शादी में शहनाई और चुनाव में भाषण के बगैर रंगत नहीं आती

देवेंद्र यादव

1 333

इस बार अजीब इत्तफाक है, कोरोना का प्रकोप शादी का सीजन और चुनाव का मौसम एक साथ चल रहा है। कोरोना की रंगत तो दिखाई दे रही है मगर शादी की शहनाई और चुनाव में नेताओं के भाषण सुनाई नहीं दे रहे हैं। शादी में शहनाई और चुनाव में नेताओं के भाषण का ओमिक्रोन बैरन बनता हुआ दिखाई दे रहा है। ओमिक्रोन के कारण आम जनता तो परेशान है ही साथ में दूल्हे के पिता और नेता भी टेंशन में दिखाई दे रहे हैं।

दूल्हे के पिता इसलिए भी परेशान हैं क्योंकि 25 साल तक उन्होंने विभिन्न शादियों में जो लिफाफे और गिफ्ट दिये थे शायद वह बेटे की शादी में नहीं मिलेगा क्योंकि कोरोना गाइडलाइन के कारण सीमित मेहमान ही शादी में शामिल होंगे। नेता इसलिए टेंशन में हैं क्योंकि 5 साल तक नेताओं ने जनता को सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया था। उस लाभ का प्रतिफल जनता के द्वारा शायद उन्हें इस बार नहीं मिले क्योंकि कोरोना गाइडलाइन के कारण नेता रैलियों जनसभा और रोड शो में भाषण देकर अपने द्वारा किए गए कार्यों का ठीक से बखान नहीं कर पा रहे हैं। इत्तफाक देखो दूल्हे के पिता और नेताओं के सामने लगभग एक जैसी समस्या है। शादी में घर और परिवार के लोगों ने डांस करने के लिए अपने-अपने गाने चुन लिए किस गाने पर किसको थिरकना है इसकी लिस्ट और अभ्यास कर लिया, राजनीतिक पार्टियों ने भी चुनाव में किस नेता को किस मुद्दे पर भाषण देना है इसके लिए अपने स्टार प्रचारकों की सूची बना ली लेकिन दोनों के ही मेकअप का कोरोना महामारी ने ब्रेकअप कर दिया है। शादी और चुनाव दोनों पर कोरोना महामारी की गाइडलाइन भारी पढ़ती हुई दिखाई दे रही है।

इत्तफाक देखो दूल्हे के पिता और नेताओं के सामने लगभग एक जैसी समस्या है। शादी में घर और परिवार के लोगों ने डांस करने के लिए अपने-अपने गाने चुन लिए किस गाने पर किसको थिरकना है इसकी लिस्ट और अभ्यास कर लिया, राजनीतिक पार्टियों ने भी चुनाव में किस नेता को किस मुद्दे पर भाषण देना है इसके लिए अपने स्टार प्रचारकों की सूची बना ली लेकिन दोनों के ही मेकअप का कोरोना महामारी ने ब्रेकअप कर दिया है। शादी और चुनाव दोनों पर कोरोना महामारी की गाइडलाइन भारी पढ़ती हुई दिखाई दे रही है।

जहां तक चुनावी रंगत और नेताओं के भाषण की बात करें तो देश के सबसे बड़े स्टार प्रचारक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कमी चुनाव में अभी तक स्पष्ट नजर आ रही है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों की घोषणा के बाद से अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसी भी चुनावी राज्य में ना तो अपनी जनसभा की है और ना ही वह अभी तक चुनाव वाले राज्य में गए हैं, जहां तक जनसभाओं रैलियों और रोड शो की बात करें तो चुनाव आयोग ने इन पर अनिश्चित काल के लिए प्रतिबंध लगा रखा है, उस प्रतिबंध के चलते ही शायद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव वाले राज्यों में प्रचार के लिए अभी तक नहीं पहुंचे हैं। चुनाव की घोषणा होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित विभिन्न पार्टियों के नेताओं ने चुनाव वाले राज्यों में जमकर जनसभाएं रोड शो और रैलियां की थी, मगर चुनाव में असली रंगत तो चुनाव की घोषणा होने के बाद ही देखी जाती है जब स्टार प्रचारक जनसभाओं को संबोधित करते हैं। हालांकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी गुरुवार 27 जनवरी को प्रचार के लिए पंजाब पहुंचे तो वहीं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह मथुरा पहुंचे, दोनों नेताओं के चुनावी प्रचार में पहुंचने के बाद भी वह रंगत दिखाई नहीं दी जो चुनाव के वक्त नेताओं के पहुंचने और उनके भाषण देने के समय दिखाई देती है।
राहुल गांधी और अमित शाह दोनों प्रचार के समय अपने-अपने कार्यकर्ताओं पर निर्भर थे जनता गायब थी, क्योंकि चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन करना था। कहने का मतलब ओमिक्रोन आए या कोरोना, शादी भी होगी और चुनाव भी होगा।

 

देवेंद्र यादव कोटा स्थित वरिष्ठ पत्रकार हैं। 

Leave A Reply

Your email address will not be published.