Saturday, April 13, 2024
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शीतलहर भी नहीं रोक पाई खिरियाबाग के किसानों का संघर्ष

बिखेरने की हर साजिश को नाकाम करता आंदोलन खिरियाबाग आंदोलन के साढ़े तीन महीने हो रहे हैं लेकिन सरकार का रवैया हठधर्मिता से अधिक कुछ भी नहीं ज़ाहिर कर रहा है फिर भी गाँववालों की हिम्मत और प्रतिरोध की ताकत जगज़ाहिर हो चुकी है। जिन गाँवों पहले उदासी थी अब वे भी अँगड़ाई लेकर उठ […]

बिखेरने की हर साजिश को नाकाम करता आंदोलन

खिरियाबाग आंदोलन के साढ़े तीन महीने हो रहे हैं लेकिन सरकार का रवैया हठधर्मिता से अधिक कुछ भी नहीं ज़ाहिर कर रहा है फिर भी गाँववालों की हिम्मत और प्रतिरोध की ताकत जगज़ाहिर हो चुकी है। जिन गाँवों पहले उदासी थी अब वे भी अँगड़ाई लेकर उठ खड़े हुये हैं। खिरियाबाग का अनुशासन बना हुआ है। सुबह से दोपहर तक घरों और खेतों में काम करने के बाद महिलाएँ घरों से अपनी बनाई तख्तियाँ लेती हैं और दो बजे से पाँच बजे तक खिरियाबाग में जमी रहती हैं। कभी श्रोता बनकर, कभी वक्ता बनकर, कभी गीत गाते हुये और कभी नारे लगाते हुये। जनवरी का महीना आधे से अधिक बीत चुका है। पूरा भारत ठंड की चपेट में है। पारा पाँच डिग्री के आसपास आ चुका है। लोग घरों में अलाव के पास बैठकर शरीर को गर्माहट देने की कोशिश करते हैं तब इन गांवों की किसान औरतें आंदोलन को अलाव बना रही हैं। इस आंदोलन ने अनेक महिलाओं को प्रतिरोध का चेहरा बना दिया है। इन्हीं में एक जमुआ हरीराम की रहनेवाली नीलम कहती हैं- ‘अब खिरियाबाग मान-सम्मान की लड़ाई बन गया है। अपनी ही जमीन और गाँव से हमको कोई बेदखल नहीं कर सकता।’

एक और महिला कहती है-‘हमको तोड़ने और झुकाने की बहुत कोशिशें हुई हैं। धमकियाँ दी गईं। लालच का टुकड़ा फेंका गया लेकिन हम अपनी एकता और ईमान नहीं बेचेंगे। खिरिया बाग अब जमीर-जमीन की आर-पार लड़ाई लड़ रहा है।’

कुछ महिलाएँ जो पहले आंदोलन से नहीं जुड़ी थीं और काम में लगी रहती थीं, अब वे भी आने लगी हैं। उन्होंने लगातार यहाँ जुटान देखा और इस ऊहापोह में रहीं कि वहाँ जाना चाहिए या नहीं, क्योंकि अगर वहाँ जाएंगी तो घर में रोटी कहाँ से बनेगी। लेकिन बाद में उन्हें इसका उत्तर मिल गया। खेत मजदूरी करके अपने बच्चों का पेट पालनेवाली हिरावती कहती हैं कि ‘पहले नहीं समझ में आया कि यहाँ क्या चल रहा है लेकिन जब हमारे गाँव में कई लोग आकर मुआवज़ा में मिलनेवाले रुपए की बात करने लगे तब मेरे कान खड़े हो गए। मैं भी नहीं चाहती कि मेरा घर उजड़े। तब मुझे लगा कि वहाँ जाकर देखती हूँ। वहाँ की बातें सुनकर लगा कि ये लोग तो हम सबकी बात कर रहे हैं। तब से लगातार आ रही हूँ।’

