क्या महिलाओं को राजनीति में चालीस फीसदी भागीदारी महज़ चुनावी जुमला है

विमलेश मिश्रा , संवाददाता , गाँव के लोग डॉट कॉम

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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रियंका का  कांग्रेस द्वारा महिलाओं को राजनीति में आने का न्योता देना एवं महिलाओं के लिए 40 प्रतिशत टिकट निर्धारित करने की बात कहना इसकी एक पहलकदमी मानी जा सकती है। इससेे कांग्रेस ने महिला वोट बैंक को खींचने की पूरी कोशिश की है। हालांकि उत्तरप्रदेश की 50 प्रतिशत महिलाओं के वोट से भी पार्टी को बहुत लाभ होगा। कांग्रेस की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद किसी ने इसका समर्थन किया तो वहीं विपक्ष ने इसे चुनावी ड्रामा कहा। महिला वोट बैंक की तरफ लगभग हर पार्टी का ध्यान रहता है। कई चुनावी वादे भी होते हैं परन्तु सरकार बनने के बाद शायद वह वादा सभी पार्टी के सरकारों को याद नहीं रहता। राजनीति में 33 प्रतिशत महिला टिकट की बात तो होती रहती थी, लेकिन इस बार 40 प्रतिशत टिकट की बात की गई है।

चाहे बीजेपी हो या कांग्रेस या कोई अन्य पार्टी, अभी किसी ने भी महिलाओं को 40 प्रतिशत टिकट आवंटित नहीं किए हैं। 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो 18 प्रतिशत यानी 96 महिलाओं को टिकट दिया गया लेकिन मात्र 40 महिला विधायक चुनी गईं। इस आंकड़े से स्पष्ट है कि 33 प्रतिशत महिला सीट की बात भी यथार्थ रूप नहीं ले पाई। साथ में इस बात पर भी विचार करने की आवश्यकता है कि पार्टी में अभी कितनी महिलाओं को कौन-कौन सा विशेष पद दिया गया है? और जो भी पार्टियाँ एक-दूसरे के ऊपर आरोप प्रत्यारोप लगाती हैं, उनकी पार्टी की सरकार द्वारा महिलाओं के लिए क्या-क्या कार्य किए जा रहे हैं?

पूजा यादव

इस संदर्भ में प्रियंका गांधी को दलीय राजनीति ऊपर आकर महिलाओं का समर्थन मिल रहा है। कांग्रेस द्वारा महिलाओं के लिए 40 प्रतिशत सीट निर्धारित करने के निर्णय पर समाजवादी पार्टी की वाराणसी महिला महानगर अध्यक्ष पूजा यादव ने कहा, ‘हम लोग पूरी तरह से इस निर्णय का समर्थन करते हैं। वर्तमान सरकार में महिलाओं, युवाओं एवं अन्य लोगों के साथ भी अन्याय हुआ है, सबको मिलकर अन्याय के खिलाफ लड़ना है। कई सारे ऐसे मुद्दे हैं जिन पर कार्य करना है, रोजगार एवं महंगाई पर भी बात की जाएगी। झूठी सरकार को हराना है। हमारी पार्टी की तरफ से हम सबको जो भी जिम्मेदारी प्रदान की जाएगी, हम उसका पालन करेंगे।’

डॉ. रचना अग्रवाल

लेकिन इस पर सभी महिलाओं का समर्थन नहीं है। खासकर सत्ताधारी भाजपा से जुड़ी हुई महिला नेताओं की। जैसा कि इस मुद्दे पर भाजपा की प्रदेश कोषाध्यक्ष डॉ. रचना अग्रवाल से जब कांग्रेस द्वारा महिलाओं को 40 प्रतिशत सीट की घोषणा पर  बात की गई तो उन्होंने छूटते ही कहा, ‘यह सब चुनाव के लिए किया जा रहा है, यदि कांग्रेस को महिलाओं की इतनी चिन्ता थी ही तो अभी तक उन्होंने इस बारे में विचार क्यों नहीं किया। जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है वहां महिलाओं के लिए कुछ विशेष क्यों नहीं किया जा रहा है? जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है वहां महिलाओं को कितने टिकट दिए गए थे?’

