Sunday, April 14, 2024
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क्या संदेशखाली भाजपा के लिए बंगाल में बड़ी जीत का रास्ता तय करेगा

चुनाव आते ही भाजपा सांप्रदायिक भाईचारे को बिगाड़ने की शुरुआत कर देती है। इस बार लोकसभा की ज्यादा सीट हासिल करने के लिए बंगाल के संदेशखाली में उपद्रव मचाने का काम शुरू कर दिया है। विस्तार से जानने के लिए पढ़िए यह लेख

बीजेपी सत्ता में आने के लिए एक भी मौका गंवाना नहीं चाहती है, इसलिए कश्मीर के साथ-साथ हिन्दू-मुस्लिम ध्रुवीकरण से लेकर अयोध्या, मथुरा, काशी को फानते हुए स्थानीय स्तर के बेवजह के हजारों मुद्दो को ग्लोबल बनाने में जुटी हुई है। देश की अर्थव्यवस्था ट्रिलियन में करने की योजना चल रही है लेकिन देश पर लाखों-करोड़ों का कर्ज होने के कारण इसका दबाव आम नागरिक के ऊपर आ गया है। इसलिए सत्ताधारी दल बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं का कोई हल निकालना छोडकर धार्मिक ध्रुवीकरण पर ज़ोर देते हुए तीसरी बार सत्ता में आने के लिए अपने चीर परिचित तरीके से बंगाल के संदेशखाली समाज में फूट डालो और राज करो की नीति पर काम शुरू कर दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में ऐलान किया है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की स्मृति में 370 सीटें जीतेगी।

यहाँ 370 आंकडे का मतलब है, संविधान की धारा 370, जो कश्मीर में लागू थी। जिसे भाजपा ने दुबारा सत्ता में आने के बाद 5 अगस्त, 2019 को जम्मू कश्मीर से हटा दिया था।

 पिछले चुनाव में भाजपा ने उत्तर भारत में हिंदू समुदाय के 49 प्रतिशत वोट हासिल करते हुए तीन सौ से अधिक सदस्यों को संसद में पहुंचाया था। पूरे देश में लोकसभा की 42 सीटें पश्चिम बंगाल में है जो लोकसभा सीट के हिसाब से चौथा  बड़ा राज्य है। भाजपा बंगाल में ज्यादा से ज्यादा सीटें पाने के लिए साम-दंड-भेद कर ज़ोर लगा रही है।

कहाँ है संदेशखाली    

पश्चिम बंगाल के सुंदरबन के उत्तर 24 परगना जिले के बशीरहाट ब्लॉक में स्थित दियारा का क्षेत्र है, जहां बोट से जाने के लिए तीन रुपये का टिकट लगता है। उसी बोट में मोटरसाइकल, साइकिल जैसे वाहनों के साथ लोग चढते कर बशीरहाट से आधा घंटा में संदेशखाली पहुँचते हैं।

2011 की जनगणना के अनुसार संदेशखाली की जनसंख्या एक लाख चौसठ हजार थी, जिसमें (1-64) 77% हिंदू, 22% मुस्लिम थे। बंगाल की 1-4 % जनसंख्या वृद्धि है। बिहार और यूपी(5%) को छोडकर बंगाल की जनसंख्या वृद्धि का अनुपात भारत के अन्य राज्यों की तुलना में (केरल, तमिलनाडु के अलावा) आधे से भी कम है। संदेशखाली की 2011 की जनगणना के अनुसार अभी की जनसंख्या दो लाख से ऊपर होगी। यहाँ से फिल्म अभिनेत्री नुसरतजहां तृणमूल कांग्रेस की संसद सदस्य हैं।

