Thursday, July 9, 2026
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राजनीति

नेहरू को कोसते कोसते नेहरू ही बेंचमार्क बन गए

हमारे देश का लोकतांत्रिक सिस्टम अविश्वसनीय हो गया है। देश की सभी संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता खत्म कर दी गई है — संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट, चुनाव आयोग और सभी जांच एजेंसियों तक। आज सभी संवैधानिक संस्थाएं सिर्फ़ BJP और RSS के इशारे पर काम कर रही हैं। आज से दो हफ़्ते बाद, 25 जून को, जब 1975 में 19 महीने की इमरजेंसी और सेंसरशिप लागू होने के 51 साल पूरे हो जाएंगे, तो RSS और BJP के लोग अभिव्यक्ति की आज़ादी और 19 महीने की तानाशाही पर चर्चा करेंगे। 51 साल पहले हम भी उस इमरजेंसी के शिकार हुए थे। लेकिन 19 महीने की इमरजेंसी की तुलना में, हम पिछले 12 सालों से — यानी एक दशक से ज़्यादा समय से — अघोषित इमरजेंसी और सेंसरशिप का सामना कर रहे हैं।

जॉर्ज फर्नांडिस के बहाने विवादों की सियासत को मुड़कर देखना

जॉर्ज फर्नांडिस राजनीतिक जीवन विवादों से भरा रहा। 1974 की रेल हड़ताल को सरकार ने देशद्रोह कहा। दो करोड़ रेलकर्मी हड़ताल पर गए, रेल सेवा ठप हुई। विपक्ष ने इसे अराजकता कहा, सरकार ने बर्बादी। आपातकाल के दौरान 'बड़ौदा डायनामाइट केस' में उन पर बम विस्फोट की साजिश का आरोप लगा। बाद में आरोप साबित नहीं हुए, पर सरकार विरोध के नाम पर हिंसा की राह चुनने की आलोचना हुई। रक्षामंत्री रहते 2001 में 'तहलका डॉट कॉम' स्टिंग ऑपरेशन हुआ। उनके ऑफिस के लोगों को रक्षा सौदों में रिश्वत लेते दिखाया गया। आरोपों के चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। बाद में क्लीन चिट मिली, पर छवि धूमिल हो चुकी थी। आलोचक कहते हैं वे सत्ता विरोध के नाम पर टकराव की राजनीति करते थे। IBM/कोका-कोला को भगाने से भारत में निवेश और टेक्नोलॉजी आने में देरी हुई। सिद्धांत की जिद में कई बार व्यावहारिक फैसले पीछे छूट गए। कई मुलाकातों की याद और जॉर्ज फर्नांडिस की लंबी तथा विवादभरी राजनीतिक पारी का विश्लेषण करते हुये उनकी 99वीं जयंती पर जाने-माने चिंतक, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ सुरेश खैरनार।

सुनाली के ऊपर अत्याचार करनेवाले किस भ्रूण हत्या की बात कर रहे हैं और किन नारियों का वंदन ?

भाजपा ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को हर रूप में चुनाव जीतने का औज़ार बना लिया। जो अधिनियम तीन साल पहले पारित हो गया था उसे एक बार फिर परिसीमन के लिए संसद में लाया गया। मौजूदा संख्या में भागीदारी न देने की बेईमानी को परिसीमन की आड़ में छुपाने की संघी-भाजपाई मंशा का पर्दाफाश हो गया तब बेहिसाब पैसा खर्च करके प्रधानमंत्री मोदी भ्रूण हत्या का रोना रो रहे हैं। लेकिन सवाल कई और भी हैं। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले की निवासी तीन महीने की गर्भवती घरेलू सहायिका सुनाली को जबरन बांग्लादेश की सीमा पार कराया गया। बिना किसी अपराध को उसे बांग्लादेश की जेल में रहना पड़ा। वहीं जेल में उसने अपने बच्चे को जन्म दिया। एक जटिल कानूनी लड़ाई के बाद वह अपने देश वापस आ पाई है। मोदी ने महिलाओं की गरीबी, लाचारी और भावनाओं का दोहन किया और उन्हें एकमुश्त वोटर के रूप देखा। आज देश में महिलाओं की दुर्दशा का कोई अंत नहीं। सबसे बड़ी बात कि संसद की मौजूदा स्थिति में महिलाओं को आरक्षण भाजपा देने को ही तैयार नहीं। ऐसे में किस भ्रूण हत्या की बात करके रोना-पीटना चल रहा है इसे समझा जाना चाहिए। जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता और चिंतक डॉ सुरेश खैरनार की खुली चिट्ठी।

क्या अब साम्राज्यवाद का सरगना नहीं रह पाएगा अमेरिका

क्यूबा के मौजूदा ऊर्जा संकट को पैदा करने और अब खुद क्यूबा पर कब्ज़ा जमाने की चाह रखने वाले ट्रंप के बयान को देखने के बाद, यह कहावत याद आ गई - 'नंगे से तो भगवान भी डरते हैं।' हालाँकि, इस 'नंगे' द्वारा शोषित की गई लड़कियों का गुस्सा अब पूरी दुनिया एपस्टीन फाइलों के ज़रिए देख रही है। फिर भी, इस 'नंगे' को रोकना ही दुनिया की सभ्यता पर मंडराता सबसे बड़ा खतरा है। आखिर किसी में भी इस बारे में खुलकर बोलने की हिम्मत क्यों नहीं है?

