Sunday, June 23, 2024
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कामुक ही नहीं हिंसक भी हो चुकी है अश्लील आर्केस्ट्रा की उत्सवी अवधारणा

यौन कुंठा में अराजक तत्व के लिए कठपुतली बन रही हैं नाचने वाली लड़कियां यह शादियों का मौसम चल रहा है। गांव-देहात में अभी भी बहुतायत शादी-विवाह गर्मियों के मौसम में होते हैं। मिर्ज़ापुर शहर के नटवा पुलिस चौकी से ठीक 200 मीटर की दूरी पर सिद्धी-वृद्धि गेस्ट हाउस में एक सवर्ण समुदाय की बारात […]

यौन कुंठा में अराजक तत्व के लिए कठपुतली बन रही हैं नाचने वाली लड़कियां

यह शादियों का मौसम चल रहा है। गांव-देहात में अभी भी बहुतायत शादी-विवाह गर्मियों के मौसम में होते हैं। मिर्ज़ापुर शहर के नटवा पुलिस चौकी से ठीक 200 मीटर की दूरी पर सिद्धी-वृद्धि गेस्ट हाउस में एक सवर्ण समुदाय की बारात आयी है। एक विशाल खुले लॉन में खाने के स्टॉल के सामने ऑर्केस्ट्रा का स्टेज सजा हुआ है। एक तरफ लोग-बाग ख़ाना खा रहे हैं और दूसरी ओर महिला कलाकार फूहड़ भोजपुरी गानों पर नाच रही हैं।

अमूमन गेस्ट हाउस संस्कृति के प्रचलन के बाद रात में बारातियों के रुकने और उनके मनोरंजन का इंतजाम करने जैसी चीजें खत्म हो गयी हैं। वर्ना तो नाच नौटंकी, बिरहा, वीसीआर आदि तमाम मनोरंजन के साधनों को बरात ले जाने का एक समृद्ध इतिहास रहा है। लेकिन मिर्ज़ापुर जैसे पिछड़े जिले में खाने में कटौती के बारे में सोचा जा सकता है लेकिन ऑर्कैस्ट्रा डांस से समझौता नहीं हो सकता। ये मनोरंजन से ज़्यादा एक स्टेटस सिंबल भी बन गया है। बिल्कुल उसी तरह जैसे डीजे और रोड-लाइट बारात में ले जाना मज़बूरी बन चुका है।

तो सिद्धि वृद्धि गेस्टहाउस के लॉन में ऑर्केस्ट्रा का कार्यक्रम शुरु हुआ। एक पुरुष कलाकार स्टेज पर एक फिल्मी गीत गाना शुरु ही करता है कि ठीक तभी एक आदमी स्टेज पर चढ़ा और उसका चेचुरा (बाँह) पकड़कर नीचे धकेलते हुए बोला तुम्हरा चीं-चीं पों-पो सुनने के लिए थोड़े ही पैसा दिये हैं। डांसर को बुलाओ। लगभग मिमियाते हुए उसने कहा बाबू साहेब लड़कियां तैयार हो रही हैं 10-15 मिनट का समय दीजिए। वो आदमी गुर्राया –“ठीक है तब तक तुम भी चुप रहो ज़्यादा चों- चों, पों-पों करके मूड़ मत खराब करो।”

“जब आर्केस्ट्रा स्टेज पर बढ़ती उत्तेजना के साथ-साथ बाराती बेकाबू होने लगते हैं। स्टेज पर कौन चढ़ेगा कौन ज़्यादा देर टिकेगा? इस बात का फैसला अमूमन हाथ में नोटो की गद्दी से तय होता है। लेकिन कई बार दबंगई के चलते लोग-बाग आपस में भिड़ जाते हैं। कई बार ‘मेरी पसंद का गाना पहले बजेगा’ इसको लेकर मार पीट और हत्या तक हो जाती है। ताजा घटना मिर्ज़ापुर से सटे प्रयागराज जिले के मेजा तहसील में घटित हुयी।”

