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रायगढ़ का आशा प्रशामक देखभाल गृह : संसाधनों की कमी है जज़्बे की नहीं
रायगढ़ शहर में रिहैब फाउंडेशन द्वारा संचालित आशा प्रशामक देखभाल गृह में इस समय साठ से अधिक बुजुर्ग स्त्री-पुरुष और मानसिक रोगी हैं। इनमें से कई पूरी तरह ठीक हो चुके हैं लेकिन उनके घरवाले उन्हें वापस ले जाने को तैयार नहीं है। ऐसे में बिना किसी सरकारी सहायता से केवल जनसहयोग के भरोसे चलनेवाले इस प्रशामक गृह पर आर्थिक दुश्वारियाँ लगातार बढ़ रही हैं। इसकी संचालिका जस्सी फिलिप स्वयं बचपन में पोलियो का शिकार हो गई थीं लेकिन अपने जीवट से उन्होंने न केवल अपनी शिक्षा पूरी की बल्कि यह सेवा केंद्र शुरू किया। उनका जीवन एक प्रेरणादायी यात्रा है। इस संस्था के बहाने छत्तीसगढ़ में वृद्धाश्रमों पर पढ़िये अपर्णा की यह रिपोर्ट।
अपर्णा -
युवा रंगकर्मी मोहन सागर : हुनर और धैर्य के साथ बनती कहानी
अपर्णा -
मोहन सागर जिस पृष्ठभूमि से आते हैं, उन जैसे लोगों को कला के क्षेत्र में जगह बनाने के लिए प्रोत्साहन मिलना कठिन होता है, बल्कि यह कह सकते हैं कि पर्याप्त इग्नोरेंस मिलता है। मोहन सागर ने इन हालात में अपने को टिकाए रखा। रायगढ़, खैरागढ़ और फिर दिल्ली तक का सफर करते हुए वह मुंबई के फिल्मी माहौल में जा पहुँचे हैं। यहाँ अपने हुनर के कारण जगह बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन इस संघर्ष ने रंग दिखाना शुरू कर दिया है। थिएटर में लगातार काम करते हुए कुछ फिल्मों व वेब सीरिज में भी काम कर रहे हैं। पढ़िये उनकी कला यात्रा का संघर्ष।
नन्द प्रसाद यादव : दृष्टिबाधित होने के बावजूद हार नहीं माना
राकेश सन 1996 में पढ़ने के लिए राजकीय जुबिली इन्टर कॉलेज में पढ़ने गए। वहाँ उन्हें दृष्टिबाधित अध्यापक नन्द प्रसाद यादव (एम. ए., एलएल.बी.) जी से मिलना हुआ। वे राजनीतिशास्त्र-नागरिकशास्त्र के प्रवक्ता थे और हाईस्कूल तक की कक्षाओं में हिन्दी साहित्य का काव्य संकलन पढ़ाते थे। उन्हें काव्य संकलन में संकलित सभी कवियों की कविताएं याद थीं और बड़े मनोयोग से वे अपने छात्रों को पढ़ाते थे।
लोकल हीरो : दो बच्चों को गोद लेने की इच्छा एक पूरे समुदाय के बच्चों का जीवन बदलने का अभियान कैसे बनी?