यह सवाल उठाने के साथ ही वे अपनी पार्टी का प्रचार करने लगती हैं। कांग्रेस सिर्फ परिवारवाद को बढ़ावा देती है। जब कांग्रेस की सरकार थी तब मात्र परिवार का हित होता था। जब से राज्य में बीजेपी की सरकार आई है तब से महिलाओं के लिए बहुत कार्य किया गया है। केन्द्र सरकार द्वारा कई योजनाएं महिलाओं के हित में चलाई जा रही हैं। उज्ज्वला योजना के तहत आज महिलाओं को काफी सुविधा मिल रही है। कांग्रेस के समय में महिलाएं चूल्हे में खाना पकाती थीं, लेकिन आज महिलाएं गैस सिलेण्डर का उपयोग कर रही हैं।’

प्रीति लता

अमूमन महिला नेता लचर कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लगातार सजग हैं। कम्युनिस्ट पार्टी की प्रीति लता से कांग्रेस द्वारा महिलाओं को 40 प्रतिशत सीट की घोषणा के संदर्भ में बात की गई तो उन्होंने कहा, ‘महिलाओं को आगे लाना और महिलाओं का सम्मान करना अत्यन्त आवश्यक है। आज उत्तर प्रदेश में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं। हाथरस जैसी घटनाओं को कभी भी नहीं भुलाया जा सकता है। हाथरस के साथ न जाने कितनी जगह महिलाओं के साथ छेड़खानी एवं बलात्कार की घटनाएं होती रहती हैं। आज महिलाओं को घर से बाहर निकलने में डर लगता है। जब किसी की बेटी घर से बाहर जाती है और जब तक घर वापस नहीं आ जाती, तब तक माता-पिता को चिंता होती रहती है।’

प्रियांशु यादव

समाजवादी पार्टी की पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष प्रियांशु यादव से जब कांग्रेस द्वारा महिलाओं को 40 प्रतिशत सीट की घोषणा पर उनसे बात की गई तो उन्होंने कहा, ‘यह अच्छी बात है कि महिलाओं के हित की बात की गई, इस निर्णय से महिलाओं को सम्मान मिला है।’ जब उनसे यह पूछा गया कि कांग्रेस द्वारा रोजगार पर बात क्यों नहीं की जा रही है? तो उन्होंने कहा, ‘महिलाओें को सुरक्षित रखना एवं उनको आगे लाना अत्यन्त आवश्यक है। जब महिलाएं व बेटियां सुरक्षित रहेंगी तभी देश आगे जाएगा। साथ में युवाओं के लिए भी कार्य किया जाएगा। वर्तमान समय में महंगाई ने सबकी कमर तोड़ दी है। आज खाने की हर चीज महंगी हो गई है, पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं। भाजपा सरकार ने जो वादे किए थे, वह पूरा नहीं किया गया। सरकार ने रोजगार के बारे में बहुत कुछ बोला था लेकिन वह पूरे नहीं हुए बल्कि कई लोगों के रोजगार चले भी गए।’
प्रियांशु से जब सवाल किया गया कि क्या हर जेनुइन मुद्दे को जुमला ही बनाया जाएगा? चुनावी वादे को धरातल पर कितना उतारा जाएगा?’ इस पर उन्होंने कहा, ‘चुनाव के समय लोग बड़े-बड़े वादे करते हैं लेकिन धरातल पर कार्य देखने को नहीं मिलता। हम यही चाहेंगे कि जो भी चुनावी वादे किए जाएं उनको कार्य रूप में परिणित किया जाए। हमारी समाजवादी पार्टी ने महिलाओं के हित के लिए कई कार्य किए हैं और आगे भी हम सब मिलकर देशहित के लिए कार्य करते रहेंगे।’

40 फीसदी टिकट के बाद कांग्रेस ने महिलाओं के सवाल पर एक और कार्ड खेला। कांग्रेस ने कहा कि यदि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनती है तो लड़कियों को स्कूटी एवं स्मार्टफोन दिया जाएगा। किसी भी पार्टी के वादों के समय जनता को इस बात पर जरूर ध्यान देना चाहिए कि चुनावी वादे करने वाली पार्टी की सरकार किस राज्य में है? जिस राज्य में पार्टी की सरकार है वहां के लोगों की क्या स्थिति है? चाहे जो भी पार्टी हो लेकिन इस बात पर विचार करना चाहिए कि जहां पर पार्टी की सरकार है वहां पर चुनावी वादे पूरे हुए या नहीं।

