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मोहन भागवत साम्प्रदायिक एजेंडे की खातिर इतिहास को विकृत करने की कोशिश कर रहे हैं

सन 2018 में दिल्ली के विज्ञान भवन में अपने व्याख्यानों की श्रृंखला में आरएसएस के मुखिया मोहन भागवत ने जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया था उससे…
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तुलसी पर कोहराम तो बहाना है, मकसद मनु और गोलवलकर को बचाना है

जैसे इधर मदारी का इशारा होता है और उधर जमूरे का काम शुरू होता है, ठीक उसी तरह इधर संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने 'अपने हिन्दुओं' के युद्धरत…
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अतीत की मनमानी और खतरनाक व्याख्या

आरएसएस की 100 से अधिक अनुषांगिक संस्थाएं हैं और इस सूची में नित नए नाम जुड़ते जा रहे हैं। संघ की अनुषांगिक संस्थाओं में से जो प्रसिद्ध हैं…
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 पाकिस्तान के नाम से आरएसएस के भड़कने का निहितार्थ (डायरी 27 अक्टूबर, 2021)

सियासत की एक खासियत रही है कि इसने अपने मकसद में कभी बदलाव नहीं किया है। हालांकि सियासत ने अपने रूप जरूर बदले हैं। मेरी तो पैदाइश ही 1980 के…
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सरकार जनता से डरी हुई है इसलिए आंदोलनों को बेरहमी से कुचल देना चाहती है

बनारस में जातिगत जनगणना और किसान आन्दोलन जैसे विभिन्न मुद्दों को लेकर जाने-माने अधिवक्ता और सामाजिक चिंतक प्रेम प्रकाश सिंह यादव बहुत दिनों…
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उत्तर प्रदेश चुनाव और जम्मू कश्मीर में बढ़ता आतंकवाद (डायरी 16 अक्टूबर, 2021)

बचपन में शब्दों को लेकर तरह-तरह के सवाल होते थे। मैं कोई अजूबा बच्चा नहीं था। ये सवाल मेरे मित्रों के मन में भी आते थे। खासकर प्रेमचंद…
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आधुनिक भारत में ब्राह्मणों और राजपूतों के बीच ऐसे हो रही लड़ाई  (डायरी 14 अक्टूबर, 2021)  

भारत के शासकों ने देश के अखबारों के जैसे अपनी परिभाषा बदल ली है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे इस देश के पुलिस थाने करते हैं। मतलब यह कि सीमा…
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ये दृश्य बेहद सामान्य हैं, लेकिन हम नजरअंदाज नहीं कर सकते डायरी (15 सितंबर, 2021)

बात कल की ही है। हालांकि यह ऐसी कोई बात नहीं है जो पहले मेरी जेहन में नहीं आयी हो। लेकिन जब दो बातें एक साथ सामने हों तो हमेशा सामान्य सी…
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पत्रकारिता, संसद, न्यायपालिका और बेपरवाह हुक्मरान (डायरी, 16 अगस्त, 2021)  

प्रधानमंत्री के पद पर बैठा व्यक्ति बेहद महत्वपूर्ण होता है। उसे अपना अपना महत्व बनाए रखना चाहिए। इसके लिए उसका उदार होना, सौम्य होना और…
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