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आंदोलन तोड़ने की कोशिशें

 आंदोलन के दो महीने पूरा होने पर बनारस से एक पदयात्रा निकालने की योजना बनी। तय दिन अलग-अलग जगहों से चलकर आनेवाले लोगों को वाराणसी जंक्शन से ही गिरफ्तार कर लिया गया और पुलिस लाइन में ले जाकर नज़रबंद कर दिया गया। प्रशासन नहीं चाहता था कि खिरियाबाग के समर्थन में बनारस से कोई पदयात्रा निकले और जनसाधारण के मन में जिज्ञासा, सरोकार और समर्थन की भावना पैदा हो। संदीप पांडे, राजीव यादव आदि को जबरन कमरे में बंद कर दिया गया। जब इन्हें छोड़ा गया तो संदीप पाण्डेय ने सार्वजानिक वाहन से जाने की मंशा जाहिर की लेकिन पुलिस उपायुक्त ने उनसे कहा कि आपको मैग्सेसे अवार्ड मिला हुआ है, आपको ऐसे नहीं बल्कि सम्मान से अपनी गाड़ी में पहुंचाएंगे। दो घंटे बाद गाड़ी आई और संदीप पाण्डेय व उनके सात साथियों को उस गाड़ी से पौने एक बजे करीब पुलिस लाइन्स से लखनऊ के लिए रवाना किया गया, इस आदेश के साथ कि गाड़ी कहीं रोकी न जाए। 26 दिसम्बर को इस आन्दोलन के 75वें दिन आजमगढ़ में मिलने के वादे के साथ।

उनके जाने के बाद आजमगढ़ के 9 साथी पुलिस लाइन्स वाराणसी से अपनी गाड़ी पर रवाना होने के बाद मात्र 28-29 किलोमीटर की दूरी पर थाना चोलापुर में उनकी गाड़ी  UP50AB8001 को ओवेरटेक करती हुई बिना नंबर की एक मार्शल उनकी गाड़ी के सामने खड़ी हुई और बहुत ही हड़बड़ाते हुए दरवाजा खुलवाते हुए खुद को एटीएस या एसटीएफ का आदमी बताया। वे लोग सादी वर्दी में थे। राजीव यादव और उनके भाई विनोद यादव, जो गाड़ी चला रह थे, को मारते हुए अपनी गाड़ी में बिठाकर ले गए। साथ में गाड़ी की चाबी भी ले गए। गाड़ी के साथी कुछ समझ पाते तब तक गाड़ी निकल गई। बिना किसी सूचना या वारंट के इस तरह ले जाना एक तरह से पुलिस द्वारा अपहरण है, जो बहुत ही गंभीर मामला है। देश की सरकार किसी भी आन्दोलन का हल बातचीत से नहीं बल्कि आंतक से दमन कर करना चाहती है।

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लेकिन सिलसिला यहीं नहीं रुका। ठीक उसी तरह खिरियाबाग आंदोलन पर हमला जारी रहा जैसे दिल्ली के किसान आंदोलन को तोड़ने की कोशिश की गई थी। खिरिया बाग किसान-मजदूर आंदोलन को अर्बन नक्सल से जोड़कर अमर उजाला ने एक झूठी खबर प्लांट की। इस खबर का उद्देश्य आंदोलन को बदनाम करके खत्म करना था। ज़ाहिर है यह सरकार के इशारे पर किया गया और इसमें पत्रकार और अखबार के प्रबंधन को भारी भुगतान किया गया था। एक ऐसे संवेदनशील मुद्दे को इतने घातक तरीके से खबर के रूप में प्लांट करना और आंदोलन के समर्थकों को अर्बन नक्सल के रूप संदिग्ध बनाना कितना खतरनाक है यह कोई भी सचेत व्यक्ति समझ सकता है। यह सरकारी दमन का सबसे घिनौना तरीका है। कानून का षड्यंत्रकारी इस्तेमाल है लेकिन आजमगढ़ की जनता ने भी इसका माकूल जवाब दे दिया। 96 वें दिन की पूरी सभा इसी षड्यंत्र के खिलाफ तनी हुई मुट्ठियों के नाम रहा।

इस तरह की झूठी, मनगढ़ंत और षड्यंत्रकारी खबर छापने वाले अखबार को स्पष्टीकरण देने के लिए एक दिन का समय दिया गया और चेतावनी दी गई कि अगर स्पष्टीकरण नहीं दिया तो अमर उजाला की प्रतियां फूंकी जाएंगी।

