Sunday, April 14, 2024
होमविचारजाति भी पूछो साधु की !

ताज़ा ख़बरें

संबंधित खबरें

जाति भी पूछो साधु की !

जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान, /मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान। महर्षि कबीर के इस दोहे को हम सबने बचपन में पढ़ा है जिसका अर्थ होता है कि संत से उनकी जाति न पूछो, क्योंकि वे तो जातिविहीन होते हैं। अगर पूछना हो तो उनसे ज्ञान की बात करो और […]

जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान, /मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान।

महर्षि कबीर के इस दोहे को हम सबने बचपन में पढ़ा है जिसका अर्थ होता है कि संत से उनकी जाति न पूछो, क्योंकि वे तो जातिविहीन होते हैं। अगर पूछना हो तो उनसे ज्ञान की बात करो और अपने कल्याण का रास्ता पूछो। ठीक उसी तरह जिस तरह म्यान में रक्खे तलवार की कीमत होती है म्यान की नहीं। संतों के भी ज्ञान की कीमत होती है जाति की नहीं!

इन्हीं विचारों के साथ हिन्दू धर्म में पला-बढ़ा मेरे जैसा इंसान तब स्तब्ध रह गया जब आज से कुछ दिन पहले यह ज्ञात हुआ कि हिन्दू धर्म में संतों की भी जातियां होती हैं। यहां भी वही वर्ण व्यवस्था कायम है जैसा कि भारतीय हिन्दू समाज में। संत भी सवर्ण और अवर्ण होते हैं। यहां भी अछूत होते हैं जो भेदभाव के शिकार होते हैं। और गहन शोध करने पर ज्ञात हुआ कि हिन्दू धर्म के संतों की मुख्यतः दो जातियां होती हैं जिसमें एक को सूत्रधारी संत तथा दूसरे को मालाधारी संत कहते हैं!

सूत्रधारी संत वे होते हैं जो जनेऊ पहनते हैं और तथाकथित ऊंची जातियों से आते हैं, जबकि मालाधारी संत वे होते हैं जो जनेऊ नहीं पहन सकते और तथाकथित निम्न जातियों में पैदा हुए होते हैं, जिसपर किसी का बस नहीं चलता है।

यही नहीं, सामाजिक वर्ण व्यवस्था की ही तरह यहां भी उनके कार्यों का बंटवारा हुआ रहता है। जैसे ‘सूत्रधारी संतों’ का कार्य होता है घंटी बजाना तथा रसोई बनाना। जबकि ‘मालाधारी’ संतों का कार्य होता है झाड़ू लगाना, बर्तन साफ करना, लकड़ी इकट्ठा करना तथा उसे फाड़ना इत्यादि। उनको रसोई घर में प्रवेश की अनुमति नहीं होती है।

संतों की भाषा में इसे ‘भितरे संत’ और ‘बहरे संत’ भी कहते हैं! ‘भितरे संत’ का अर्थ होता है वह संत जो घर के अंदर के कार्यों को देखता है जबकि ‘बहरे संत’ वे होते हैं जो बाहर के कार्यों को देखते हैं!

समाज में फैला ‘छुआछूत’ भी यहां कायम होता है। ‘भितरे संत अर्थात सूत्रधारी संत अर्थात सवर्ण संत’ अलग पंक्तियों में बैठकर खाना खाते हैं जबकि ‘बहरे संत’ अर्थात ‘मालाधारी संत’ अर्थात ‘नीच संत’ अलग पंक्तियों में बैठकर भोजन ग्रहण करते हैं।

[bs-quote quote=”हाल के दिनों में जितने भी संतों के विरुद्ध भ्रष्टाचार अथवा व्यभिचार के आरोप लगे अथवा जेल गए उसमें ज्यादातर संत मालाधारी श्रेणी के थे और इसका मुख्य उद्देश्य उन मालाधारी संतों से सूत्रधारी संतों द्वारा सत्ता और गद्दी छीनने की जंग थी अर्थात वह एक जातिवादी, अर्थवादी और शक्तिवादी सत्ता संघर्ष था, जिसका अगला शिकार जिसको होना है वह शायद बाबा रामदेव जी होंगे क्योंकि ये भी मालाधारी संतों की श्रेणी में ही आते हैं!” style=”style-2″ align=”center” color=”” author_name=”” author_job=”” author_avatar=”” author_link=””][/bs-quote]

 

मामला यहीं पर खत्म नहीं होता है। यह उत्तराधिकारी चुनने में भी कायम रहता है। अगर एक संत के दो शिष्य हों, जिसमें एक सूत्रधारी हो तथा दूसरा मालाधारी तो सत्ता सूत्रधारी यानी सवर्ण संत को ही गद्दी सौंपी जाती है भले ही वो मालाधारी शिष्य संत से उम्र और ज्ञान में काफी कम ही क्यों न हो।

हाल के दिनों में जितने भी संतों के विरुद्ध भ्रष्टाचार अथवा व्यभिचार के आरोप लगे अथवा जेल गए उसमें ज्यादातर संत मालाधारी श्रेणी के थे और इसका मुख्य उद्देश्य उन मालाधारी संतों से सूत्रधारी संतों द्वारा सत्ता और गद्दी छीनने की जंग थी अर्थात वह एक जातिवादी, अर्थवादी और शक्तिवादी सत्ता संघर्ष था, जिसका अगला शिकार जिसको होना है वह शायद बाबा रामदेव जी होंगे क्योंकि ये भी मालाधारी संतों की श्रेणी में ही आते हैं!

ऐसा माना जाता है कि आज पूरे देश की सकल संपत्ति और अर्थव्यवस्था का लगभग 15-20% हिस्सा मंदिरों और संतों के पास है तथा इस देश में स्थापित की जानेवाली राजनीतिक सत्ता प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से इन लोगों के ही अधीन है। अर्थात धर्म और मोक्ष के नाम पर असल में यहां भी जाति और वर्ण व्यवस्था को कायम करने के लिए भौतिक जंग जारी है  जिसका उद्देश्य अपना अनैतिक आधिपत्य कायम रखना मात्र है!

डॉ. ओमशंकर सर सुन्दरलाल अस्पताल के मशहूर हृदय रोग विभाग के विभागध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता हैं।

गाँव के लोग
गाँव के लोग
पत्रकारिता में जनसरोकारों और सामाजिक न्याय के विज़न के साथ काम कर रही वेबसाइट। इसकी ग्राउंड रिपोर्टिंग और कहानियाँ देश की सच्ची तस्वीर दिखाती हैं। प्रतिदिन पढ़ें देश की हलचलों के बारे में । वेबसाइट की यथासंभव मदद करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

लोकप्रिय खबरें