Wednesday, March 4, 2026
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यह तय करने की जरूरत है कि देश में गांधी का विचार रहेगा या गोडसे का- संदीप पाण्डेय

वाराणसी। सरकार द्वारा सर्व सेवा संघ के वाराणसी परिसर पर अवैध कब्जे के खिलाफ, भारत छोड़ो आंदोलन दिवस के अवसर पर सर्व सेवा संघ...

प्रेमचंद को याद करते हुए सर्व सेवा संघ ने अन्याय के खिलाफ बांटा पर्चा

वाराणसी। कथा सम्राट प्रेमचंद के गांव लमही में अनेक सरकारी और गैर सरकारी व्यक्ति, संस्थाएं जुटी हुई थीं। कहीं नाटक का मंचन हो रहा...

अब काशी-मथुरा की तैयारी है!

काशी में अयोध्या प्रकरण के बाकायदा दुहराए जाने की तैयारियां शुरू हो गयी लगती हैं। शहर की एक अदालत के आदेश पर भारतीय पुरातत्व...

इतिहास बताता है कि सर्व सेवा संघ की जड़ों में बहुत पहले ही दीमक लग चुकी थी

तीस जनवरी, 1933 के दिन हिटलर ने जर्मनी के चांसलर पद की शपथ ली थी। (30 जनवरी के दिन ही गाँधीजी की गोली मारकर...

सर्व सेवा संघ को बचाने की मुहिम में प्रतिवाद सभा, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने की शिरकत

वाराणसी। करीब दो महीने से सर्व सेवा संघ को बचाने वास्ते संघर्षरत सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों का जुटान आज वरुणा तट स्थित शास्त्री घाट...

प्रधानमंत्री के लोकसभा क्षेत्र में रेलवे कर्मचारियों ने एनपीएस व निजीकरण के विरोध में निकाला मशाल जुलूस

उड़ीसा के बालासोर में हुए रेल दुर्घटना का मुख्य कारण रेलवे का अंधाधुंध तरीके से हो रहा निजीकरण और रेलवे में कुशल और प्रशिक्षित रेलवे कर्मचारियों की कमी है। वर्तमान केंद्र सरकार अमीरों का लाभ और गरीबों का विनाश करते हुए पैंसेंजर ट्रेन का किराया एक्सप्रेस के बराबर कर दी है, वही वंदे भारत समेत सभी ट्रेनों के एसी चेयर कार और एग्जीक्यूटिव श्रेणी के किराए में 25% तक कटौती कर रही है।

आलोचना से लेकर मजाक तक निज़ाम बेदम, बस एक टमाटर ने तोड़ दिया मजबूत सरकार का भ्रम

गौरतलब है कि 29 मार्च 2022 को हाईस्कूल की संस्कृत की परीक्षा थी। 28 मार्च की रात को ही बलिया में प्रश्नपत्र व मिलती-जुलती हल की हुई कॉपी वायरल हो गई। 29 मार्च की सुबह छह बजे पत्रकार अजीत ओझा ने इसे तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक को भेजकर जांच करने की बात कही। चार घंटे तक कोई जवाब नहीं आया। दस बजे डीएम इंद्रविक्रम सिंह ने फोन कर प्रश्नपत्र अपने व्हाट्सएप पर मांगा। पत्रकार ने वायरल पर्चा उन्हें भी भेज दिया। फिर भी वायरल प्रश्नपत्र से मिलते-जुलते पेपर से ही परीक्षा करवा ली गई।

दस बरस पहले बनी थी वाराणसी के कादीपुर की सड़क, अब पैदल चलना भी दूभर

वाराणसी के शिवपुर का हाल, गली में इधर-उधर फेंका जाता है कूड़ा, महज चित्रकारी तक सीमित रह गया स्वछता अभियान वाराणसी। शिवपुर में सफाईकर्मी मनमाने...

सड़क पर हुए जलभराव में की गई धान की रोपाई, भाजपा के विकास मॉडल को बताया झूठा

भगवानपुर-छित्तूपुर मुख्य मार्ग की दुर्दशा, इस रास्ते ट्रॉमा सेंटर पहुँचने में हो जाती है देर स्मार्ट सिटी के तमगे से विभूषित बनारस शहर और गाँव...

अमृत योजना का हाल- पाँच बरस में गरीबों को एक बूँद भी नहीं मिला पानी, बिल भेज दिया छह हजार

प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र महमूरगंज स्थित मलिन बस्ती के लोग काट रहे अधिकारियों और नेताओं के चक्कर आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला  वाराणसी। महमूरगंज स्थित...

प्रधानमंत्री को सम्बोधित पत्रक गंगा में किया प्रवाहित, गांधी की विरासत बचाने के लिए संघर्ष को तैयार हैं गांधी के लोग

जब गांधी की विचारधारा खत्म होगी, तभी गोडसे की विचारधारा स्थापित होगी। सर्व सेवा संघ सिर्फ एक जमीन नहीं है। यह विचारों का प्रतीक है। अगर आज वे इस जमीन पर कब्जा कर लेंगे, तो भविष्य में वे किसी भी संस्थान पर कब्जा कर लेंगे। उन्होंने देखा कि यह हांडी में चावल का एक दाना है, जिसे वे दबाना चाहते हैं।

आज़ादी के अमृत महोत्सव के दौर में महिलाओं पर हिंसा और उनके हक़ की आवाज

देश में आजादी का 75वां अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है, लेकिन आज भी महिलाओं की घरेलू, सामाजिक, आर्थिक स्थितियों में कोई खास सुधार...

