Wednesday, February 28, 2024
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कर्नाटक में 2020-22 में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराध में 86 प्रतिशत की वृद्धि : एनसीआरबी

बेंगलुरु (भाषा)। कर्नाटक में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराध में 2020 से 2022 तक 86 फीसदी की वृद्धि हुई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। ब्यूरो ने महिला अपराध पर भी अपनी रिपोर्ट जारी की है। राज्यों से मिले डेटा के आधार पर 2022 की यह रिपोर्ट बनाई […]

बेंगलुरु (भाषा)। कर्नाटक में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराध में 2020 से 2022 तक 86 फीसदी की वृद्धि हुई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। ब्यूरो ने महिला अपराध पर भी अपनी रिपोर्ट जारी की है। राज्यों से मिले डेटा के आधार पर 2022 की यह रिपोर्ट बनाई है। देश में प्रति लाख आबादी पर ओवरऑल क्राइम में कमी आई है, मगर साइबर क्राइम खूब बढ़ा है। 2021 में जहां देशभर में 60.9 लाख आपराधिक मामले दर्ज हुए थे, 2022 में यह आंकड़ा 58.2 लाख रहा। 2021 के मुकाबले, 2022 में साइबर अपराध के मामलों में 24.4% की बढ़त दर्ज की गई। वहीं, संसद में शीतकालीन सत्र के दौरान कांग्रेस ने भी महिला अपराधों को लेकर प्रश्न पूछे हैं।

आंकड़ों के अनुसार, 2020 में कर्नाटक में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराधिक मामलों की संख्या 853 थी जो 2022 में बढ़कर 1,583 हो गयी। 2021 में यह संख्या 1,442 थी। कई वरिष्ठ नागरिक जालसाजी, धोखाधड़ी और चोरी का शिकार बने। वहीं, दिल्‍ली का क्राइम रेट सबसे ज्यादा रहा। इसके बाद केरल, हरियाणा, गुजरात और तमिलनाडु का नंबर है। हत्या, अपहरण जैसे अपराधों की संख्या में इजाफा हुआ है।

एनसीआरबी के 2022 के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि भारत में 28 राज्यों में से कर्नाटक में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ सातवें सबसे अधिक अपराध दर्ज किए गए। मध्य प्रदेश में सबसे अधिक 6,187 मामले, महाराष्ट्र में 5,059 और तमिलनाडु में 2,376 मामले दर्ज किए गए।

एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, कर्नाटक में ऐसे मामलों की संख्या प्रति लाख आबादी पर 27.3 रही जबकि ऐसे मामलों में आरोपपत्र दाखिल करने की दर 77.8 रही।

कर्नाटक में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराध में हत्या के 91, हत्या के प्रयास के 48, गंभीर रूप से चोट पहुंचाने के 18, शील भंग करने के इरादे से महिलाओं पर हमले के 65, अपहरण के चार और दुष्कर्म के दो मामले शामिल हैं।

आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 2022 में लूट के 61, आपराधिक अनधिकार प्रवेश के 58 और आपराधिक धमकी के 56 मामले भी दर्ज किए गए जिनमें वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाया गया।

एनसीआरबी के आंकड़ों से पता चलता है कि पुलिस ने कुल 1,396 मामलों का निस्तारण किया। वहीं, 2022 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4.45 लाख मामले दर्ज हुए जो 2021 से 4% ज्यादा है। बच्‍चों के खिलाफ अपराध के आंकड़े भी चिंताजनक रफ्तार से बढे़ हैं। 2021 के मुकाबले 2022 में बच्‍चों के खिलाफ अपराध 8.7% बढ़ गए। 2022 में कुल 53.9 लाख लोगों को गिरफ्तार किया गया। 43.7 लाख आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर हुई। 10.5 लाख को दोषी ठहराया गया, 9.81 लाख को बरी कर दिया गया।

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एनसीआरबी ने बीते सोमवार को भी भारत में अपराध 2022 रिपोर्ट जारी की। इसमें देश भर में आईपीसी के साथ-साथ विशेष और स्थानीय कानूनों (SLL) के तहत दर्ज अपराध शामिल किए गए हैं। डेटा के अनुसार, 2021 के 60.9 लाख मामलों के मुकाबले 2022 में आपराधिक मामले 4.5% घटकर 58.2 लाख हो गए। पिछले साल दर्ज किए गए कुल 58.2 लाख अपराधों में से 35.6 लाख IPC अपराध थे, जो 2021 से 2.8% कम है, और 22.6 लाख SLL अपराध थे, जो 7% कम है।

वहीं, प्रति लाख आबादी पर अपराध की दर के लिहाज से दिल्ली टॉप पर रही। यहां संज्ञेय अपराधों की उच्चतम दर 1,518.2 दर्ज की गई। इसके बाद केरल (1,274.8), हरियाणा (810.4), गुजरात (738.9) और तमिलनाडु (617.2) का नंबर है। यूपी में अपराध दर बहुत कम 322 थी, जबकि बंगाल में 182.8 थी।

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