बहुत याद आएंगी मम्मो की बहन फय्याजी

  अपर्णा

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सुप्रसिद्ध अभिनेत्री सुरेखा सीकरी आज चल बसीं । उनकी उम्र 75 साल थी और वे लंबे समय से बीमार चल रही थीं । उनका निधन कॉर्डियक अरेस्ट की वजह से हुआ । सुरेखा सीकरी थियेटर, टीवी और फिल्मों में अपनी अनेक भूमिकाओं के लिए याद की जाती रही हैं । 1988 में बनी गोविंद निहलानी की तमस और 1995 में आई श्याम बेनेगल की फिल्म मम्मो में उनकी यादगार भूमिकाएँ जल्दी भूली न जा सकेंगी। उन्हें सपोर्टिंग एक्ट्रेस के लिए तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। 2018 में आई फिल्म बधाई हो में एक झल्ली लेकिन अत्यंत संवेदनशील सास के रूप में उन्होने बेमिसाल काम किया था। इस फिल्म में सुरेखा सीकरी अपनी अधेड़ बहू के गर्भवती हो जाने से घर में पैदा हो गई असहज स्थिति को जिस खूबसूरती से जीती हैं वह उनके ही बस का था। एक दृश्य में जब उनके पोती ब्याह करके अमेरिका जानेवाली है तब अपनी दादी से कहती है कि मैं अमेरिका से आपको फोन करूंगी। दादी झट कहती है कि रहने दे बेटा। यहाँ गाजियाबाद से तो तुमसे एक बार फोन नहीं हुआ। अमेरिका से क्या करेगी ? इस छोटे संवाद ने चालाक पोती का मुंह ही छोटा नहीं कर दिया बल्कि दर्शकों के मन में भी एक तल्ख सन्न्नाटा पसार दिया। रिश्तों के खोखलेपन को ऐसी अभिव्यक्ति कम ही मिल पाती है। टेलीविज़न पर उनका सबसे उल्लेखनीय सीरियल बालिका वधू है जिसमें उन्होंने दादी का किरदार निभाया था।

टीवी सीरियल तमस और बालिका वधु में भावपूर्ण मुद्रा में सुरेखा सीकरी

सुरेखा सीकरी का जन्म 19 अप्रैल 1945 को उत्तर प्रदेश में हुआ। उनके पिता वायुसेना में कार्यरत थे लिहाजा सीकरी का बचपन कई शहरों में बीता जिनमें अल्मोड़ा और नैनीताल प्रमुख हैं। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में कॉलेज की पढ़ाई की और राष्ट्री नाट्य विद्यालय से 1971 के बैच में स्नातक किया। उन्होंने अनेक नाटकों में काम किया। उनका सिनेमाई सफर 1978 में आई फिल्म किस्सा कुर्सी का से शुरू हुआ। फिर उन्होने पीछे मुड़कर नहीं देखा। सुरेखा सीकरी ने कुल 30 फिल्मों में काम किया । किस्सा कुर्सी का (1978),  अनादि अनंत (1986), तमस (1988), सलीम लंगड़े पर मत रो (1989), परिणति (1989), नज़र (1990), करमाती कोट (1993), लिटिल बुद्धा (1993) मम्मो (1994), नसीम (1995), सरदारी बेगम (1996), जन्मदिनम (1998 मलयालम), सरफरोश , दिल्लगी, कॉटन मेरी (1999), हरी-भरी (2000) जुबैदा (2001), देहम(2001), काली सलवार (2002), मिस्टर एंड मिसेज अय्यर (2003), रघु रोमियो (2003), रेनकोट(2004), तुमसा नहीं देखा (2004), जो बोले सो निहाल (2005) , हमको दीवाना कर गए (2006), देव डी (2009), स्निफ (2017) बधाई हो (2018), शीर कोरमा (2020) घोस्ट स्टोरीज़ (2020) ।

सुरेखा सीकरी ने टेलीविज़न पर भी लंबी पारी खेली और छोटे-बड़े उन्नीस सीरियलों में काम किया। 1986 में गोविंद निहलानी द्वारा निर्देशित तमस उनका पहला सीरियल था । इस सीरियल से सुरेखा सीकरी घर घर में जाना-पहचाना चेहरा बन गईं। बाद में इस पर फिल्म भी बनी। श्याम बेनेगल की फिल्म मम्मो में उनकी भूमिका बहुत अलग तरह की थी । पाकिस्तान से आई अपनी बहुत बोलनेवाली बहन के बरक्स सुरेखा सीकरी शांत रहने वाली बहन हैं लेकिन उनके चेहरे पर उभरने वाली दर्द की रेखाओं से उनके भीतर उठते भावनाओं और आशंकाओं के ज्वार को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता था। फरीदा जलाल के मुखर चरित्र के सामने सुरेखा सीकरी कहीं उन्नीस नहीं पड़ती मालूम हुईं।

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उन्होंने हेमंत रेगे से विवाह किया था जिनसे उनके एक बेटा राहुल सीकरी है। अभिनय के लिए उन्हें तीन राष्ट्रीय पुरस्कार मिले तथा 1989 में उनको संगीत नाटक अकादेमी एवार्ड प्राप्त हुआ। उनकी मृत्यु से सिनेमा का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया।

अपर्णा रंगकर्मी और गाँव के के लोग की कार्यकारी संपादक हैं।

 

 

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