संकट में सर्व सेवा संघ, क्या गांधी के लोग बचा पायेंगे गांधी की जमीन

एक सिपाही के पास ऐसे राष्ट्रीय स्तर के प्रकरण पर बोलने की इजाजत नहीं होती है। पुलिस व्यवस्था में सिपाही के पदक्रम को देखते हुये कहा जाय तो उसकी हैसियत नहीं होती है। जिस प्रकरण में प्रत्यक्ष रूप से जिला प्रशासन के आलाधिकारी सरकारी मंशा को अमलीजामा पहनाने में लगे हुये हों, वहां एक सिपाही ‘वर्कआउट’ का प्रसाद नहीं ले सकता। यह हो सकता है कि सिपाही द्वारा कही गई बातें सर्व सेवा संघ से जुड़े लोगों के लिए एक इशारा हो कि सर्व सेवा संघ सहित पूरे परिसर को लेकर सरकार और जिला प्रशासन का इरादा क्या है?

सर्व सेवा संघ कैंपस को बचाने के लिए इकट्ठा हुए गांधी के लोग, कोर्ट में 3 जुलाई को होगी सुनवाई

प्रशासन ने राजघाट स्थित सर्व सेवा संघ साधना केंद्र को 30 जून को गिराने के लिए नोटिस दिया था। 27 सितंबर को डीएम के आदेश के 1 घंटे बाद ही यह नोटिस सर्व सेवा संघ के प्रांगण में सभी भवनों पर रेलवे विभाग द्वारा चस्पा कर दिया गया था। इसके विरोध में सर्व सेवा संघ ने 28 तारीख को इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश ने यह कहा कि 30 जून को इस मामले की सुनवाई की जायेगी

महंगाई की मार से त्रस्त हुआ आम आदमी, टमाटर खाने की जगह देखने की चीज बना

वाराणसी। पांडेयपुर निवासी सुरेश तकरीबन एक सप्ताह से दाल-चावल खा रहे हैं। खाने में सब्जी अब उन्हें मयस्सर नहीं है। टमाटर के साथ अन्य...

मेहनत करते-करते हाथ की रेखाएं घिस गईं लेकिन हालात में कोई परिवर्तन नहीं हुआ

चौतरफा दमन और दबाव झेलने को विवश है थाना रामपुर का मुसहर समाज  वाराणसी। वह गर्मी से चिलचिलाती दोपहर के बाद की एक आँच फेंकती...

इलाज के दौरान युवक की मौत, पुलिस पर लीपापोती का आरोप

बलिया। दबंगों की पिटाई से घायल सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के लखनापार निवासी देवनारायण राजभर उर्फ़ देवा (17) की शुक्रवार शाम वाराणसी में इलाज के...

हक़ की हर आवाज़ पर पहरेदारी है और विकास के नाम पर विस्थापन जारी है

[भव्यता के ख्वाब तले कुचले जा रहे स्वपन अब एक बड़े वर्ग की आँखों में चुभने लगे हैं। लोग दर्द में हैं और हक़ की आवाज पर सरकार की पहरेदारी है। धमकियाँ हैं। बावजूद इसके लोग अब भी लड़ रहे हैं। जब तक लोग लड़ रहे हैं तब तक उम्मीद जिंदा है। इस जिंदा उम्मीद के लिए न्याय की नियति क्या होगी, भविष्य क्या होगा, इस पर अभी तो प्रश्नवाचक का पेंडुलम वैसे ही झूल जा रहा है, जैसे समय के साथ चलने वाली घड़ी के बंद हो जाने पर उसका पेंडुलम खामोशी से झूलता रहता है और इंतजार करता रहता है कि कभी तो कोई उसकी चाभी भरकर उसे चला देगा।

बेराह बनारस में बवाल उर्फ मोदी सरकार के नौ साल

समर्थकों के विशेष वर्ग को उन आलोचनाओं को सुन अपना पारा नहीं चढ़ाना चाहिए, जिन आलोचनाओं में भारत सरकार, केंद्र सरकार या एनडीए सरकार का संबोधन प्रयोग किया जाता है। ये तीनों अब कहीं हैं ही नहीं। यहां तक कि अब तो विदेश भी मोदी सरकार ही जाती है, भारत सरकार नहीं। जब भारत सरकार की जगह एक व्यक्ति विदेशी दौरों पर जाएगा, तो वो देश के कार्य से अधिक तवज्जो व्यक्तिगत कार्य को देगा।

सरकारी अतिक्रमण और बर्बरता की कहानी कहता बैरवन

अपनी ही ज़मीन पर अपराधी बना दिये जाने वाले गाँववासियों के रक्तरंजित होने की इस कहानी की शुरुआत तो काफी पहले से हो गई थी लेकिन उसे अंजाम अब दिया गया है। यह ध्यान देने की बात है कि पूर्वांचल में जहाँ-जहाँ सरकारी योजनाओं के लिए ज़मीन ली जा रही है वहाँ यह कार्य ग्रामीणों की आम सहमति की बजाय ज़ोर-ज़बरदस्ती से किया जा रहा है। हर जगह किसान इसी बात का विरोध कर रहा है और हर जगह प्रशासन इसी तरह धूर्तता और बर्बरता से ज़मीन हड़प लेना चाहता है।

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