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#supremecourt

मत पढ़िए, अगर आप संवेदनशील नहीं हैं (डायरी 11 अगस्त, 2022)

यह केवल भारत का मसला नहीं है। पूरी दुनिया में दो ही तरह के लोग हैं। एक वे हैं जिनके पास जीने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं और दूसरे वे, जिनके…
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सुप्रीम कोर्ट के अबतक के सबसे दयालु और ईमानदार मुख्य न्यायाधीश के नाम (डायरी, 31 जुलाई, 2022)

 उर्दू बड़ी प्यारी भाषा है और इसके शब्द एकदम से शानदार। हालांकि उर्दू के संबंध में मेरी समझ पहले ऐसी नहीं थी। मुझे तो खड़ी हिंदी…
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जस्टिस चंद्रचूड़, कृपया अपने इस वाक्य पर गौर करें (डायरी 21 जुलाई, 2022)

आखिरकार मोहम्मद जुबैर को कल राहत मिली। ‘आल्ट न्यूज’ के संस्थापक व संपादक मोहम्मद जुबैर को कल सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दी और उन्हें केवल…
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गुजरात दंगे के मामले को अब इस दृष्टिकोण से भी देखें (डायरी, 14 जुलाई, 2022) 

पत्रकारिता और साहित्य दो अलग-अलग चीजें हैं। हालांकि दोनों में समानताएं भी हैं। कई बार पत्रकारिता और साहित्य दोनों एक साथ शामिल भी किये जाते…
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राजनीतिक और सांस्कृतिक ‘सुट्टा’  (डायरी 6 जुलाई, 2022)

 सौंदर्य का मापदंड भी सापेक्ष ही होता है। निरपेक्ष नहीं होता। यह संभव ही नहीं है। रंगभेद के आधार पर भेदभाव की बुनियाद यही है। वैसे तो यह…
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सत्ताधारी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के प्रोत्साहन और आशीर्वाद के बिना किसी के लिए सीमा पार करना संभव…

सुप्रीम कोर्ट ने नूपुर शर्मा की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में अपने  खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर को एक…
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न्याय और अन्याय इस गणितीय प्रमेय से समझिए (डायरी, 2 जुलाई, 2022) 

न्याय के अनेक रूप होते हैं। यह इस वजह से भी कि जिनके उपर इसकी जिम्मेदारी होती है, उनकी प्रतिबद्धताएं अलग-अलग होती हैं। इसे चाहें तो…
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सुप्रीम कोर्ट बताए जले घर की परिभाषा (डायरी, 28 जून, 2022)

आज फिर यह सवाल मेरी जेहन में है कि आखिर क्या कारण है कि अगस्त, 2012 के बाद से लेकर आजतक बाथे, बथानी टोला आदि नरसंहारों के मामले में सुप्रीम…
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ताकि जकिया जाफरी को मिले ‘न्याय’ (डायरी, 25 जून, 2022)

तानाशाह... तानाशाह ही होता है। हालांकि उसके भी दो हाथ, दो पैर, दो आंखें और बाकी सब अंग भी अन्य इंसानों के जैसे ही होते हैं। लेकिन तानाशाह…
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क्या इस देश का ओबीसी कृपा का पात्र है?, डायरी (19 मई, 2022) 

देश में अन्य पिछड़ा वर्ग के लोग कितने हैं, इसका सटीक आंकड़ा भारत सरकार के पास नहीं है। वजह यह है कि वर्ष 1931 के बाद भारत में जातिगत…
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