Friday, June 21, 2024
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पुलिस ने शिकायतकर्ता को ही रखा कस्टडी में, ज़मानत के दौरान बिगड़ी तबियत बाद में हुई मौत

मीरजापुर। ‘साहब! बाबूजी तो थाने पर समाधान के लिए गए थे, यह उन्हें नहीं पता था कि यह फैसला उनके जीवन का आखरी फैसला साबित हो सकता है। अन्यथा वह थाने पर जाते ही नहीं, हम खुद ही उन्हें थाने पर ना जाने देते, लेकिन जरा भी यह पता नहीं था कि बाबूजी हमारे सदा […]

मीरजापुर। ‘साहब! बाबूजी तो थाने पर समाधान के लिए गए थे, यह उन्हें नहीं पता था कि यह फैसला उनके जीवन का आखरी फैसला साबित हो सकता है। अन्यथा वह थाने पर जाते ही नहीं, हम खुद ही उन्हें थाने पर ना जाने देते, लेकिन जरा भी यह पता नहीं था कि बाबूजी हमारे सदा सदा के लिए चले जाएंगे, थानेदार का यह बुलावा उनके लिए मौत का बुलावा साबित हो जाएगा’ यह कहते हुए राजदेव सरोज फफक-फफक कर रो पड़ते हैं।

यह दर्द भरी पीड़ा उस राजदेव सरोज की है जिनके 60 वर्षीय बाबूजी की मौत पुलिस प्रताड़ना की वजह से हो जाती है। परिजन सीधे-सीधे उनकी मौत के लिए पुलिस खास करके थाना प्रभारी लालगंज को जिम्मेदार ठहराते हैं। कहते हैं कि “2 दिनों तक पुलिस कस्टडी में बेगुनाह होते हुए भी अपराधियों की भांति बैठाया जाता है, ऊपर से मोटी रकम की डिमांड, जमानत के लिए तहसील पर जाने के बाद भी पुलिस कि मानसिक प्रताड़ना से हमारे पिताजी बिल्कुल घबरा गए थे।

मिर्ज़ापुर जिले के लालगंज कोतवाली से 17 किमी दूर एक गांव है रामपुर ठाकुर दयाल, इसी गांव के निवासी थे  राज कुमार सरोज (60) पुत्र हलबल सरोज बीते शुक्रवार, 30 जून 2023 को सुबह तकरीबन 9 बजे राजकुमार सरोज के (जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र एवं बयान के आधार पर) दरवाजे के सामने झलरा देवी पत्नी स्वर्गीय सखरज, शकुंतला देवी पत्नी थुकावन उर्फ गौतम सरोज तथा खेत्तल पुत्र स्वर्गीय सखरज फावड़ा, डंडा तथा खुरपी लेकर उनके दरवाजे के सामने खोदना शुरू कर दिए थे। मना करने पर लड़ाई झगड़ा, मारपीट के साथ ही गाली-गलौज देना शुरू कर दिए थे। बीच बचाव के लिए पहुंची राजकुमार की बहू बबीता एवं उनकी पत्नी रामादेवी को भी विपक्षी मिलकर मारने पीटने लगे थे। बीच बचाव करने एवं समझाने बुझाने के बावजूद भी पीछे हटने के बजाए ईट पत्थर चलाना शुरु कर दिए थे जिसकी सूचना 112 नंबर पर देकर पुलिस को बुलाया गया सूचना पर मौके पर पहुंची  पुलिस ने दोनों पक्षों को किसी प्रकार समझा बुझा दिया था। मौखिक तौर पर पुलिस समझौता करा कर चली गई थी। इसके बाद भी विपक्षी मारपीट पर आमादा थे। जिसकी शिकायत लेकर पीड़ित परिवार दुबार एवं लहंगपुर चौकी पर जा कर शिकायत करते हुए कार्रवाई की गुहार लगाया।

