जी-20 का संकल्प और आंखिन-देखी सच्चाई (डायरी 1 नवंबर, 2021) 

नवल किशोर कुमार

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मेरा अपना अनुमान है कि अगले पचास साल में भारत में औसत तापमान में 4-5 डिग्री का इजाफा हो जाएगा। यह मुमकिन है कि 50 डिग्री तापमान भी सामान्य माना जाएगा, ठीक वैसे ही जैसे आज 45 डिग्री तापमान हम बिना किसी शिकवे-शिकायत के झेल जाते हैं।। जब ऐसा होगा तब तक हर तीसरे घर में एक एसी होगा। अपने इन्हीं अनुमानों के आधार पर मुझे लगता है कि आगामी 2070 तक आते-आते भारत जलवायु प्रदूषक देशों की सूची में नंबर वन बन जाएगा। मेरा मन जो सोचकर सशंकित है, उसके पीछे भारत में हो रहे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई है। सेंट्रल विस्टा परियोजना के लिए 1200 से अधिक पेड़ों को काट दिया गया है। हाईवे आदि के निर्माण को लेकर पिछले दस सालों में औसतन दो लाख से अधिक पेड़ हर वर्ष काटे जा रहे हैं।

इन दिनों मैं पटना में अपने घर पर हूं। कल ही अपने बचपन के स्कूल नक्षत्र मालाकार हाई स्कूल की इमारत की तरफ गया था। वहां स्कूल तो अब नहीं है, उस इमारत में अब इमारत के मालिक के परिजन रहते हैं। लेकिन मैं यह देखकर हैरान रह गया कि पहले जहां सैंकड़ो आम के पेड़ हुआ करते थे, अब केवल मकान हैं। इस बार भी पटना पहुंचने पर घर जाने के क्रम में पैदल ही चल पड़ा। एयरपोर्ट से निकलकर जैसे ही मुख्य मार्ग से आगे बढ़ा तो पेड़ों के घनत्व में काफी कमी दिखी।

आगामी 2070 तक आते-आते भारत जलवायु प्रदूषक देशों की सूची में नंबर वन बन जाएगा। मेरा मन जो सोचकर सशंकित है, उसके पीछे भारत में हो रहे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई है। सेंट्रल विस्टा परियोजना के लिए 1200 से अधिक पेड़ों को काट दिया गया है। हाईवे आदि के निर्माण को लेकर पिछले दस सालों में औसतन दो लाख से अधिक पेड़ हर वर्ष काटे जा रहे हैं।

यहां तक कि मेरे अपने गांव ब्रह्मपुर में भी पेड़ों की संख्या घटकर 4-5 फीसदी रह गई है। मुझे स्मरण है कि एक बार मैंने अपने गांव की मुख्य सड़क के किनारे लगे पेड़ों की गणना की थी। तब मैं पटना के चितकोहरा स्थित दारोगा प्रसाद राय हाई स्कूल का छात्र था। मैंने गणना में यह पाया था कि तब कुल पेड़ों की संख्या डेढ़ सौ के उपर थी। इसमें ताड़ के 25 पेड़ भी थे। गांव की उत्तरी सीमा पर बूढ़ा पीपल था। वहीं दक्षिणी सीमा पर दो विशाल पेड़ थे। एक बरगद और दूसरा पेड़ इमली का था। मौजूदा हालात यह है कि गांव की मुख्य सड़क पर धूप से बचने के लिए अब कोई पेड़ नहीं है।

मुझे लगता है कि मैंने जो देखा है, वह एक झलक मात्र है। शायद ही पटना के किसी सड़क के किनारे पेड़ों की संख्या पहले जैसी हो।

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खैर, मेरी जेहन में इस वक्त रोम में खत्म हुए जी-20 देशों के दो दिवसीय सम्मेलन के उपरांत जारी संयुक्त प्रेसवार्ता है, जिसमें कहा गया है कि जी-20 देश जो कि वर्तमान में पूरे विश्व में कार्बन उत्सर्जन के मामले में 75 फीसदी भूमिका निभाते हैं, 2050 तक कार्बन उत्सर्जन को शून्य के स्तर पर लाएंगे। इस जी-20 समूह में हमारा अपना देश भारत भी है जो कि कार्बन उत्सर्जन के मामले में अमेरिका और चीन के बाद तीसरे नंबर पर है।

बहरहाल, मुझे जी-20 देशों के द्वारा लिए गए उपरोक्त संयुक्त संकल्प पर यकीन नहीं है और यकीन नहीं होने के पीछे जो वजहें हैं, वे आधारहीन नहीं हैं।

नवल किशोर कुमार फारवर्ड प्रेस में संपादक हैं ।

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