अमित शाह और नरेंद्र मोदी के रिश्ते तथा मलिक का बयान(डायरी, 4 जनवरी 2022)

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इन दो-तीन दिनों में जिंदगी ने नया अनुभव दिया है। अनुभव सकारात्मक नहीं हैं। लेकिन अब अनुभव हैं तो हैं। आदमी हमेशा सुख की अनुभूति तो नहीं कर सकता। इस अनुभवों को संतुलित करने के लिए मैंने कुछ किताबों का अध्ययन शुरू किया है। ये किताबें बहुत गंभीर किताबें नहीं हैं। एकदम हल्की-फुल्की किताबें। इधर दो दिनों में चार फिल्में भी देख चुका हूं। कोशिश बस इतनी है कि व्यक्तिगत परेशानियों से उबरा जाय।  इस बीच कल राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के एक ट्वीट ने चौंका दिया। ट्वीट में एक वीडियो था, जिसमें मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक कुछ खास खुलासा कर रहे थे। हालांकि इस वीडियों में वह जो बता रहे हैं, उसके केंद्र में दो लोग हैं। एक तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दूसरे अमित शाह।
तो आज मैं अमित शाह के बारे में सोच रहा हूं। उनके नाम से एक विशेष वेबसाइट भी है– अमितशाह डॉट कॉम। इस वेबसाइट के अलावा भारत सरकार के गृह मंत्रालय और लोकसभा के वेब पोर्टल से भी उनके बारे में आधिकारिक जानकारियां हासिल की जा सकती हैं। मैं तो उनके अपने वेब पोर्टल को देख रहा हूं। यह एक अत्याधुनिक वेब पोर्टल है। इसमें अमित शाह से जुड़ी हर तरह की सूचनाएं हैं। इसे ऐसे डिजाइन किया गया है ताकि उन्हें एक मुकम्मल राजनेता के रूप में प्रस्तुत किया जा सके। सबसे मजेदार बात यह है कि इस वेब पोर्टल पर जो तस्वीरें प्रदर्शित हैं, उनमें केवल एक तस्वीर में ही नरेंद्र मोदी के साथ वे नजर आते हैं। और यह तस्वीर भी पोर्टल के मुख्य पृष्ठ पर नहीं है।

सत्यपाल मलिक ने भी तो ऊपर उद्धरित वीडियो में साफ कहा है कि 'जब वे किसानों के सवालों को लेकर प्रधानमंत्री से मिले तब पांच मिनट में ही प्रधानमंत्री से उनका झगड़ा हो गया। मलिक ने कहा कि वह यानी पीएम बहुत घमंडी है। उसने (पीएम ने) अमित शाह से मिलने की बात कही। अमित शाह ने कहा कि उसका (प्रधानमंत्री) की अक्ल लोगों ने मार रखी है।'

यह एक वाजिब सवाल हो सकता है कि नरेंद्र मोदी के साथ की तस्वीरें अमित शाह ने अपने वेब पोर्टल पर क्यों साझा नहीं की? तो इसका एक संभावित जवाब यह कि यह वेब पोर्टल अमित शाह का है, इसे अमित शाह की छवि गढ़ने के लिए डिजाइन किया गया है, तो नरेंद्र मोदी की क्या उपयोगिता है।
सत्यपाल मलिक ने भी तो ऊपर उद्धरित वीडियो में साफ कहा है कि ‘जब वे किसानों के सवालों को लेकर प्रधानमंत्री से मिले तब पांच मिनट में ही प्रधानमंत्री से उनका झगड़ा हो गया। मलिक ने कहा कि वह यानी पीएम बहुत घमंडी है। उसने (पीएम ने) अमित शाह से मिलने की बात कही। अमित शाह ने कहा कि उसका (प्रधानमंत्री) की अक्ल लोगों ने मार रखी है।’
अमित शाह और नरेंद्र मोदी के बीच जो रिश्ता है, वह अमित शाह के वेब पोर्टल पर साफ-साफ देखा जा सकता है। इस वेब पोर्टल पर हरसंभव कोशिश की गयी है कि अमित शाह की स्वतंत्र छवि लोगों के सामने प्रस्तुत की जाय। और यदि मलिक की बात पर यकीन करें (नहीं करने की कोई खास वजह नहीं दिखती) तो एक बात तो साफ है कि दिल्ली के राज गलियारे में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।