यहां ऑर्केस्ट्रा का मतलब गीत संगीत नहीं है, सिर्फ़ नाच है, यौनकुंठा को तीव्रतर करने वाला अश्लील भाव-भंगिमा से परिपूर्ण फूहड़ डांस। डांस देखने वाले लोग पर्ची पर गाने की डिमांड लिखकर देते और बिन किसी ना-नूकूर के वो गाना बजने लगता है। लोगों ने ‘ऊपर से बत्तीस नीचे का छत्तीस बिचवे के चौबीस बुझाता कि ना’, ‘भतार संगे का का कइलू’ और ‘बाकी बीचवा जवन फटल बा ओहमे का लगावे लू’जैसे अश्लीलतम् भोजपुरी गीत की मांग की और महिला कलाकार उन गानों पर नाचने लगीं। जैसे जैसे रात का सुरूर बढ़ने लगता है वैसे वैसे गाने और अश्लील होते जाते हैं। वैसे वैसे बारातियों की हरकतें बढ़ने लगती है। वैसे वैसे लड़कियों के कपड़े और छोटे होते जाते हैं। पहले दो घंटे लहंगा चोली, फिर बॉडीकॉन ड्रेस और फिर स्किनी शॉर्ट्स में स्टेज पर नाचती नज़र आती हैं।

स्टेज पर चढ़कर ठाकुर बिरादरी का एक लड़का डांसर पर लगातार 10-10 रुपये के नोट लुटा रहा है। बीच बीच में 500 रुपये का ईनाम भी दे रहा है।बीच बीच में पीना-पिलाना भी चल रहा है। नशे का सुरुर बढ़ने के साथ ही बदतमीजियां भी बढ़ने लगती हैं। वो कभी रुपये अपनी दांत में नोट फंसाकर महिला कलाकार से मुंह से नोट लेने को कहता है। तो कभी जबरन उसकी ब्लाउज में नोट डालने की कोशिश करता है। कभी कमर पर हाथ लगाता है तो कभी और कहीं। फिर स्टेज पर और लड़के चढ़ने लगते हैं। आर्केस्ट्रा संचालित करने वाला मस्खरा आदमी हालात को सम्हालते हुए गुज़ारिश करता है कि महिला कलाकारों संग नाचने की मनाही नहीं है लेकिन स्टेज कमज़ोर है टूट जाएगा। आपको भी चोट लगेगी हमें भी। कार्यक्रम भी नहीं हो पाएगा। उसके इतना कहते ही लड़कों का झुंड अपनी पसंद की महिला कलाकार को स्टेज से नीचे उतार लेता है और कुर्सी का घेरा बनाकर उसे लॉन ग्राउंड पर नचवाते हैं। हालात को सम्हालते हुए संचालक एक दूसरी कलाकार परी को स्टेज पर बुला लेता है। परी, निशा, सुमन ऐसे ही कामुक नाम रखे होते हैं ऑर्केस्ट्रा में नाचने वाली लड़कियों के। ये उनके असल नाम नहीं होते नकली नाम होते हैं जो पहचान छुपाने के लिए रखे जाते हैं।

मिर्ज़ापुर के दशवार गांव में एक बारात आयी है। गेंहू के खेत में बारातियों का टेंट गड़ा है। वहीं जनवासे में ही ऑर्केस्ट्रा का कार्यक्रम है। गांव में चल रहे ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम का संचालक न सिर्फ़ मसखरा है बल्कि वो हद दर्जे का कमीना भी है। संचालन के दौरान वो लगातार द्विअर्थी बातें करके लोगों की वासना को भड़काता रहता है। जैसे एक डांस परफॉर्मेंस के बाद वो बाराती दर्शकों से कहता है- इस झन्नाटेदार डांस परफॉर्मेंस से चड्ढी में पानी निकला कि नहीं निकला। शहर और गांव दोनों ही जगहों पर ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम में बजने वाले एक जैसे गानों से एक बात तो साफ़ है कि यहां शहरी और ग्रामीण संस्कृति को लेकर कोई कलह नहीं है। न ही ग्रामीण संस्कृति को लेकर कोई शर्म है। लेकिन लंपटई का असली मुजायरा गांव में ही दिखता है। शुरु से आखिर तक भले ही भोजपुरी गाने बजें लेकिन कार्यक्रम का समापन टिपिकल बॉलीवुड बारिश गाने के साथ होती है। प्रियंका चोपड़ा पर पिक्चराइज अंदाज फिल्म के गाने ‘आएगा मज़ा अब तो बरसात का’ कार्यक्रम का पीक प्वाइंट होता है। जब तमाम बाराती बोतल, लोटा और बाल्टी में पानी ले लेकर स्टेज पर चढ़ जाते हैं। और इस गाने पर शॉर्ट ड्रेस में उत्तेजक डांस करती आर्केस्ट्रा कलाकार को पानी से सराबोर कर देते हैं। इस दौरान अपने अपने तरह से ये लोग उस कलाकार को छूते, दबाते भी हैं।