साम्राज्यवाद के नए दौर की शुरुआत है ईरान पर हमला

घटनाओं में भारत की भूमिका उसकी बदलती विदेश नीति के बारे में आँखें खोलने वाली है। शुरुआत में भारत गुटनिरपेक्ष था, और उसके ईरान के साथ बहुत सौहार्दपूर्ण संबंध थे। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक आदान-प्रदान बेहतरीन था। अब हम देखते हैं कि भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने युद्ध से ठीक पहले इज़राइल का दौरा किया। इस दौरे का उद्देश्य देश को पता नहीं था। उन्हें इज़राइल का सर्वोच्च सम्मान मिला, और उन्होंने यह वचन दिया कि भारत हर सुख-दुख में इज़राइल के साथ खड़ा रहेगा। अगले ही दिन, I-A ने ईरान पर हमला कर दिया। श्री मोदी ने ईरान के सर्वोच्च नेता के निधन पर कोई ट्वीट नहीं किया, और एक ऐसा गोलमोल बयान जारी किया जिसमें हमलावर और पीड़ित देश, दोनों को एक ही तराज़ू में तौला गया।

Lok Sabha Election : संविधान को खत्म करने का प्रयास करने वालों को सबक सिखाना होगा, छपरा में बोले लालू प्रसाद यादव

लालू प्रसाद ने केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर परोक्ष रूप से प्रहार करते हुए कहा, ‘बाबा साहेब आंबेडकर के बनाए संविधान को मिटाने और खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। अगर संविधान नहीं होता तो न आरक्षण होता और न ही लोकतंत्र।

Lok Sabha election : क्या उत्तराखंड के पहाड़ भाजपा से मांगेंगे अपनी अस्मिता का जवाब? इस बार चौंका सकते हैं पहाड़ी राज्य के नतीजे

टिहरी सीट इस समय देश भर में चर्चा का विषय बन चुकी है क्योंकि युवा प्रत्याशी बॉबी पँवार ने भाजपा के लिए सिरदर्द पैदा कर दिया है। पिछले कुछ वर्षों में वह उत्तराखंड के युवाओं की आवाज बनकर उभरे हैं। उन्होंने पेपर लीक के खिलाफ पूरे प्रदेश के युवाओ के साथ आंदोलन किया जिसके चलते उन पर कई फर्जी मुकदमे दर्ज किये गए। बॉबी पँवार उत्तराखंड में चल रही बदलाव की आहट का प्रतीक हैं।

साझा प्रेस वार्ता में राहुल और अखिलेश ने पीएम मोदी समेत भाजपा पर बोला हमला, कहा 150 सीट पर सिमट जाएगी भाजपा

गाजियाबाद में साझा प्रेस वार्ता में राहुल गाँधी ने कहा, नरेंद्र मोदी कहते हैं कि इलेक्टोरल बांड राजनीति में पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया अगर यह सच है तो उस सिस्टम को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द क्यों किया?

Lok Sabha Election : केरल सीएम पिनाराई विजयन ने पीएम मोदी पर किया पलटवार, यूपी की विकास रैंकिंग पर आत्मनिरीक्षण करने की दी नसीहत

विजयन ने मोदी और भाजपा पर राज्य के प्रति ‘पाखंडी दृष्टिकोण’ अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केरल में सोमवार को प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए दो भाषणों में यही दिखा है।

Lok Sabha Election : डिंपल यादव ने मैनपुरी से नामांकन दाखिल किया, अखिलेश यादव ने पेपर लीक और किसान आत्महत्या के मुद्दों को उठाया

मैनपुरी लोकसभा सीट से आज डिम्पल यादव ने अपना नामांकन दाखिल किया। इस अवसर पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि सपा यह सीट भरी मतों से जीत रही है क्योंकि दूसरे दल जो सामने हैं, उनके पास दिखाने और बताने को कुछ नहीं हैं।

Lok Sabha Election : ‘मैं यादव परिवार के घर नहीं जाऊंगा’ कहने वाले शशांक मणि त्रिपाठी को बीजेपी ने देवरिया से बनाया उम्मीदवार

भाजपा ने शशांक मणि त्रिपाठी को अपना उम्मीदवार घोषित कर पूर्वांचल के बहुजनों को एक नायाब तोहफा दिया है क्योंकि अब तक की राजनीति में पूर्वांचल में किसी दल का कोई नेता जाति को लेकर इतना बेबाक बोलने वाला और इनके तरीके से खुलेआम जातिवाद करने वाला नहीं हुआ था।
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