आज संदेशखाली भाजपा की वजह मीडिया में काफी चर्चा में है। 7 जनवरी को स्थानीय तृणमूल कांग्रेस के नेता शाहजहां के घर पर राशन घोटाले मामले में ईडी की रेड पड़ी थी। जिसे हजारों स्थानीय लोगों ने रोकने की कोशिश की। जिसमें ईडी के कुछ कर्मचारी जख्मी भी हुए थे और इस वजह से कोलकाता के राजभवन से राज्यपाल महोदय ने तुरंत संदेशखाली जाने का कष्ट किया था। फिर तो भाजपा के राज्य स्तरीय नेताओं से लेकर केंद्रीय नेताओं ने, एक के पीछे  एक लगातार संदेशखाली जाने का सिलसिला जारी रखा।  भाजपा के ताल पर नाचते हुए मीडिया लगातार इसे राष्ट्रीय स्तर पर हाईलाइट कर रहा है। लेकिन इसी  मीडिया ने दिल्ली से सौ दो सौ किलोमीटर के फासले में सहारनपुर, बलरामपुर, वुलगढी, लखीमपुर खीरी की हुई घटनाओं और दंगों की खबरों को  कभी खबर बनाने का कष्ट नहीं किया।

संदेशखाली चर्चा में क्यों 

 शिबू हाजरा और उत्तम, शाहजहाँ का करीबी सहयोगी है। जिस दिन यह घटना हुई उस दिन बंगाल विधानसभा में बजट प्रस्ताव पर चर्चा चल रही थी। उसी समय संदेशखाली में बडी संख्या में महिलाएं  प्रदर्शन कर यौन शोषण का आरोप लगाते हुए शिबू हाजरा को गिरफ्तार करने की मांग कर रही थीं। शिबू हाज़रा पहले सीपीएम में थे लेकिन 2011 के बाद तृणमूल कांग्रेस और भाजपा में शामिल हो गए हैं।

संदेशखाली में जेसीबी की मदद से धान की लहलहाती फसल को नष्ट कर वहाँ मछली पालन के लिए जबरदस्ती से पुकुर(तालाब) बनाने की बात से स्थानीय लोगों में असंतोष था, फिर उसमें संदेशखाली के तृणमूल कांग्रेस के कार्यालय में महिला के साथ दुर्व्यवहार करने की घटना भाजपा बार-बार कह रही है। जिसमें घटना को हिंदू महिलाओं के ऊपर अत्याचार हो रहा है, यह कह कर प्रचारित किया जा रहा है। हालांकि शाहजहां के दायें-बाएँ हाथ माने जाने वाले साथी उत्तम और शिबू हाज़रा (दोनों हिंदू है)  को पश्चिम बंगाल की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।

 उन्हें मुआवजा देने का वादा करने के बावजूद मुआवजा नहीं दिया गया। लेकिन बंगाल में सिर्फ जमीन का मुआवजा देने से समस्या का समाधान नहीं होता है। क्योंकि आज से पंद्रह साल पहले नंदीग्राम-सिंगूर के लोगों को जब यह पूछा कि ‘सरकार जमीन के बदले पैसे दे रही है, तो आप लोगों को आपत्ति क्यों है?’ आँखें नम करते हुए लोगों ने कहा कि ‘जमीन चली जाने से भविष्य में हमारे जीवनयापन का क्या साधन रहेगा?  क्योंकि पैसा तो चंद समय में खर्च हो जायेगा।  फिर हम गुजारे के लिए किस पर निर्भर रहेंगे?

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शेख शाहजहां तृणमूल कांग्रेस का स्थानीय नेता हैं। उसके चाचा सीपीएमके नेता थे। शाहजहां ने वहां पर यूवा तृणमूल कांग्रेस से अपनी राजनीतिक गतिविधियों की शुरुआत की है। राशन स्केम में शामिल होने के आरोप में बंगाल के मलिक नाम के मिनिस्टर को गिरफ्तार किया गया है।