ज्ञातव्य है कि अमर उजाला में 15 जनवरी को पुष्पेंद्र कुमार त्रिपाठी नामक पत्रकार की खबर में झूठा आरोप लगाया गया है कि आज़मगढ़ में हवाई अड्डे के लिए जमीन अधिग्रहण के खिलाफ चल रहे आंदोलन को अर्बन नक्सल तूल दे रहे। सुरक्षा एजेंसियों के हवाले से कहा गया है कि जमीन अधिग्रहण नियमानुसार स्थानीय लोगों की सहमति से हुआ है। जबकि यह पूरा का पूरा झूठ है। अब सारी दुनिया जान चुकी है कि 12-13 अक्टूबर 2022 की रात में सगड़ी के एसडीएम पुलिस और पीएसी लेकर आए और जमीन की नापजोख करने लगे। विरोध करने पर महिलाओं और बुजुर्गों पर लाठियाँ बरसाई।

राजीव यादव ने कहा कि ‘किसान 96 दिन से धरने पर बैठे हैं। न एक इंच जमीन दिया है, न देंगे।  खबर में जो कहा गया है कि लोग दूरी बनाए रखे हैं उनको जान लेना चाहिए कि खिरिया बाग आंदोलन में किसान नेता राकेश टिकैत, मेधा पाटकर, जगतार सिंह बाजवा, गुरुनाम सिंह चढूनी, मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित संदीप पाण्डेय, अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेश सचिव पूर्व विधायक राजेन्द्र यादव, पूर्व विधायक इम्तियाज अहमद, गिरीश शर्मा और विभिन्न संगठनों का समर्थन प्राप्त है।

आंदोलन स्थल पर अपने अधिकार के लिए लड़ने को मुस्तैद महिलायें

किसानों-मजदूरों ने अखबार में आंदोनकारियों को अर्बन नक्सल बताने की खबर का विरोध करते कहा कि ‘योगी-मोदी सरकार किसानों-मजदूरों पर मनगढ़ंत आरोप लगाकर आंदोलन को बदनाम करना चाहती है। अर्बन नक्सली कहकर खिरिया बाग में बैठी माताओं-बहनों की आवाज को कुचलना चाहती है। सरकार कितनी भी साजिश कर ले लेकिन लोकतांत्रिक-संवैधानिक तरीके से आंदोलन जारी रहेगा। किसानों-मजदूरों के खिलाफ फैलाए जा रहे झूठ, अफवाह और दुष्प्रचार का मुंहतोड़ जवाब देंगें। मोदी सरकार ने इसी तरह से ऐतिहासिक किसान आंदोलन को भी बदनाम करने के लिए उन्हें कभी अर्बन नक्सल, खालिस्तानी, आंदोलनजीवी कहकर बदनाम करने की कोशिश की थी और बाद में माफी मांगकर किसान विरोधी काले कानून को वापस लिया।  सरकार और उसकी एजेंसियां चाहे जितना भी झूठा आरोप लगाएं पूरा देश के किसान-मजदूर साथ हैं। किसान-मजदूर जमीन-मकान नहीं देंगे और सरकार को अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का मास्टर प्लान रदद् करना होगा। हमारी खेती-किसानी, गांव का विकल्प एयरपोर्ट विस्तार नहीं हो सकता।

वक्ताओं ने कहा कि प्रशासन छुपे तौर पर लालच देकर गांव वालों को तोड़ने की कोशिश कर रहा है, पर उनकी कोशिश कामयाब नहीं होगी। संदिग्ध लोग इंटेलिजेंस के नाम पर गांवों में घूम रहे हैं। ऐसे संदिग्धों को गांव में रोककर कंधरापुर थाने को सूचित किया जाएगा जिससे उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सके।

बिरादराना संगठनों का समर्थन

आंदोलन के तीन महीने पूरे होने पर 10 जनवरी को हुआ पर्यावरण-कृषि संकट पर सम्मेलन हुआ। पूर्व विधायक उत्तर प्रदेश किसान सभा महामंत्री राजेन्द्र यादव, किसान जागृति संगठन के अध्यक्ष और दिल्ली किसान आंदोलन में शामिल हरियाणा-पंजाब के किसान नेता राजकुमार भारत, सीपीआई की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ गिरीश शर्मा, सीपीआई राज्य सचिव अरविंद राज स्वरूप, जय किसान आंदोलन के नेता रामजनम यादव, भारतीय किसान यूनियन के लक्ष्मण मौर्य, पूर्वांचल किसान यूनियन के अध्यक्ष योगिराज पटेल, विवेक यादव, जन आंदोलन के राष्ट्रीय समन्वय के राज्य समन्वयक सुरेश राठौड़, महेंद्र राठौड़, अरविंद मूर्ति, पूर्व विधायक इम्तियाज अहमद, बनारस वाले मिश्रा जी हरीश मिश्रा ने संबोधित किया। अशोक गौड़ और साथियों ने बिरहा का गायन किया।