चुनावी रिपोर्टिंग के दौरान देखने को मिलता है कि चुनाव के दौरान किए गए वादे यथार्थ रूप नहीं ले पाते हैं। आज भी हमारे देश में महिलाओं की शिक्षा का स्तर पुरुषों की अपेक्षा पीछे है। हां, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि पहले की अपेक्षा महिला शिक्षा पर काफी अच्छा प्रभाव पड़ा है लेकिन अभी भी कई जगह महिलाएं शिक्षा के मामले में पीछे हैं। कई स्थानों पर महिलाएं आस-पास कॉलेज न होने से उच्च शिक्षा से वंचित रह जाती हैं।

 

महिलाओं को राजनीति में भाग अवश्य लेना चाहिए साथ ही साथ अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अपना हक भी मांगना चाहिए। लेकिन अन्य महिलाओं को भी यह ध्यान में रखना चाहिए कि उनके मत का सही प्रयोग हो। महिलाओं को राजनीति में लाना और महिलाओं के लिए काम करना, दोनों अलग बातें हैं। वर्तमान समय में भी कई ऐसी जगह हैं जहां पर महिला विधायक या महिला सांसद होते हुए भी उस क्षेत्र की महिलाओं को उचित लाभ नहीं मिला है। चुनावी वादे के बाद हर पार्टी के नेता उस क्षेत्र पर होने वाले जमीनी स्तर के कार्याें को जायजा लेने नहीं जाते।

चुनावी रिपोर्टिंग के दौरान देखने को मिलता है कि चुनाव के दौरान किए गए वादे यथार्थ रूप नहीं ले पाते हैं। आज भी हमारे देश में महिलाओं की शिक्षा का स्तर पुरुषों की अपेक्षा पीछे है। हां, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि पहले की अपेक्षा महिला शिक्षा पर काफी अच्छा प्रभाव पड़ा है लेकिन अभी भी कई जगह महिलाएं शिक्षा के मामले में पीछे हैं। कई स्थानों पर आस-पास कॉलेज न होने से महिलाएं उच्च शिक्षा से वंचित रह जाती हैं।

जिस दिन प्रियंका गांधी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रही थीं उस दिन भी पार्टी की तरफ से 7 पुरुष एवं मात्र 3 महिलाएं  मीडिया के सामने अपनी बात रखने के लिए उपस्थित थे। पार्टी को खुद इस बात पर ध्यान रखना चाहिए कि वह जो कहने जा रहे हैं उसकी तैयारी पूर्णरूपेण हुई है या नहीं? बीजेपी शासित राज्यों में विपक्ष महिला सुरक्षा पर सवाल खड़ा करती है तो वहीं किसी अन्य पार्टी के राज्य में बीजेपी महिला सुरक्षा पर सवाल खड़ा करती है। परन्तु यथार्थ में अधिकांशतः राज्यों में महिला की सुरक्षा सुदृढ़ नहीं है। आज भी कई मामलों में बुरा कृत्य करने वालों के खिलाफ विपक्ष के लोग खुलकर सामने नहीं आते हैं।

डॉ. मुनीजा

जब समाजसेवी डॉ. मुनीजा से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा, ‘हम सब उसका स्वागत करते हैं, वर्तमान सरकार में महिलाओं को नीचा दिखाने की कोशिश की गई। लेकिन प्रियंका गांधी द्वारा यह सबके हित में निर्णय लिया गया। कई स्थानों पर आज भी महिलाओं के बारे में यह कहा जाता है कि यह तोे महिला है, यह कुछ नहीं कर पाएगी, लेकिन कांग्रेस पार्टी द्वारा लिया गया यह निर्णय वास्तव में महिलाओं को सम्मान देने वाला है।’

डॉ. मुनीजा से जब यह पूछा गया कि कांग्रेस द्वारा महिलाओं को टिकट देना कहीं कोई चुनावी रणनीति या कुछ और तो नहीं है? तो इस पर उन्होंने कहा, ‘पार्टी हमेशा महिलाओं के हक एवं सम्मान की बात करती आई है और महिलाओं के हक के लिए लड़ी भी है। महिलाओं के सम्मान को बढ़ाने के लिए यह बात कुछ ही समय पहले आई और इस पर पार्टी द्वारा तत्काल निर्णय भी ले लिया गया, यह अपने आपमें बड़ा निर्णय है। पहले प्रधानपति आदि की प्रधानता गांवों में देखने को मिलती थी और अधिकांश कार्य प्रधानपति ही करता था, लेकिन अब महिलाएं अपने पद की पूरी जिम्मेदारी निभाती हैं साथ ही गांव एवं समाज के हित में कार्य भी करती हैं।’
जब उनसे यह पूछा गया कि कांग्रेस के द्वारा महंगाई एवं रोजगार पर कुछ भी नहीं कहा जा रहा है, ऐसा क्यों? इस पर डॉ. मुनीजा ने कहा, ‘अभी महिलाओं की बात की गई है, आगे रोजगार एवं महंगाई की भी बात की जाएगी। कई सारे ऐसे मुद्दे हैं जिन पर कार्य करना है। निश्चित रूप से आगे रोजगार एवं महंगाई पर भी बात की जाएगी।’

