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Gaon Ke Log
यह महज अफगानिस्तान का मसला नहीं है, डायरी (1 सितंबर, 2021)
मुझे सपनों को दर्ज करने की आदत रही है। वैसे तो रात में अनेक सपने आते हैं (कभी कभी नहीं भी आते हैं)। अधिकांश...
सूर्य की पहली किरण का स्वागत करता बादलों का देश
जनवरी के महीने में गुवाहाटी से दक्षिण, मेघालय की राजधानी शिलौंग का सौ किलोमीटर का सफ़र बहुत ठंडा भी हो सकता है। गुवाहाटी में...
विकलांगों के प्रति नजरिया बदलने की जरूरत डायरी (31 अगस्त, 2021)
करीब 19 वर्ष की अवनि लेखरा ने एयर राइफल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता है। वर्ष 2015 में एक सड़क दुर्घटना में उनकी रीढ़ की हड्डी क्षतिग्रस्त हो गयी थी और वे व्हील चेयर के आसरे रहने को मजबूर हो गयीं। परंतु अवनि ने अपने सपनों को जिंदा रखा।
शब्द, सत्ता, सरोकार और राजेंद्र यादव डायरी (30 अगस्त, 2021)
शब्द और सत्ता के बीच प्रत्यक्ष संबंध होता है। यह मेरी अवधारणा है। शब्द होते भी दो तरह के हैं। एक वे शब्द जो...
जो बाजी ओहि बाची डायरी (28 अगस्त, 2021)
कोई भी बदलाव एकवचन में नहीं होता। जब कुछ बदलता है तो उसके साथ बहुत कुछ बदल जाते हैं। ऐसा कभी नहीं होता कि...
डाइवर्सिटी डे दलित आंदोलनों के इतिहास में खास दिन(27 अगस्त)
27 अगस्त : दलित आंदोलनों के इतिहास में खास दिन !स्वाधीनोत्तर भारत के दलित आंदोलनों के इतिहास में भोपाल सम्मलेन (12-13 जनवरी,2002) का एक...
राजेंद्र यादव को मैं इसलिए भंते कहता हूँ कि उन्होंने साहित्य में दलितों और स्त्रियों के लिए जगह बनाई
राजेंद्र यादव के बारे में मैं जब भी सोचता हूँ, प्रसिद्ध शायर शहरयार की ये पंक्तियाँ मेरे जेहन में उभरने लगती हैं -
उम्र भर...
गंदे नालों में होनेवाली मौतें इतिहास का हिस्सा नहीं डायरी (27 अगस्त, 2021)
देश में सरकारों का स्वरूप बदल रहा है। स्वरूप बदलने का मतलब यह कि अब इस देश में सरकारें लोककल्याण को तिलांजलि देने लगी...
बाबू जगदेव प्रसाद प्रतिमा स्थल दीनापुर चिरईगांव में जातिगत जनगणना संवाद संपन्न
अवधेश पटेल ने ब्राह्मणी, मनुवादी व्यवस्था व संस्कार को लात मार मानवता व वैज्ञानिकता की मिसाल पेश किया
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेम प्रकाश सिंह यादव...
प्रजातंत्र की रक्षा के लिए हमेशा लड़ता रहता है आंचलिक पत्रकारः विनीत
वाराणसी। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन (ग्रापए) के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ कुमार ने कहा कि पत्रकारिता के तह में जाकर खंगालें तो कहीं न कहीं ऐसे...
दलित लेखकों-विचारकों की वैचारिक दरिद्रता डायरी (26 अगस्त, 2021)
बचपन वाकई अलहदा था। अहसास ही नहीं होता था कि इंसान-इंसान के बीच कोई भेद होता है। भेद के नाम पर केवल इतना ही...
‘पाक्सो’ का ‘पास्को’ बन जाना डायरी (25 अगस्त, 2021)
भाषा की परिभाषा क्या है अथवा क्या होनी चाहिए!? यह सवाल लंबे समय से जेहन में है। हालांकि भाषा की अनेक परिभाषाएं देखने और...
जातिगत जनगणना का सवाल और बदलते संदर्भ डायरी (24 अगस्त, 2021)
मनुष्यों के बीच तुलना के लिए अनेकानेक क्राइटेरिया हैं और इनके आधार पर ही कुछ खास गुणों की पहचान होती है। मतलब यह कि...
राजनीतिक शून्यता के दौर में रामस्वरूप वर्मा की अहमियत (99वीं जयन्ती पर विशेष)
आज जब पूरे देश में राजनीतिक शून्यता की स्थिति व्याप्त है, राजनेता सत्ता प्राप्ति के लिए जाति, धर्म और साम्प्रदायिकता की भावना उभार कर...
सफ़ेद पंख : शांति की एक उड़ान
जुलाई के शेष सप्ताह में प्रायः डेढ़ साल बाद अपने गाँव गया था. सप्ताह भर बाद गाँव से लौटते समय मैने टाइम पास के...
जो भी कन्ना-खुद्दी है उसे दे दो और नाक ऊंची रखो। लइकी हर न जोती !
चौथा हिस्सा और अन्तिम हिस्सा माता-पिता के ऊँच-नीच समझाने और घर की दयनीय स्थिति का हवाला देने पर भी जब सुनरी ने अपना निर्णय नहीं...
कहाँ गए वे मोटे अनाज
पिछले कई वर्षों से देश के कुछ हिस्सों की तरह हमारे पूर्वी उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों में मानसून कमजोर ही रहा था और...
वे बोले तो बहुत किंतु, कहा कुछ नहीं
यह पहली बार हुआ है कि देश के प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस उद्बोधन को किसी गंभीर चर्चा के योग्य नहीं समझा गया। यहाँ तक...
सभ्य होने की पहली शर्त डायरी (20 अगस्त, 2021)
बात बहुत पुरानी है। शायद उस वक्त की जब मैं पहली बार दिल्ली आया था। वर्ष था 2002। इरादा दिल्ली में कमाना और पढ़ना...
सोनभद्र के उम्भा गाँव के आदिवासी पीड़ितों को किया गया सम्मानित
वाराणसी समेत आस-पास के जिलो के यातना पीड़ितों को किया गया सम्मानित
19 अगस्त, 2021 को मानवाधिकार जननिगरानी समिति/जनमित्र न्यास ने देश में चल रही...