 

पूर्व विधायक उत्तर प्रदेश किसान सभा महामंत्री राजेन्द्र यादव ने कहा कि ‘आप तीन महीने से आंदोलन कर रहे हैं आपके संघर्ष को हमारा क्रांतिकारी सलाम। किसी के माई लाल में हिम्मत नहीं है कि आपकी जमीन ले ले। ऐतिहासिक किसान आंदोलन ने देश के किसानों को ताकत दी है। निरकुंश भाजपा सरकार को आपके आंदोलन के सामने झुकना होगा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का मास्टरप्लान वापस लेना होगा।

पूर्व विधायक इम्तियाज अहमद ने आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार भूमि अधिग्रहण कानून के खिलाफ काम कर रही है। आपने जिस तरह से लंबी लड़ाई का मन बनाया है हम आपके साथ हैं।

पूर्वांचल किसान यूनियन के अध्यक्ष योगीराज पटेल ने की हमारा संगठन आपके साथ है। जिस तरीके से आपके आंदोलन कर किसान नेता राजीव यादव का एसटीएफ ने अपहरण किया और वाराणसी में किसान नेताओं को हाउस अरेस्ट किया उसने साफ कर दिया कि आपके आंदोलन के सामने सरकार ने घुटना टेक दिया है।

सीपीआई राज्य सचिव अरविंद राज स्वरूप ने कहा कि माताओं-बहनों के आंदोलन का हम अपनी पार्टी की तरफ से समर्थन करते हैं।

सीपीआई के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ गिरीश शर्मा ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने कहा था कि हवाई चप्पल वाले को हवाई जहाज पर बैठाएंगे पर यहां तो गरीबों का हवाई चप्पल भी छीना जा रहा। हम हर दौर में लड़े हैं और इस लड़ाई को भी लड़ेंगे. हल्द्वानी में भी जमीन की लड़ाई लड़ी जा रही है। इस बुलडोजर को आपने तीन महीने से रोककर ऐलान कर दिया कि गरीबों के घरों पर सूबे में बुलडोजर नहीं चलेगा।

भारतीय किसान यूनियन वाराणसी के जिलाध्यक्ष लक्ष्मण मौर्य ने कहा कि विकास के जितने मानक हैं उन्होंने गांवों को उजाड़ दिया क्या यही विकास है। विकास में हमारी भागीदारी कहां है, रोजगार कहां है, सम्मान कहा है। क्या जमीन दे देना ही विकास है तो इस विकास को हम नहीं मानते।

बनारस वाले मिश्रा जी हरीश मिश्रा ने कहा कि ‘दुःखी मन से इस आंदोलन में शहीद हो गए किसानों-मजदूरों को श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं। जमीर और जमीन की माताओं-बहनों की इस लड़ाई में पूरा बनारस ही नहीं पूरा देश आपके साथ है। आर-पार की लड़ाई खिरिया बाग लड़ेगा।’

 

जय किसान आंदोलन के नेता रामजनम यादव ने कहा कि ‘आपकी लड़ाई  को हम वाराणसी से सलाम करने आए हैं। आपकी लड़ाई परिवर्तन की लड़ाई है, किसानी की लड़ाई है. इस मिट्टी में वो ताकत हैं जो इस निरकुंश सत्ता को घुटना टेकने पर मजबूर कर देगी।

पूर्वांचल किसान यूनियन के विवेक यादव ने कहा कि ‘सरकार की हिम्मत नहीं है कि आपकी जमीन ले लेंगे। पूरा पूर्वांचल आपके साथ है जरूरत पड़ी तो हम सूबे की सदन को घेर देंगे बस आप हिम्मत से लड़िए।’

