौन सम्मान करेगा। कोई शादी भी नहीं करेगा। रही बात पैसे की तो चाय बेचकर ही सही, रोज का मैं पंद्रह सौ तक कमा लेता हूं।
लेकिन, अग्निवीर बनने पर दिल्ली नगर निगम वाले परेशान नहीं करेंगे।
सर, दिल्ली नगर निगम वाले तो अपने हैं। जब कोई ऊपर से आदेश देता है कि उसे धन चाहिए तो वे लोग दबिश बढ़ाते हैं और हर रेहड़ी वाला कुछ ना कुछ दे देता है तो सब मैनेज हो जाता है। और यह भी कोई परेशानी है। आप ही बताइए कि छह महीने में कोई नौजवान पूरी तरह सैनिक कैसे बन सकेगा। सरकार तो उसको सीधे मौत के मुंह में भेज रही है।
तो यह बातचीत एक पत्रकार और एक नौजवान के बीच की है जो अग्निवीर नहीं बनना चाहता।
कल ही पूर्वांचल के एक पत्रकार साथी से बात हो रही थी। उनसे पूछा कि आप जिस गांव में रहते हैं, वहां के कितने नौजवान सेना में हैं? जवाब मिला– हमारा गांव ब्राह्मण और कायस्थों का है। हमारे गांव में आजतक कोई सेना में नहीं गया। हालांकि सरकारी नौकरी वाले अनेक हैं। ऐसे ही कल मैंने गोपालगंज के एक पत्रकार साथी से यही सवाल दुहराया तो उनका जवाब मिला कि केवल यादव जाति के लड़के ही सेना में जाना चाहते हैं। बनिया और भूमिहार तो सोचते भी नहीं।
खैर, मैं कोई निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहता। मैं तो कल सेना द्वारा जारी अधिसूचना को देख रहा हूं। अधिसूचना के मुताबिक जुलाई से अग्निवीरों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी। अधिसूचना के तहत दी गयी कुछ जानकारियां अहम हैं। एक तो हर अग्निवीर के लिए एक स्पेशल प्रावधान होगा कि वे चार साल की सेवा के दौरान किसी को भी किसी भी तरह की सूचना नहीं देंगे। इसके अलावा नियोजन के पहले उन्हें यह लिखित में देना होगा कि सेना उन्हें जहां कहीं (मैदान, पहाड़, मरूस्थल) भी पदस्थापित करेगी, वे जाने को उत्तरदायी होंगे। इसके अलावा अधिसूचना में कहा गया है कि नियमित सैनिकों को जैसे हर साल 90 दिनों का अवकाश मिलता है, अग्निवीरों को 30 दिनों का अवकाश मिलेगा।

सरकार से लेकर कारपोरेट तक नौजवानों को बेवकूफ बना रहे हैं अैर मैं इस बात को लेकर चिंतित हूं कि बिना पर्याप्त अभ्यास व प्रशिक्षण के अग्निवीर नौजवान बतौर सैनिक अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कैसे करेंगे और इससे भी महत्वपूर्ण यह कि वे अपने प्राणों की रक्षा कैसे करेंगे?

इन उपरोक्त सूचनाओं के अलावा एक सूचना और है। सेना द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि एक बार नियोजन होने के बाद चार साल तक अग्निवीर नौकरी नहीं छोड़ सकेंगे। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी कोई विशेष कारण होने पर वे नौकरी भले ही छोड़ सकेंगे। लेकिन यह खास तरह की परिस्थिति होगी तभी संभव होगा।
बहरहाल, मैं देख रहा हूं कारपोरेट जगत के लोग अग्निवीरों का सम्मान करने के लिए अभी से तालियां बजा रहे हैं। कल महिंद्रा कंपनी वाले उद्योगपति ने ट्वीट भी किया। जब एक ने उनसे पूछा कि अग्निवीरों को वह कौन सा पद देंगे, तब उद्योगपति महोदय ने जवाब दिया कि कारपोरेट क्षेत्र में रोजगार की असीम संभावनाएं हैं।
तो कुल मिलाकर यह कि सरकार से लेकर कारपोरेट तक नौजवानों को बेवकूफ बना रहे हैं अैर मैं इस बात को लेकर चिंतित हूं कि बिना पर्याप्त अभ्यास व प्रशिक्षण के अग्निवीर नौजवान बतौर सैनिक अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कैसे करेंगे और इससे भी महत्वपूर्ण यह कि वे अपने प्राणों की रक्षा कैसे करेंगे?
मैं तो देश के श्रमिक संगठनों के बारे में सोच रहा हूं। कैसे देश के सारे श्रमिक संगठनों ने मुंह पर टेप लगा लिया है देश के नौजवानों के सवाल पर। हालांकि कल देर से ही सही, किसान आंदोलन के नेताओं ने एक कार्यक्रम लिया है, जिसके तहत वे 24 जून को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन करेंगे।

नवल किशोर कुमार फ़ॉरवर्ड प्रेस में संपादक हैं।

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