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Gaon Ke Log
जो भी कन्ना-खुद्दी है उसे दे दो और नाक ऊंची रखो। लइकी हर न जोती ! (तीसरा हिस्सा)
मेरे अरियात-करियात की बहुत कम औरतें स्वतंत्र और आत्मचेतस रही हैं l मजबूरी में कोई-कोई विधवा स्त्री भले ही अपनी मर्ज़ी से अपना जीवन...
बाबू जगदेव प्रसाद प्रतिमा स्थल दीनापुर चिरईगांव में जातिगत जनगणना संवाद संपन्न
दिनांक 18 अगस्त दिन में 3:00 बजे से बाबू जगदेव प्रसाद प्रतिमा स्थल दीनापुर चिरईगांव में वाराणसी पर जातिगत जनगणना जन संवाद कार्यक्रम संपन्न...
फुले-अंबेडकरवादी आंदोलनों के बहुस्तरीय विकास को समर्पित जीवन
कॉमरेड विलास सोनवणे का निधन पूरे देश में दलित-ओबीसी-पसमांदा आंदोलन के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है। वह उन गिने-चुने लोगों में से एक...
ब्राह्मणवाद पर अदालती प्रहार डायरी (19 अगस्त, 2021)
परिस्थितियां एक जैसी कभी नहीं रहतीं। बदलती रहती हैं। यह मनुष्य पर निर्भर करता है कि वह बदल रही परिस्थितियों के अनुरूप खुद को...
आजीवन पूंजीवादी लूट के खिलाफ थे फादर स्टेन स्वामी जिन्होंने आदिवासी हकों के लिए अपना जीवन लगा दिया
फॉदर स्टेन से सरकार की नाराजगी का एक और कारण भी था। और वह था झारखंड की जेलों में आदिवासी विचारधीन कैदियों को न्याय दिलवाने का उनका अभियान। वे झारखंड में जांच एजेन्सियों द्वारा हजारों आदिवासी नौजवानों को नक्सल बताकर उनकी अंधाधुंध गिरफ्तारियों के खिलाफ अभियान चला रहे थे। उन्होंने झारखंड उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर यह मांग की थी कि सभी विचाराधीन बंदियों को निजी मुचलके पर रिहा किया जाए और उनके खिलाफ मुकदमों में जल्द से जल्द निर्णय हों।
दशरथ माँझी का जज़्बा शाहजहां के जज़्बे से कम नहीं है
पुण्यतिथि पर याद करते हुये
आज माउंटेन मैन कहे जाने वाले दशरथ माँझी की पुण्यतिथि है। यदि मुझसे पूछा जाय कि आप उन पाँच...
दुनिया में बेनजीर अफगानिस्तान की ये पांच-छह महिलाएं डायरी (18 अगस्त, 2021)
मैं बेहद रोमांचित हूं और एक हद तक खुश भी। मुझे ये अहसास बहुत कम ही मिलते हैं। कई बार तो लंबे समय तक...
बुद्ध की ऐतिहासिक विरासत को बचाने के लिए पूरा जीवन लगा देने वाले एक इतिहासकार
उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में स्थित कुशीनगर आज दुनिया भर के बौद्ध लोगों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण स्थान है। बौद्धकाल में कुशीनगर को...
बात, जो पूंजीवाद और नवउदारवाद के विमर्श के परे भी है डायरी (17 अगस्त, 2021)
पूंजीवाद मेरे जीवन में पहली बार तब आया जब मैं पत्रकार बना ही था। पटना से प्रकाशित दैनिक आज में मुझे जो बीट दिया...
दलित साहित्य और विचारों का एक मुकम्मल दस्तावेज़
सम्पादक रामजी यादव की पत्रिका गाँव के लोग का 24 वां अंक जनवरी-फरवरी 2021 आज प्राप्त हुआ। इस पत्रिका का संपादन सुयोग्य साहित्यकार डॉ....
चुनमुन की कागज की नइया कहां गयी..
कवि-नाटककार मोहनलाल यादव स्वतःस्फूर्त और सहज रचनाकार हैं जिनकी कविताओं में न सिर्फ आम-जन का दुख-दर्द और संघर्ष के साथ ही व्यवस्था और सत्ता...
दलित-बहुजनों के साथ जातिगत भेदभाव के लिए राष्ट्रीय शर्म दिवस की घोषणा कब? डायरी (15 अगस्त, 2021)
साहित्य और साजिश! क्या यह संभव है कि साहित्य का सृजन साजिश के तहत किया जा सकता है? यह सवाल मेरी जेहन में अनायास...
ओम बिरला, वेंकयानायडू और हरिवंश की रीढ़ डायरी (13 अगस्त, 2021)
भारत में लोकतंत्र बड़ी तेजी से पतन की ओर अग्रसर है। जिस तरह से भारत में सत्तासीन नरेंद्र मोदी सरकार लोकतांत्रिम परंपराओं का अवमूल्यन...
दम-खम वाले खेलों में बहुजनों की उपेक्षा से भारत कभी पदक तालिका में ऊपर नहीं हो सकता
23 जुलाई से शुरू हुए टोक्यो ओलम्पिक - 2020 का समापन हो चुका है, जिसमें 206 देशों के 1000 से अधिक खिलाडी दर्शक-शून्य स्टेडियमों...
विमल, कंवल और उर्मिलेश (तीसरा भाग) डायरी (12 अगस्त, 2021)
संस्कृतियां आसमानी नहीं होतीं। संस्कृतियों का निर्माण किया जाता है। और फिर ऐसा भी नहीं कि संस्कृति का निर्माण कोई एक दिन में हो...
विमल, कंवल और उर्मिलेश डायरी (11 अगस्त, 2021) (दूसरा भाग)
कल का दिन एक खास वजह से महत्वपूर्ण रहा। लोकसभा में केंद्र सरकार द्वारा लाया गया अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से संबंधित 127वां संविधान...
विमल, कंवल और उर्मिलेश (पहला भाग) डायरी (10 अगस्त, 2021)
साहित्य और समाज के बीच अंतर्संबंध रहा है। दोनों को हवा-पानी-मिट्टी सब प्रभावित करते हैं। वैसे भी जिस समाज और जिस साहित्य पर हवा-पानी-मिट्टी...
‘शाश्वत सत्य’ और राज्य डायरी (9 अगस्त, 2021)
भारतीय सामाजिक व्यवस्था का केंद्रीय चरित्र पूंजीवादी है और यह कोई नयी बात नहीं है। चार वर्णों की व्यवस्था इसलिए ही बनायी गयी है।...
जयराम जय के नवगीत
मंच पर छाने लगेमंच पर छानेलगे हैं चुटकुलेकौन तोडे़गा ये पथरीले किले? हो गयींदुर्योधनी हैं कामनायेंअनवरत धृतराष्ट्रजैसी भावनायेंजिनको अपनासाथ देना चाहिये थावह चले हैं गैर...
संस्कृति और सामाजिक न्याय
प्रत्येक समाज अपनी संस्कृति से पहचाना जाता है। उसका प्रमुख कार्य समाज में एकता की अनुभूति जगाना पैदा करना है. इसके लिए जरूरी है...