तीन महीने पूरे होने पर किसान नेता राजीव यादव, डॉ अजय पटेल, बिलाल हासमी, जितेंद्र हरि पाण्डेय, विनोद यादव, अवधेश यादव, राजेंद्र यादव, किस्मती, फूलमति, सुनीता आदि ने संबोधित किया. अध्यक्षता जमीन मकान बचाओ संयुक्त मोर्चा संयोजक रामनयन यादव और संचालन पूर्वांचल किसान यूनियन के महासचिव वीरेंद्र यादव ने किया।

पर्यावरण और कृषि संकट पर चिंता

खिरिया बाग आंदोलन के 91 वें दिन प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सौम्य दत्त धरना स्थल पर समर्थन में पहुंचे। इस मौके पर मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित डॉ संदीप पाण्डेय, रवि शेखर, एकता शेखर, अभिषेक दूबे, सानिया अनवर, अंशुमान, निम्मी, इज़्मत अंसारी, सीलम भारती ने भी पर्यावरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर संबोधित किया।

प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सौम्य दत्त ने कहा कि ‘सरकार पेड़ लगाने की बात करती है लेकिन हवाई जहाज चलाकर जो प्रदूषण कर रही है उसकी कीमत जनता को चुकानी पड़ती है। हवाई जहाज से यात्रा करने में तेज रफ्तार की रेल गाड़ी की तुलना में प्रति यात्री 6 से 8 गुणा कार्बन उत्सर्जन होगा। नरेन्द्र मोदी की मेक इन इण्डिया कल्पना के विपरीत हवाई जहाज अमरीका या यूरोप से बन कर आएंगे जबकि वंदे भारत जैसी तेज रफ्तार वाली रेल गाड़ी हमारे यहां बनती है। यदि आजमगढ़ से दिल्ली की दूरी तय करने के लिए हवाई यात्रा की बजाए रेल लाइन सुदृढ़ करके तेज रफ्तार वाली रेल गाड़ी चलाई जाए तो शायद कुछ ही घंटों अधिक में वही यात्रा रेल से हो सकती है। रेल गाड़ी की क्षमता ज्यादा होगी, खर्च कम आएगा व भू-अधिग्रहण से होने वाली क्षति से भी बच जाएंगे। एयरपोर्ट के नाम लाखों पेड़ काट दिए जाएंगे जिससे पर्यावरण असन्तुलित होगा। किसान सबसे बड़ा पर्यावरणविद है।

रविशेखर

‘नरेन्द्र मोदी ने वैश्विक जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में यह घोषित किया है कि 2070 तक भारत एक कार्बन-तटस्थ देश बन जाएगा यानी हम जितना कार्बन उत्सर्जित करेंगे उतना सोख भी लेंगे। किंतु यदि हम हवाई यात्रा को बढ़ावा देंगे तो कार्बन उत्सर्जन तो बढ़ेगा ही इसलिए भी आजमगढ़ का प्रस्तावित अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा नरेन्द्र मोदी की घोषणा के विपरीत है।

‘यदि हमें कार्बन उत्सर्जन कम करना है तो हमें ऐसे यातायात के साधनों को बढ़ावा देना होगा जिनसे प्रदूषण कम हो। जीवाश्म ईंधन से संचालित होने वाले साधन ज्यादा प्रदूषण करेंगे ही। इसलिए हमे गैर-जीवाश्म ईंधन से संचालित रेलगाड़ी को बढ़ावा देने की योजना बनानी चाहिए।  हम आजमगढ़ से हवाई यात्रा का विकल्प दे सकते हैं जिससे कम प्रदूषण होगा।

जाने-माने पर्यावरणविद एवं जलवायु परिवर्तन पर काम करने वाले सौम्य दत्त ने कहीं. सौम्य दत्त पिछले दिनों मिस्र में हुए जलवायु परिवर्तन पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन सी.ओ.पी. 27 में भाग लेकर लौटे हैं। वे 2009 में सी.ओ.पी. 15 से लेकर सारे सी.ओ.पी. सम्मेलनों में भागीदार रहे हैं और दुनिया के पैमाने पर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एक मजबूत आवाज हैं।

पर्यावरण सम्मेलन का संचालन किसान नेता राजीव यादव ने किया। इस अवसर पर वीरेंद्र यादव, अभिषेक यादव, नीलम, अर्चना यादव, अवनीश यादव, महेंद्र यादव आदि ने भी विचार व्यक्त किया।