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मिर्ज़ापुर की लोक संस्कृति को नज़दीक से जानने वाले नरेंद्र तिवारी बताते हैं कि नाचने वाली महिला कलाकार अक्सर एल्कोहल का सेवन करके ही स्टेज पर आती हैं। वर्ना इतना कुछ स्टेज पर झेलना एक सामान्य मस्तिष्क और देह के लिए मुमकिन नहीं होगा। वो आगे बताते हैं कि मिर्ज़ापुर की दलित और मुस्लिम समुदाय की बहुत सी लड़कियां ऑर्केस्ट्रा डांस करती हैं। रंडी-नाच का जिक्र करते हुए वो बताते हैं कि मिर्जापुर का रंडी-नाच पूरे उत्तर प्रदेश में मशहूर रहा है। अब चूंकि वो कला खत्म हो गयी है तो वो लड़कियां ऑर्केस्ट्रा डांस की ओर चली गयीं। ऑर्केस्ट्रा डांस में बढ़ती स्ट्रिपिंग पर चिन्ता जताते हुए नरेंद्र जी आगे कहते हैं कि सोशल मीडिया पर ऑर्केस्ट्रा प्रोग्राम के ऐसे हजारों वीडियोज हैं जहां डांसर स्ट्रिपिंग करती हुयी देखी जा सकती है। वो कहते हैं कि कोई तआज्जुब नहीं अगर आने वाले चंद सालों में भारत के गांवों में पब्लिक स्टेज से ऑर्केस्ट्रा डांस के बजाय स्ट्रिप डांस का चलन चल निकले।

गौरा निवासी अखिलेश दूबे बताते हैं कि शादी विवाह के सीजन में जब मांग ज़्यादा रहती है तब 15 हजार से 20 हजार रुपये में एक ऑर्केस्ट्रा शो बड़े आराम से उपलब्ध होता है। बिना सीजन के यह कम दाम में भी मिल जाता है। वो बताते हैं कि मनकटी, जिगना मांडा, गौरा जैसे एक-एक गांव में दर्जनों ऑर्केस्ट्रा कंपनियां चलती हैं। “क्या लोकल लड़कियां नाचती हैं आर्केस्ट्रा में?” पूछने पर वो बताते हैं कि सीजन के समय ऑर्केस्ट्रा में नाचने वाली अधिकांश लड़कियां छत्तीसगढ़ से बुलवायी जाती हैं। इन्हें एक कार्यक्रम का 1000- 2000 रुपये दिया जाता है। अमूमन एक कार्यक्रम में नाचने के लिए तीन से चार लड़कियां होती हैं। एक संचालक और कुछ सर-सामान ले जाने, उन्हें सम्हालने सेट करने वाले लोग होते हैं। यानी एक छोटी आर्केस्ट्रा टीम में कम से कम छः लोग होते हैं।

फरमायशी अश्लील गानों पर डांस को लेकर मारपीट और हत्या

ऑर्केस्ट्रा डांस का चलन शैक्षणिक, आर्थिक रूप से पिछड़े और बेरोज़गार समाज में ज़्यादा प्रचलित है। बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश के मिंर्जापुर, प्रतापगढ़, जौनपुर, देवरिया, उन्नाव आदि जिलों में बहुत बढ़ा है। शादी विवाह के अलावा, धार्मिक आयोजन और जन्मदिन आदि की पार्टी में भी ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम ख़ूब आयोजित हो रहे हैं।

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‘आवास योजना’ के रहते कच्चे घरों में रहने को हैं मजबूर

जब आर्केस्ट्रा स्टेज पर बढ़ती उत्तेजना के साथ-साथ बाराती बेकाबू होने लगते हैं। स्टेज पर कौन चढ़ेगा कौन ज़्यादा देर टिकेगा? इस बात का फैसला अमूमन हाथ में नोटो की गद्दी से तय होता है। लेकिन कई बार दबंगई के चलते लोग-बाग आपस में भिड़ जाते हैं। कई बार ‘मेरी पसंद का गाना पहले बजेगा’ इसको लेकर मार पीट और हत्या तक हो जाती है। ताजा घटना मिर्ज़ापुर से सटे प्रयागराज जिले के मेजा तहसील में घटित हुयी।

