उत्तर प्रदेश चुनाव में प्रियंका गांधी की बढ़ती लोकप्रियता  के मायने 

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में, जैसे-जैसे मतदान के चरण समाप्त हो रहे हैं वैस-वैसे चरण दर चरण कांग्रेस की राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी की लोकप्रियता में इजाफा होता देखा जा रहा है। प्रियंका गांधी के रोड शो में जनसैलाब यह बताता है कि उत्तर प्रदेश में, प्रियंका गांधी के विजन से प्रदेश की जनता प्रभावित हो रही है। प्रियंका गांधी के विजन का प्रभाव, मतों में तब्दील होगा या नहीं इसका पता तो 10 मार्च को ही चलेगा जब विधानसभा के चुनाव परिणाम आएंगे, लेकिन जहां तक लोकप्रियता का सवाल है यदि उत्तर प्रदेश चुनाव में प्रमुख चार दलों के प्रमुख नेताओं की बात करें तो, भाजपा के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और बहुजन समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती से भी लोकप्रियता में प्रियंका गांधी आगे दिखाई दे  रही हैं।

यदि नेताओं की लोकप्रियता का आकलन, नेताओं के सरकारी और राजनीतिक ओहदे से आँका जाए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी’ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ’ पूर्व मुख्यमंत्री मायावती और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी से कहीं आगे दिखाई देंगे। क्योंकि इन चार नेताओं के पास उत्तर प्रदेश में अपना राजनीतिक वजूद है।  मोदी उत्तर प्रदेश से जनप्रतिनिधि  हैं जबकि बाकी तीनों राज्य की मुख्यमंत्री रह  चुके हैं।

विश्वास की बात करें तो कानपुर की वह घटना जब एक पीड़िता न्याय की गुहार लगाने प्रियंका गांधी के रोड शो में आई और प्रियंका गांधी से गले लग कर सिसक-सिसक कर रोने लगी और न्याय की मांग करने लगी जबकि उत्तर प्रदेश और केंद्र में कांग्रेस की सरकार भी नहीं है इसके बावजूद पीड़िता ने प्रियंका गांधी से न्याय दिलाने की फरियाद की। चुनाव के दरमियान और चुनाव से पहले ऐसे अनेक वाक्य उत्तर प्रदेश में देखने को मिले जब प्रियंका गांधी जनता के बीच आकर्षण का केंद्र बनी।

प्रियंका गांधी इन तीनों नेताओं से अलग हैं, ये न तो उत्तर प्रदेश से जनप्रतिनिधि  हैं और ना ही वह उत्तर प्रदेश कि मुख्यमंत्री हैं और ना ही कभी रही हैं। लगभग चार दशक से कांग्रेस उत्तर प्रदेश की सत्ता से बाहर है और चार दशक से उत्तर प्रदेश में बहुजन समाजवादी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी की सरकारी बनती आ रही है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के अंदर भाजपा समाजवादी पार्टी और बसपा के पास अपना मजबूत के डर है जबकि कांग्रेस के पास कैडर का अभाव है !

सरकारी और राजनीतिक ओहदे और कैडर के अभाव के बीच प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश के भीतर से देश में संदेश दिया है कि  जनता के बीच लोकप्रियता के मामले में वह तमाम अन्य नेताओं से कहीं आगे हैं। नेता की लोकप्रियता का आकलन जनता का नेता के प्रति आकर्षण से भी नापा जा सकता है, इसमें भी प्रियंका गांधी अन्य चारों नेताओं से आगे दिखाई दे रही हैं।

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रोड शो के दरमियान भाजपा समर्थक और कार्यकर्ताओं का प्रियंका गांधी के साथ सेल्फी खींचवाना और कांग्रेस का प्रियंका गांधी से घोषणापत्र मांगना साबित करता है कि प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश में इतनी लोकप्रिय नेता है।

विश्वास की बात करें तो कानपुर की वह घटना जब एक पीड़िता न्याय की गुहार लगाने प्रियंका गांधी के रोड शो में आई और प्रियंका गांधी से गले लग कर सिसक-सिसक कर रोने लगी और न्याय की मांग करने लगी जबकि उत्तर प्रदेश और केंद्र में कांग्रेस की सरकार भी नहीं है इसके बावजूद पीड़िता ने प्रियंका गांधी से न्याय दिलाने की फरियाद की। चुनाव के दरमियान और चुनाव से पहले ऐसे अनेक वाक्य उत्तर प्रदेश में देखने को मिले जब प्रियंका गांधी जनता के बीच आकर्षण का केंद्र बनी।

प्रियंका गांधी के प्रति उत्तर प्रदेश की जनता के बीच बढ़ता आकर्षण और प्रियंका गांधी के प्रति जनता का भरोसा चुनाव में वोटों में तब्दील होता है या नहीं इसका पता तो 10 मार्च को ही चुनाव परिणाम आने के बाद चलेगा तब तक हमें इंतजार करना होगा।

देवेंद्र यादव कोटा स्थित वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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