 फूट डालो और राज करो भाजपा की पुरानी आदत

संदेशखाली पश्चिम बंगाल का ताजा उदाहरण है, जबकि भाजपा अपनी आद्तानुसार मणिपुर, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान और तथाकथित गुजरात मॉडल वाले राज्यों में आये दिन संदेशखाली से अधिक भयानक दलित महिलाओं पर अत्याचार  की घटनाएँ देखने-सुनने मिल रही है लेकिन भाजपा अनदेखा करते हुए मुंह पर पट्टी चिपका लेते है।

2014 में उत्तर प्रदेश में भाजपा के सत्ता में आने के बाद ही 14 अप्रैल को डॉ. बाबासाहेब की जयंती के दिन, सहारनपुर के कबीर मठ में बाबा साहब की मूर्ति स्थापना पर रोक लगाते हुए जयंती के कार्यक्रम में शामिल लोगों के ऊपर हमला किया गया, महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करते हुए उत्तर प्रदेश की पुलिस ने कार्यक्रम में शामिल लोगों को ही गिरफ्तार कर लिया। जबकि जिन लोगों ने दलितों को इस कार्यक्रम में रोकते हुए दंगे कराने में सक्रिय भूमिका निभाई थी, उन्हें हाथ भी नहीं लगाया।

वोरा कमेटी के रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय संसदीय राजनीति में  शामिल होने वाले लोगों में अपराधिक पार्श्वभूमि वालों का अनुपात पचास प्रतिशत से अधिक है। जिसमें कम या अधिक प्रमाण मे सभी राजनीतिक दलों में हैं। लेकिन सत्ताधारी दल भाजपा में यह संख्या सब से अधिक है। जो वर्तमान समय में भाजपा के शीर्ष से लेकर वॉर्ड स्तर तक देखी जा सकती है।

बंगाल में ममता भी लगा रही हैं ज़ोर

ममता बनर्जी एड़ी-चोटी एक करते हुए भाजपा के खिलाफ लगातार लोहा ले रही हैं। उनके दल के नेताओं को ईडी, सीबीआई तथा विभिन्न प्रकार की जांच में फंसाने के प्रयास लगातार कर रही है। संदेशखाली की घटना में भाजपा बंगाल में अपनी खुद की राजनीतिक हैसियत बनाने के लिए ममता बनर्जी को किसी तरह अपदस्थ करने की कोशिश में लगे हुए हैं। भारत के हर गैरभाजपा सरकारों के खिलाफ भाजपा के वफादार राज्यपाल बढ़-चढ़कर उसमे हिस्सा लेते हुए में सहयोग कर रही है।

सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस बात का संज्ञान लेते हुए राज्यपाल को हिदायत दी लेकिन राज्यपाल अपनी संवैधानिक भूमिका की जगह भाजपा के प्रचारक की भूमिका बेहतर निभा रहे हैं।

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  क्या से क्या हो गया            

1980 के बाद भाजपा धार्मिक ध्रुवीकरण के कारण अब तक 29% वोट की वृद्धि कर चुके हैं। बंगाल में 2019 में 42 लोकसभा सीटों में से 18 सांसद भाजपा चुने गए। और वर्तमान बंगाल विधानसभा में 77 बीजेपी के विधायक हैं। आजादी के बाद लगातार, पच्चीस साल सत्ता में रही कांग्रेस और 35 साल सत्ता में रहने वाले सीपीएम का एक भी विधायक नहीं है। सिर्फ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के सदस्यों की विधानसभा हैं। सबसे ज्यादा हैरानी की बात है कि पिछले विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सिर्फ दो प्रतिशत के वोटों का फासला है। जबकि तृणमूल कांग्रेस पंचायत चुनाव में 93% निर्विरोध जीत हासिल की थी।

भाजपा ने यह स्थिति चुनाव में हजारों करोड़ रुपये खर्च करने के बाद पाई। और इस बार तो भाजपा ने युध्द जैसी स्थिति बनाने की शुरुआत संदेशखाली से शुरू कर दी है।

डॉ. सुरेश खैरनार
डॉ. सुरेश खैरनार
लेखक चिंतक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं।

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