कुसुम वर्मा

अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन की प्रदेश सचिव कुसुम वर्मा ने बात करते हुए कहा,  ‘मैं इस निर्णय का पूरी तरह समर्थन करती हूं। यह महिलाओं के हित में लिया गया निर्णय है। इस निर्णय से महिलाओं को सम्मान मिला है। वर्तमान समय में उत्तरप्रदेश में कई ऐसी घटनाएं घटित हुईं जिससे हमारी बेटियों व महिलाओं कष्ट हुआ है। कांग्रेस के इस निर्णय ने महिलाओं को सम्मान दिया है और हम सब इसका स्वागत करते हैं।’

श्वेता राय कनक

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की छात्र नेता श्वेता राय कनक से पूछने पर उन्होंने कहा, ‘चुनावी वादे तो सभी पार्टियां करती हैं लेकिन काम कितना होता है, यह बात किसी से भी छिपी नहीं है, चाहे कोई भी पार्टी हो चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं लेकिन चुनाव के बाद कार्य बहुत कम होता है। हम समाचार आदि के माध्यम देखते हैं कि महिलाओं के साथ अत्याचार अभी भी हो रहा है। जो भी महिलाओं को सम्मान देने की बात करते हैं उनके राज्य में भी ऐसी घटनाएं होेती रहती हैं।’ बेेरोजगारी पर बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘आज बेरोजगारी का आलम यह है कि अच्छी डिग्री होने के बावजूद लोग काम की तलाश में भटक रहे हैं। कोई भी सरकार हो, चुनाव के समय वादे तो खूब किए जाते हैं परन्तु चुनाव होने के बाद कोई सुध लेने नहीं आता। आज कई युवा बेरोजगार हैं, उनको काम नहीं मिल रहा है।’

महंगाई पर बात करते हुए प्रीति लता ने कहा, ‘महंगाई से आज पूरा देश परेशान है। जरूरत की हर चीजें आज महंगी हो गई हैं। सामान्य व्यक्ति के जेब को बोझ इतना बढ़ गया है कि उसका गुजारा करना मुश्किल हो गया है। आज सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। सिलेण्डर की कीमत लगभग एक हजार पहुंच गई। आज हर व्यक्ति परेशान है क्यों कि आय का साधन सीमित हैं और महंगाई दिनोंदिन बढ़ती जा रही है।

आवश्यकता इस बात की है कि पुरुष एवं महिलाओं के साथ कोई भेदभाव न हो, बराबरी के साथ दोनों को समान मौका मिले, लेकिन सभी राजनीतिक पार्टियों को यह ध्यान में रखना होगा कि चुनाव में किए गए वादों को यथार्थ रूप में उतारें, मात्र चुनावी मुद्दा बनाना और जनता को झूठे प्रलोभन देकर उनका वोट बटोरना किसी भी रूप में सही नहीं है। वर्तमान समय में रोजगार के मुद्दे पर बात करना अत्यन्त आवश्यक है परन्तु सरकार का इस ओर ध्यान ही नहीं जाता। चुनाव के समय रोजगार पर भी बड़े-बड़े बयान आते हैं पर कार्यकाल पूरा होने तक नाम मात्र के लोगों को रोजगार प्राप्त होता है।

प्रियंका गांधी के इस बयान को लेकर  राजनीतिक पार्टियों की अलग-अलग राय है। कई लोगों ने उनके इस बयान का स्वागत किया तो कई लोगों ने इसे चुनावी जुमला बताया। कॉंग्रेस के अपने निहितार्थ क्या हैं यह तो भविष्य बताएगा लेकिन महिलाओं की भागीदारी का मुद्दा एक बार फिर जेरे-बहस है।

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