मैं तो मलिक की बात कहता हूं जिसमें वे अमित शाह के हवाले से कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री की अक्ल लोगों ने मार रखी है। ये कौन लोग हैं जिन्होंने प्रधानमंत्री की बुद्धि को अपने वश में कर रखा है? यह सवाल तो उठना ही चाहिए। वैसे इसमें कोई बुराई नहीं है कि कोई आदमी कोई भी फैसला लेने के पहले अपने विश्वास के लोगों से बातचीत करे। उनसे सलाह ले। खासकर तब जबकि वह देश का राजा हो, उसे सलाहकारों की आवश्यकता होती ही है। और यह बात केवल आज के पीएम पर लागू नहीं होती। लगभग सभी ऐसा ही करते रहे हैं। लेकिन नरेंद्र मोदी के विशेष सलाहकारों में अमित शाह नहीं हैं, और यह भी कि अमित शाह के व्यक्तिगत वेबपोर्टल पर नरेंद्र मोदी की तस्वीर (अपवाद के रूप में केवल एक) नदारद है तो सवाल बनता है।
दरअसल, भाजपा इन दिनों गहरे संकट में है। एक तरफ तो उसकी लगाम आरएसएस ने कसना शुरू कर दिया है। हालत यह हो गई है कि सत्यपाल मलिक जैसे नेता भी पीएम को तू-तड़ाक की भाषा में संबोधित करते हैं। यानी पीएम की इज्जत उनकी ही पार्टी के छुटभैया नेता भी नहीं करते। मैं सत्यपाल मलिक के लिए छुटभैया नेता शब्द का उपयोग जानबुझकर कर रहा हूं क्योंकि भले वे मेरठ के जाट समाज से आते हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपनी पकड़ रखते हैं, लेकिन बात जब नरेंद्र मोदी के स्तर की हो, जिसने भाजपा के शीर्ष से ब्राह्मणों का खात्मा कर दिया है, तो सत्यपाल मलिक छुटाभैया नेता ही कहे जाएंगे। ठीक वैसे ही जैसे बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी। फिर इनके नाम में मोदी क्यों न हो, नरेंद्र मोदी के मुकाबले वे छुटभैया नेता ही कहे जाएंगे, क्योंकि सुशील कुमार मोदी के पास जनाधार नहीं है। बिहार में तो वह चुनाव लड़ने की हिम्मत 2004 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद खो दी है। हालांकि इसके बाद वे विधान परिषद यानी पिछले दरवाजे से उपमुख्यमंत्री जरूर बने रहे। लेकिन कहां एक राज्य का अदना सा उपमुख्यमंत्री और कहां देश का प्रधानमंत्री। दोनों में कोई तुलना ही नहीं।

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खैर, बात यह कि वे कौन लोग हैं, जिन्होंने पीएम की अक्ल मार रखी है? यह बात सत्यपाल मलिक ने कही है और वह भी अमित शाह के हवाले से।
फिलहाल तो मैं कुछ अनुमान ही लगा सकता हूं इन लोगों के बारे में। इनमें अडाणी और अंबानी जैसे उद्योगपति भी हो सकते हैं या फिर कुछ वे लोग जो सवर्ण समाज से आते हैं और इन दिनों भाजपा पर अपने जाति व समुदाय की कमजोर पड़ती पकड़ को लेकर चिंतित हैं।
फिर यह भी मुझे लगता है कि यह सवाल अनुत्तरित ही है कि प्रधानमंत्री की अक्ल किसने मार रखी है? और यदि सच में मार रखी है तो ऐसे व्यक्ति को क्या पीएम बने रहना चाहिए?
नवल किशोर कुमार फॉरवर्ड प्रेस में संपादक हैं।
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