मेजा तहसील के मनु का पूरा अमिलिया कला निवासी जयकुमार होमगार्ड हैं और मेजा थाने में तैनात हैं। 20 मई शनिवार को उनके बेटे कुलदीप की बारात मेजा तहसील के रामचंद्र का पूरा पंजइला गांव में राजेंद्र भारतीया के यहाँ गयी। द्वारचार के बाद खाना-पीना हुआ और विवाह की रस्में होने लगी। दूसरी ओर बारातियों के मनोरंजन के लिए ऑर्केस्ट्रा का भी इंतेजाम था। शराब के नशे में धुत घराती और बाराती ऑर्केस्ट्रा स्टेज को घेरकर बैठ गये। ऑर्केस्ट्रा डांस के दौरान पसंद के गाने या स्टेज पर चढ़ने को लेकर घराती और बाराती में विवाद हो गया। घराती की ओर से लाठी डंडे निकल आये। देखते ही देखते ये विवाद खूनी खेल में बदल गया। बचाव करने गये अमिलिया कला निवासी पंचम भारतीया की सिर पर एक लाठी पड़ी और वो लहूलुहान होकर ज़मीन पर गिर पड़े। उसका सिर फट गया। लोग तुरंत एक प्राइवेट अस्पताल ले गये जहाँ उपचार के दौरान पंचम भारतीया की मौत हो गयी। वो मज़दूरी करके अपना परिवार का गुज़र बसर करते थे। पंचम लाल के अलावा बाराती पक्ष से धर्मेंद्र (30 साल) और दूल्हे के चाचा सुभाष (45 साल) और अमृत लाल (50) साल भी गंभीर रूप से चोटिल हुए।

प्रतापगढ़ जिले में भी ऑर्केस्ट्रा कल्चर खूब पल बढ़ रहा है। एक सप्ताह पहले यानि 18 मई 2023 को जिले के संग्रामपुर थानाक्षेत्र के गांव धरम्मन का पुरवा टोला मोहम्मदपुर निवासी रामदेव के यहाँ धार्मिक भंडारा था। इसी गांव का निवासी रंजीत कुमार यादव एक ऑर्केस्ट्रा ग्रुप चलाता है। भंडारे के कार्यक्रम में उसी के आर्केस्ट्रा ग्रुप का कार्यक्रम रखा गया था। रात साढ़े दस बजे जैसे ही स्टेज पर डांसर नाचने के लिए आयीं मंच पर अनेक युवक चढ़कर लड़कियों से अभद्रता करने लगे। विरोध करने पर गालियां देते हुए मारपीट शुरु कर दिये। जिसमें कई लोग घायल हुए। सूचना पाकर मौके पर पुलिस भी पहुँच गयी। बाद में ऑर्केस्ट्रा मालिक रंजीत यादव ने गांव के कई लड़कों के ख़िलाफ़ नामज़द मुक़दमा दर्ज़ करवाया।

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बिहार: ‘जीविका’ से गरीब महिलाओं को मिल रही आजीविका

20 मई शनिवार 2023 को देवरिया जिले के सलेमपुर कोतवाली क्षेत्र के डुमवलिया गांव में शिवदल प्रसाद की बेटी का बारात भटनी थानाक्षेत्र के जिगना मिश्र गांव से आयी थी। द्वारपूजा के बाद बारातस्थल पर आर्केस्ट्रा का कार्यक्रम चल रहा था। मनपंसद गाने पर डांस करवाने को लेकर घराती और बाराती में मारपीट हो गया। जिसमें बाराती पक्ष के अनिल प्रसाद (35), कृष्ण कुमार (25), रामप्यारे प्रसाद (40), संतोष (45), पवन कुमार (20), जितेन्द्र प्रसाद (41) और घराती पक्ष से ग्राम प्रधान ध्रुव कुमार (34) घायल हो गये।