खिचड़ी के दिन लाई-चूड़ा और भेली का भोज

खिरिया बाग में मकर संक्रांति के अवसर पर संघर्ष की खिचड़ी,  लाई, रेवाड़ा, चूरा, भेली का आयोजन हुआ। विभिन्न गांवों के महिला-पुरुष चावल, दाल, आलू, मटर, टमाटर, लाई, रेवाड़ा, चूरा, भेली अपने घरों से खिरिया बाग लाए। दो दिन सभी ग्रामवासियों ने सामूहिक रूप से मकर संक्रांति मनाई। खिचड़ी ने किसान-मजदूर एकता की नई मिसाल कायम की। वक्ताओं ने कहा कि यह किसानों की फसलों का त्योहार है और हमारी लड़ाई फसलों-नस्लों को बचाने की है। खिचड़ी विभिन्नता में एकता का त्योहार है इसी एकता ने हमारे धरने को मजबूत किया।

खिरियाबाग में सामूहिक खिचड़ी त्योहार मनाते हुए किसान ताकि मजबूती और एकता बनी रहे

तय हुआ कि आज़मगढ़ के किसान महाराष्ट्र-गुजरात में किसान-मजदूर समिट में जाकर बताएंगे कि सरकार कैसे उनकी जमीनें छीनने की साजिश रच रही है?

वक्ताओं ने कहा कि खुफिया विभाग के अधिकारी-कर्मचारी के नाम पर व्यक्ति आते हैं और आंदोलन के बारे में पूछताछ और आने वाले वक्ताओं के बारे में बातचीत करते हैं। धरने के समर्थन में आने वाले आगंतुकों के बारे में जिस तरह से संदिग्ध बातें करते हैं उससे किसान नेताओं की सुरक्षा का सवाल भी उठता है, क्योंकि पिछले साल 24 दिसंबर को किसान नेता राजीव यादव और अधिवक्ता विनोद यादव का अपहरण वाराणसी से आते वक्त किया गया और स्थानीय चोलापुर थाने ने बताया कि एसटीएफ क्राइम ब्रांच ने उठाया। गांवों में जिस तरह से अपरिचित-संदिग्ध व्यक्ति लोगों के बारे में मालूम कर रहे हैं कि कौन दारू पिता है, किसके जमीनी झगड़े हैं या व्यक्तिगत विवाद हैं। ऐसी सूचनाएं इकट्ठा करके सरकार को लगता है कि आंदोलन को तोड़ लेगी तो यह नहीं होगा। सरकारी नौकरी और जो लोग गांव से बाहर रहते हैं उनके बारे में मालूम करना साबित करता है कि ऐसे लोगों पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही।

जनांदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय के समन्वयक किसान नेता राजीव यादव ने कहा कि महाराष्ट्र के सतारा के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता भगवान औघड़े ने सतारा के जिलाधिकारी को प्रधानमंत्री, नागरिक उड्डयन मंत्री, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र को संबोधित ज्ञापन भेजा। जब यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुम्बई में पूँजीपतियों के साथ इन्वेस्टर समिट कर रहे हैं तो ऐसे में मुंबई और अहमदाबाद में फार्मर-लेबर समिट करेंगे जहां आज़मगढ़ का किसान जाकर बताएगा कि किस तरह से उनकी जमीनों-मकानों से सरकार उनको उजाड़ना चाहती है।

12 जनवरी 2023 को चौसा किसान संघर्ष को समर्थन देने के लिए खिरिया बाग आज़मगढ़ से आंदोलनकारी बक्सर बिहार पहुंचे। पूर्वांचल किसान यूनियन के महासचिव वीरेंद्र यादव, किसान नेता राजीव यादव, अधिवक्ता विनोद यादव, राजकुमार भारत, सिंटू, प्रेमचंद्र, अवधेश यादव, विजय यादव प्रतिनिधमंडल में शामिल थे। किसान नेताओं ने कहा किसानों-मजदूरों की सबकी लड़ाई एक है हम किसानों के साथ हैं।

