Wednesday, July 17, 2024
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पिछड़ों को मुख्यधारा में शामिल करने की चुनौती और पेपरलीक के बढ़ते मामले

4 जून से पहले, चुनाव को लेकर जहां पूरे देश में अलग-अलग पार्टियों की राजनीति चर्चा केंद्र में थी, वहीं 4 जून को नीट के नतीजे आने बाद नीट पपेरलीक होने की चर्चा हो रही है। फिर 18 जून को नेट परीक्षा का पेपरलीक हो गया। परीक्षा एजेंसी ने दुबारा परीक्षा करवाने की बात जरूर कही है लेकिन क्या आने वाले दिनों में पेपरलीक नहीं होगा, इसका भरोसा युवा कैसे करें?

प्रयागराज : आखिर कब तक विश्वविद्यालयों में दलित, पिछड़े और आदिवासियों को NFS किया जाता रहेगा?

देश के विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसरों के पदों पर साक्षात्कार के आधार पर चयन किया जाता है। विश्वविद्यालयों की साक्षात्कार समितियों में अधिकतम एक्सपर्ट सवर्ण प्रोफेसर होते हैं।  इसलिए वे बड़ी आसानी से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के कोटे की सीट को None Found Suitable कर देते हैं। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, प्रयागराज का है।

आरएसएस प्रमुख और भाजपा, आरक्षण समीक्षा की आड़ में पिछड़ों को उचित प्रतिनिधित्व से दूर रखने की मंशा रखते हैं

कुछ समय पहले तक आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ओबीसी आरक्षण के सख्त खिलाफ थे और आरक्षण को लेकर लगातार विरोध में बयान दिया करते थे लेकिन चुनाव आते ही उनके सुर बदल गए क्योंकि देश में ओबीसी का बड़ा वोट बैंक हैं।

राजस्थान : सरकार द्वारा लागू योजनाएँ क्यों नहीं लाभार्थियों तक पहुँच पाती?

सरकार ने गरीब और वंचितों के उत्थान के लिए अनेकों योजनाएं तो चलाई हैं, लेकिन जिन्हें इन योजनाओं का लाभ मिलनी चाहिए उन्हें समय पर नहीं मिल पा रहा है।

ओबीसी शोधार्थियों के वजीफे को लेकर कांग्रेस ने भाजपा को घेरा

नई दिल्ली (भाषा)। लोकसभा के शीतकालीन सत्र में प्रश्नकाल के दौरान विपक्ष ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के शोधार्थियों की छात्रवृत्ति और आटीई को...

सनातन और हिन्दू धर्म

हिंदू धर्म का नाम किस प्रकार प्रचलन में आया। सनातन धर्म के लिए हिंदू धर्म नाम ज्यादा प्रचलित है। इस धर्म के अनुयायियों को...

छत्तीसगढ़ में दलित युवाओं ने अपने अधिकार के लिए निर्वस्त्र हो किया प्रदर्शन

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज अनुसूचित जाति, जनजाति समाज के युवाओं ने अपने हक के लिए सड़क पर  निर्वस्त्र प्रदर्शन किया।  राज्य की...

पुलिस ने शिकायतकर्ता को ही रखा कस्टडी में, ज़मानत के दौरान बिगड़ी तबियत बाद में हुई मौत

मीरजापुर। 'साहब! बाबूजी तो थाने पर समाधान के लिए गए थे, यह उन्हें नहीं पता था कि यह फैसला उनके जीवन का आखरी फैसला...

बहुजन छात्रों के साथ नाइंसाफी का जिम्मेदार आखिर कौन है

23 जुलाई, 2022 के हिन्दू समाचार पत्र में एक महत्वपूर्ण ख़बर है कि मदुरई के कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद एस वेंकटेशन के एक सवाल...

जटिल है असमानता का विमर्श

सावित्री बाई फुले विश्वविद्यालय पुणे,जेएनयू तथा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ दलित स्टडीज द्वारा 20 राज्यों के 110800 परिवारों को सम्मिलित करते हुए सन 2015 से 2017 के मध्य किए गए अध्ययन के बाद संबंधित अध्ययनकर्ताओं  ने अपने निष्कर्ष में बताया कि 22.3 प्रतिशत उच्चतर जातियों के हिंदुओं के पास देश की 41 प्रतिशत संपत्ति है। जबकि 7.8 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति की आबादी के पास 3.7 प्रतिशत संपत्ति ही है। हिन्दू अनुसूचित जाति के लोगों के पास केवल 7.6 प्रतिशत संपत्ति ही है। अनुसूचित जाति का कोई श्रमिक सामान्य जाति के अपने समकक्ष श्रमिक की आय का केवल 55 प्रतिशत ही प्राप्त कर पाता है।

आरक्षित वर्ग की अति पिछड़ी जातियाँ वही सोचती हैं जो ब्राह्मणवाद चाहता है

अगर यह जानने का प्रयास हो कि भारत में वह कौन सा वर्ग है, जो सबके निशाने पर रहता है तो शायद उसका सही...

समाज मेरा चेहरा नहीं बल्कि काम देख कर इकट्ठा हो रहा है

पिछले कई वर्षों से उत्तर प्रदेश में अति पिछड़ी जाति में आने वाले कुम्हार समाज के ऊपर लगातार सामंतों और अपराधियों के हमले हो...

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