पिछले साल 4 जून 2022 को जौनपुर जिले के सिकरारा थाना क्षेत्र बभनौली डिहवा गाँव में ऑर्केस्ट्रा का कार्यक्रम चल रहा था। अवसर था अवकाशप्राप्त होमगार्ड इंद्रजीत बिन्द की पौत्री की शादी की सालगिरह का। आधी रात क़रीब 3 बज़े गांव के ही दबंग युवक ऑर्केस्ट्रा संचालक से अश्लील गाने पर डांस करवाने की फरमाइश करने लगे। चूंकि कार्यक्रम घर पर हो रहा था और उसे घर की बहन बेटियां भी देख रही थीं अतः कार्यक्रम के आयोजक इंद्रजीत बिंद ने मामले को बिगड़ने से बचाने के लिए ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम को ही बंद करवा दिया। जिसके चलते दबंगों ने लाठी डंडा और तलवार लेकर इंद्रजीत के घर में घुसकर परिजनों और रिश्तेदारों पर जानलेवा हमला किया। हमले में इंद्रजीत बिंद (63) उनकी पत्नी कलावती (58), दामाद संतोष बिंद (35), राहुल बिंद (30), अजीत बिंद (18), शैलेंद्र बिंद (25) गंभीर रूप से घायल हो गये। जिला अस्पताल में सबको इलाज के लिए ले जाया गया जहाँ इलाज के दौरान इंद्रजीत बिंद की मौत हो गयी।

ऑर्केस्ट्रा डांसरों पर बढ़ती यौनहिंसा

ऑर्केस्ट्रा के बढ़ते चलन के साथ ही ऑर्केस्ट्रा में नाचने वाली लड़कियों का शोषण और अपराध भी बढ़ रहा है।15 फरवरी 2023 बुधवार को उन्नाव जिले के जाजमऊ चौकी क्षेत्र के दीपक नगर इलाके में एक युवक के जन्मदिन पार्टी में ऑर्केस्ट्रा का कार्यक्रम था। कार्यक्रम में स्टेज पर तीन लड़कियां नाच रही थी। इसी बीच पार्टी कर रहे युवकों ने एक डांसर को स्टेज से नीचे खींचकर शराब पिलाया। जैसे ही लड़की पर नशा चढ़ा वो लोग उसे अंधेरे में ले गये और गैंगरेप किया। पीड़िता ने अगले दिन कोतवाली पहुँचकर तहरीर दी।

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इसी तरह 9-10 मई 2023 की दर्म्यानी रात पश्चिमी चंपारण जिले के पूजहा थाना के बगही उवाच टोला से बारात साठी थाना क्षेत्र के धमौरा गांव आयी थी। मनुआपूल थाना क्षेत्र के हीरापाकड़ गांव में संचालित न्यू नेहा म्युजिकल ऑर्केस्ट्रा ग्रुप को बारात के मनोरंजन के लिए बुलाया गया था। कार्यक्रम की समाप्ति के बाद जब आधी रात ऑर्केस्ट्रा ग्रुप वापिस जा रहा था रास्ते में गांधी चौक के पास आधा दर्जन लड़कों ने ऑर्केस्ट्रा की गाड़ी घेर लिया, सबको मारा पीटा और एक डांसर को उठाकर सूनसान जगह ले गये। और उसके साथ गैंगरेप किया। ऑर्केस्ट्रा कंपनी ने पुलिस को सूचित किया। सुबह पीड़ित लड़की ने खुद ही थाने पहुंचकर केस दर्ज़ करवाया। पीड़िता पश्चिम बंगाल की है।

19 फरवरी 2023 को एक ऑर्केस्ट्रा डांसर कृष्णा उर्फ निशा का शव उसके दुपट्टे में लटका हुआ बरामद किया गया था। वो बर्धमान, पश्चिम बंगाल की रहने वाली थी और पश्चिमी चंपारण के न्यु मुस्कान म्युजिकल ऑर्केस्ट्र ग्रुप में काम करती थी।

उत्सव की अश्लील होती यह अवधारणा अब कुंठित यौन मानसिकता की प्यास बुझाने के लिए किसी भी स्तर तक गिरने को तैयार है। इस उत्सवी रंग में गैंग रेप और दबंगई से लहूलुहान हादसे बढ़ते ही जा रहे हैं। वंचित समाज कि इन नाचने वाली लड़कियों की आर्थिक मजबूरी तक ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का कोई विज्ञापन उम्मीद की रोशनी नहीं बिखेर सका है। बेबस और मजबूर यह लड़कियां कब तक कुंठित समाज की कठपुतली बनी रहेंगी इसका कोई उत्तर नहीं दिख रहा है।

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