संदीप पांडे

किसान नेताओं ने कहा कि बिहार की धरती से किसानों ने हक-हुक़ूक़ के लिए जो तूफान खड़ा किया हैं हम सब साथ हैं। लाठी गोली के बल पर किसानों की मांगों को नहीं दबाया जा सकता। बक्सर में सरकार ने हिंसा भड़काई, सरकार ने आंदोलन को तोड़ने के लिए हिंसा फैलाने का काम किया। वायरल वीडियो में किसान माताओं-बहनों की चीखों का जवाब सरकार को देना होगा। पुलिस ने घरों में घुसकर तोड़फोड़ और मारपीट की, लाठियां बरसाई। पुरानी दरों पर मुआवजा देने का अपराध सरकार ने किया और अब फर्जी मुकदमें लादकर आंदोलन को तोड़ने की साजिश की जा रही है। पुलिस वाले ने बेरहमी से किसानों, महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गो तक को पीटा। यह कहां का न्याय है कि जमीन अधिग्रहण कर लिया मुआवजा नहीं दिया। तीन महीने से चल रहे धरने के पक्ष में विधानसभा में चर्चा न कराए जाने ने राजनीतिक दलों का पोल खोल दिया है।

इस बीच कादीपुर हरिकेश के किसान कुलदीप यादव का देहांत हो गया।

रोहित वेमुला के साथ ही खिरिया बाग के शहीदों की याद

खिरिया बाग धरना 97 वें दिन रोहित वेमुला की शहादत को याद करते हुए जारी रहा। आंदोलन के सक्रिय कार्यकर्ता गदनपुर हिच्छनपट्टी के नायक राम जो रोज निरंतर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाते थे। जमीन-मकान जाने के सदमे से आज उनका देहांत हो गया। खिरिया बाग आंदोलन में 20 किसान जमीन-मकान जाने के सदमे से शहीद हो चुके हैं। किसानों-मजदूरों ने दो मिनट का मौन रहकर श्रद्धांजलि दी।

जमीन मकान बचाओ संयुक्त मोर्चा के संयोजक राम नयन यादव ने कहा कि आरटीआई में बताया जा रहा है कि आज़मगढ़ में हवाई पट्टी के विस्तार हेतु प्रकरण शासन स्तर पर विचाराधीन है। शासन द्वारा भूमि अधिग्रहण के संबंध में निर्णय प्राप्त होने पर आपको नियमानुसार सूचित कर दिया जाएगा। वहीं सूचना मिल रही है कि एसडीएम सगड़ी अन्य राजस्वकर्मियों के साथ हवाई पट्टी स्थित एयरपोर्ट में गांव वालों को बुलाकर किसी कागज, जिसे सहमति पत्र बताया जा रहा, पर लोगों से हस्ताक्षर करवा रहे हैं। प्रशासन ने जिस तरह से झूठी सर्वे रिपोर्ट बनाई उसी तरह अब सहमति पत्र की साजिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर शासन-प्रशासन की कोई परियोजना है तो उसे क्यों छिपा कर किया जा रहा है। यह भूमि अधिग्रहण नियम के विरुद्ध है। इस ग़ैरकानूनी तरीके का जमीन पर उतरकर विरोध करेंगे। इसके लिए कल से गांव-गांव ग्रामीणों की टोली निकलेगी।

वक्ताओं ने कहा कि आंदोलन का समर्थन कर रहे जन आंदोलन के राष्ट्रीय समन्वय के राष्ट्रीय समन्वयक किसान नेता राजीव यादव के गांव घिनहापुर पुलिस द्वारा पूछताछ करना किसी साजिश की ओर इशारा करता है। अखबारों में भी आंदोलन के बारे में सुरक्षा एजेंसियां अफवाह फैला रही हैं।

