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लाचार संसद (डायरी, 9 अगस्त, 2022)

बचपन की कहानियां बेकार कहानियां नहीं थीं। हालांकि अब जहन में कुछ ही कहानियां शेष हैं। अनेकानेक कहानियां अब जहन में नहीं हैं। वैसे यह भी एक…
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त्रासदियों की त्रासदी (डायरी, 24 जून, 2022)

आइंस्टीन अलहदा वैज्ञानिक रहे। कम से कम मेरे लिए तो वह अलहदा ही हैं। हालांकि उनके कुछ विचारों और सिद्धांतों से सहमत नहीं हूं लेकिन एक…
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कटघरे में भारतीय अदालतें (डायरी 24 फरवरी, 2022) 

भारतीय अदालतों की साख रोज-ब-रोज गिरती जा रही है। यह चिंतनीय स्थिति है। खासतौर पर उनके लिए जो इस देश से प्यार करते हैं और अमन-चैन के आकांक्षी…
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