परिवार में छा गया मातम

आरोप है कि शिकायत पर कार्रवाई के बजाय राजकुमार और उनके बेटों को पुलिस चौकी पर बैठा लिया गया। जहाँ चौकी इंचार्ज लहंगपुर द्वारा ₹10 हजार की व्यवस्था करके तुरंत देने की डिमांड रखी गई और कहा गया कि “10 हजार दे दोगे तो तुम्हारा मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा और तुम लोगों का चालान भी नहीं किया जाएगा।”इस बीच 2 दिनों तक चौकी में बैठाए भी रखा गया किसी अपराध के, उनका चालान कर दिया गया। उप जिलाधिकारी मड़िहान के कोर्ट से मुचलका पर छोड़े जाने के बाद मार की हालत बिगड़ने लगी थी। मंगलवार 4 जुलाई 2023 को पुनः उपजिलाधिकारी मड़िहान के कोर्ट में जमानत कराते समय राजकुमार की हालत बिगड़ गई थी। हालत बिगड़ने के बाद रामकुमार को आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया जहां से उनकी स्थिति बिगड़ती देख उन्हें मंडलीय अस्पताल मिर्जापुर के लिए रेफर कर दिया गया था, जहां देर शाम उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।

पुलिस प्रताड़ना से हुई राजकुमार की मौत

राजकुमार की मौत से परिवार सहित गांव में हड़कंप मच गया । परिजन जहां पूरी तरह से पुलिस को आरोपित कर रहे हैं, तो वही गांव के लोग भी दबी जुबान कहते हैं कि ‘यदि पुलिस ने जरा भी सूझ-बूझ से फैसला लेते हुए इस पर त्वरित कार्रवाई की होती तो राजकुमार आज जिंदा होता और इतना बड़ा बखेड़ा भी ना खड़ा होता। लेकिन  पुलिस ने एक पक्षीय कार्रवाई करते हुए पीड़ित पक्ष को ही थाने में बिठा कर आर्थिक, मानसिक रूप से उत्पीड़ित करने का जो कार्य किया है वह कहीं ना कहीं से राजकुमार की  मौत का कारण बना है। मृतक राजकुमार के बेटे राजदेव का आरोप है कि “पुलिस कस्टडी में बिठाए जाने के साथ ही बार-बार रुपयों की डिमांड और जीवन तबाह कर देने की धमकियों से बाबूजी गहरे सदमे में चले गए थे जो उनकी  मौत का कारण बन गया। इसके लिए पूरी तरह से लहंगपुर चौकी प्रभारी एवं लालगंज थाना प्रभारी जिम्मेदार हैं। उन्होंने जिस मोबाइल नंबर से लगातार जिस मोबाइल नंबर पर रुपयों की डिमांड की बात कही जा रही थी फोन आ रहे थे उसकी भी जांच कराए जाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि कॉल रिकॉर्ड से खुद सत्यता सामने आ जाएगी।’

दस हजार दे देते तो शायद बच जाती जान

पुलिसिया प्रताड़ना से पति की हुई मौत से बुरी तरह से आहत राजकुमार की पत्नी रामादेवी गहरे सदमे में हैं। नात-रिश्तेदारों सहित गांव की महिलाएं उनके आंसू पोछने का भरसक प्रयास तो कर रही हैं, लेकिन उनके बहते आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। रामादेवी भी पति के मौत के लिए सीधे तौर पर पुलिस को जिम्मेदार ठहराती हैं। वह कहती हैं कि ‘लालगंज थाना प्रभारी ज्ञानू प्रिया खुद एक महिला है, लेकिन उन्होंने मेरी  भी पुकार नहीं सुनी।’वह आगे कहती हैं कि ’10 हज़ार रुपया बदे पुलिस पीछे-पीछे लगल रहल, ई पचे (बेटों की ओर इशारा करते हुए) कहां से देते दसी हजार…..कह कर दहाड़े मारकर रोने लगती हैं।’

इस मामले में पीड़ित परिवार के लोगों ने जिलाधिकारी सहित पुलिस अधीक्षक को बुधवार को पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और उचित कार्रवाई की मांग की है। दूसरी ओर इस मामले में क्षेत्राधिकारी लालगंज मंजरी राव ने कुछ भी कहने से साफ इंकार करते हुए कहा है कि जब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं आ जाती है, इस मामले पर कुछ कह पाना संभव नहीं है।

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