भू-अधिग्रहण अधिनियम के प्रावधान  का उल्लंघन 

वक्ताओं ने कहा कि कभी किसान नेताओं का उत्पीड़न किया जा रहा तो कभी गैरकानूनी तरीके से अधिग्रहण की कार्रवाई की जा रही है इसका खिरिया बाग आंदोलन विरोध करता है। भूमि अधिग्रहण पुनर्वास एवं पुनस्र्थापना कानून 2013 के प्रावधानों के अनुसार अध्याय 2 धारा 4(i) में जब भी कोई सरकार भूमि अधिग्रहीत करना चाहती है तो उसे सम्बन्धित पंचायत से सम्पर्क बनाना होगा और उसके साथ मिलकर सामाजिक प्रभाव आंकलन करना होगा, जिसे उपधारा 2 के अनुसार स्थानीय भाषा में छाप कर प्रभावित क्षेत्रों में बांटना होगा। यह सुनिश्चित करना होगा कि आंकलन करते समय पंचायत व ग्राम सभा को उपयुक्त प्रतिनिधित्व दिया गया है। उक्त मूल्यांकन घोषणा करने के 6 माह के भीतर पूरी की जानी है। इस आंकलन में उपधारा 3-(2) के अनुसार सामाजिक प्रभाव आंकलन में यह मूल्यांकन किया जाना है कि यह सार्वजनिक हित की पूर्ति करता है, प्रभावित परिवार कितने हैं, उनकी कितनी जमीन व इमारतें, कितनी सार्वजनिक व निजी इमारतें व बसायतें प्रभावित होंगी, आवश्यक अधिग्रहण एकदम कम से कम है, इसके लिए कोई विकल्प मौजूद नहीं है और इसके अन्य सामाजिक प्रभाव क्या पड़ने हैं तथा इन सब का खर्च कितना पड़ेगा। इसी के साथ-साथ पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन भी किया जाना है और प्रभावित परिवार की आजीविका की पूर्ति का भी। धारा 4 की उपधारा 4 के अनुसार सामाजिक प्रभाव प्रबंधन योजना भी बनाई जानी है। धारा 5 के अनुसार प्रभावित इलाके में सरकार द्वारा सुनवाई कराना अनिवार्य है जिसकी तिथि, समय और स्थान घोषित किया जाना होगा। धारा 6 के अनुसार इस उपरोक्त सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन तथा प्रबंधन रिपोर्ट स्थानीय भाषा में पंचायत को उपलब्ध करानी होगी।

वक्ताओं ने कहा कि कानून के प्राविधानों को धता बताकर की जा रही कार्रवाई का हम विरोध करेंगे। धरने को दुखहरन राम, रामनयन यादव, राजीव यादव, राजकुमार भारत ने संबोधित किया. अध्यक्षता नरोत्तम यादव और संचालन राधेश्याम राव ने किया।

इस तरह दिया जनता ने जवाब

राम नयन यादव ने कहा ‘लगता है कि आज़मगढ़ का प्रशासन खिरिया बाग आंदोलन को तितर बितर करने की तैयारी में है। उसके नेताओं की धरपकड़ करने के मूड में है।’

इसका संकेत तब दिखा जब आज़मगढ़ के जिलाधिकारी फौज-फाटे के साथ आज खिरिया बाग पहुंचे। लगा कि बातचीत का कोई नया पन्ना खुलनेवाला है। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

आजमगढ़ जिलाधिकारी महोदय खिरियाबाग पहुंचे लेकिन किसानों ने उनकी मांग ठुकराते हुए तगड़ा जवाब दिया

जिलाधिकारी महोदय आंदोलन की बात सुनने नहीं, लोगों से आंदोलन रोक दिये जाने की बात कहने आये थे। गोया वे कहेंगे और आंदोलन रोक दिया जायेगा। तो जो होना चाहिए था, वही हुआ। जनता ने नारों के जरिये उन्हें तगड़ा जवाब दे दिया और उन्हें उल्टे पांव वापस जाने को मजबूर कर दिया कि हवाई अड्डे के विस्तारीकरण का मास्टर प्लान वापस हो।

जिलाधिकारी महोदय को उम्मीद नहीं थी कि आंदोलन से पीछे हटने की पेशकश करने पर लोग इस कदर उखड़ जायेंगे और नारों से उनकी बोलती बंद कर देंगे।

अब आगे देखना है कि आंदोलन को तोड़ने के लिए जिला प्रशासन क्या करता है और कैसे हथकंडे अपनाता है?

राजीव यादव ने अपील की है कि कल यानी 26 जनवरी को भारतीय गणतन्त्र की तिहत्तरवीं वर्षगांठ पर खिरिया बाग में किसान-मजदूर परेड में का आयोजन किया गया है। आइये, आप भी पूर्वांचल की धरती पर अन्नदाताओं-मेहनतकशों के संघर्ष के साथी बनें!

अपर्णा रंगकर्मी और गाँव के लोग की कार्यकारी संपादक हैं। 

गाँव के लोग
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