जाम से निकले, केंद्र और राज्य के विवाद में फंसे

देवेंद्र यादव

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में  चूक के मुद्दे ने, डेल्टा प्लस वेरिएंट की याद ताजा कर दी है। कोरोना महामारी की दूसरी लहर में जब देश के अंदर दवाइयों ऑक्सीजन को लेकर देश में हाहाकार मच रहा था तब नेता एक दूसरे पर आरोप और प्रत्यारोप लगाने का खेल-खेल रहे थे, राज्य केंद्र पर और केंद्र राज्यों पर जिम्मेदारी का ठीकरा फोड़ रहे थे, कोरोना की वैक्सीन को लेकर भी यही नजारा देखने को मिला जब वैक्सीन की देरी को लेकर भी राज्यों और केंद्र के बीच विवाद होता हुआ दिखाई दिया। महंगाई हो या फिर तेल की कीमतों में बढ़ोत्तरी, समाधान के नाम पर राज्य और केंद्र के बीच मसला उलझता हुआ दिखाई दिया।

5 जनवरी को पंजाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफिले में हुई चूक को लेकर जिम्मेदारी की बात आई, तो भाजापा और कांग्रेस के नेता एक दूसरे की सरकारों पर चूक की जिम्मेदारी बताने लगे। ज्ञात रहे केंद्र में भाजपा की सरकार है और पंजाब में कांग्रेस की सरकार है।

भाजपा के नेता कांग्रेस शासित राज्य पर आरोप लगाते हुए नजर आए तो वहीं कांग्रेस के नेता केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए नजर आए। मीडिया में भी पंजाब सरकार के प्रशासन और केंद्र सरकार के प्रशासन पर सवाल खड़े होते हुए सुनाई दिए। बड़ा सवाल यह है कि इतना गंभीर मामला राज्य और केंद्र के अधिकारों के बीच में उलझ कर रह जाएगा या इसका ठोस और मजबूत नतीजा जनता के सामने आएगा ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफिले में सेंधमारी करने का मसला गंभीर है, देश इसे गंभीरता से ले भी रहा है, सुप्रीम कोर्ट में इसकी सुनवाई भी हो रही है, मगर क्या इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज होती हुई दिखाई दे रही है। जहां एक तरफ भाजपा के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दीर्घायु के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हुए नजर आए तो वही कांग्रेस के नेताओं ने इस मुद्दे को दलित मुख्यमंत्री और पंजाबियत से जोड़ा। विपक्ष की नेता सोनिया गांधी ने, प्रधानमंत्री मोदी के काफिले में चूक होने के मसले को गंभीरता से लिया और चिंता कर अपने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को इसकी जांच करने के आदेश दिए तो वही भाजपा की नेता केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने सोनिया गांधी पर राजनीतिक कटाक्ष किया।

भाजपा के नेता कांग्रेस शासित राज्य पर आरोप लगाते हुए नजर आए तो वहीं कांग्रेस के नेता केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए नजर आए। मीडिया में भी पंजाब सरकार के प्रशासन और केंद्र सरकार के प्रशासन पर सवाल खड़े होते हुए सुनाई दिए।

बड़ा सवाल यह है कि इतना गंभीर मामला राज्य और केंद्र के अधिकारों के बीच में उलझ कर रह जाएगा या इसका ठोस और मजबूत नतीजा जनता के सामने आएगा?

देवेंद्र यादव कोटा स्थित वरिष्ठ पत्रकार हैं। 

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