अपर्णा -
बनारस के कुख्यात रेडलाइट एरिया शिवदासपुर में बहुत कुछ बदल गया है। ऊपर से यह इलाका नयी इमारतों और बाज़ारों से जगमगा रहा है लेकिन असली बदलाव अंदर आ रहा है। शहर की एक महत्वपूर्ण संस्था गुड़िया ने रेडलाइट एरिया के बच्चों के जीवन में एक नयी रौशनी पैदा की है और वे पढ़ते-लिखते हुये अपने लिए एक बेहतर और सम्मानजनक जीवन जीने की तैयारी कर रहे हैं। गुड़िया संस्थान के कर्ता-धर्ता अजित सिंह और सांत्वना मंजू ने देह व्यापार के विरुद्ध भारत के सबसे बड़े अभियानों का नेतृत्व किया है। पढ़िये कैसे अनाथालय में पली-बढ़ी एक बच्ची ने अपना जीवन समाज से अपमानित और बहिष्कृत बच्चों की बेहतरी में लगा दिया।
प्रेम कुमार नट की कहानी : संविधान ने अधिकार दिया लेकिन समाज में अभी कई पहाड़ तोड़ने हैं
अपर्णा -
नट समुदाय का नाम आते ही जेहन में रस्सी पर चलने वाले छोटे बच्चों की याद आ जाती है क्योंकि बचपन से हमने नटों का वही तमाशा देखा था। लेकिन बड़े होते-होते अब तमाशा दिखाने वाले वे लोग फिर कभी गली-चौराहे-मोहल्ले में दिखाई नहीं दिए। आज इनकी बात इसलिए याद आ गई क्योंकि हमें बेलवाँ की नट बस्ती में इस समुदाय के बारे में जानने के लिए जाना था, लेकिन वहाँ पहुँचने पर ऐसा कुछ दिखाई नहीं दिया। आम लोगों जैसे ही वे अपनी बस्ती में मगन थे। उनको लेकर प्रचलित मिथक अब अतीत की बात हो चली है।
सोनभद्र : सत्ता, भ्रष्ट व्यवस्था और गरीबी से जूझते हुये न्याय के लिए संघर्ष और जीत के नायक
सोनभद्र जिले की दुद्धी विधानसभा के भाजपा विधायक रामदुलार गोंड द्वारा बलात्कार की शिकार होनेवाली लड़की के बड़े भाई रामसेवक प्रजापति ने न्याय के लिए नौ साल लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। अनेक धमकियों और मुकदमों को झेलते हुये भी उन्होंने हार नहीं मानी। 15 दिसंबर 2023 को एमपीएमएलए कोर्ट ने रामदुलार गोंड को नाबालिग लड़की से रेप के मामले में 25 साल के कठोर कारावास और 10 लाख रुपए जुर्माने की सज़ा सुनाई।
पुंछ : बीमारी और आर्थिक तंगी से जूझता एक परिवार, समाज के लिए प्रेरणादायक है
हर परिवार की धुरी एक स्त्री होती है, उसके ही इर्द-गिर्द पति, बच्चे और परिवार के सभी सदस्यों का जीवन गुजरता है लेकिन किसी स्त्री की गंभीर बीमारी हो जाने से पूरा परिवार अस्त-व्यस्त हो जाता है। ऐसा ही एक गरीब मजदूर गुलाम मुहम्मद का अपने जीवनसाथी परवीन की मानसिक स्थिति कमजोर होने के बाद उसकी और बच्चों की जिस तरह देखभाल किया वह अद्भुत है।
जौनपुर: गाय-भैंसों के संकटमोचक
हर काम का प्रशिक्षण नहीं लिया जाता, कुछ काम ऐसे होते हैं जो व्यक्ति स्थितियों को देखते-सुनते सीख लेता है। जौनपुर जिले के बेलापार गाँव के निवासी भानु प्रताप यादव ऐसे ही भगत परंपरा के आदमी है। जो गाय-भैंसों के बच्चे पैदा होते समय होने वाली परेशानियों का मिनटों में निपटारा करते हैं।
जौनपुर : शादी की 40वीं सालगिरह पर बांटे 40 बक्सा पुस्तकालय, अतुल यादव रच रहे हैं सामाजिक चेतना का नया संसार
अतुल यादव विगत कई वर्षों से पढ़ने वाले तेज लेकिन आर्थिक रूप से विपन्न विद्यार्थियों के लिए किताबें मुहैया कराते आ रहे हैं। वह बताते हैं कि हर साल सेशन की शुरुआत में बच्चों को किताबें देते हैं और उनके अगली कक्षा में जाने के बाद उन्हें उस कक्षा की किताबें देकर पिछली किताबें लेते हैं और अन्य बच्चों को किताबें मुहैया कराते हैं।
रामदास राही जिन्होंने भिखारी ठाकुर की यादों को सँवारने में जीवन लगा दिया
भिखारी ठाकुर के नाट्य शैली को लौंडा नाच कहने वाला जेएनयू का एक शोधार्थी जैनेन्द्र दोस्त है जो कि महाथेथर है। उसने ही रामचंद्र माझी को पाँच हजार रुपया देकर दिल्ली में अश्लीलतापूर्वक नचवाया था। अभिनय और कला की बहुत-सी भाव भंगिमाएं होती है जिसका ज्ञान सबको नहीं है। जगदीशचंद्र माथुर ने भिखारी ठाकुर को भरत मुनि के परंपरा का नाटककार कहा है और राहुल सांकृत्यायन ने उन्हें अनगढ़ हीरा कहा।
गरीबों-वंचितों और बेसहारों का सहारा है बनारस का अमन कबीर
आज से हम एक नए कॉलम की शुरुआत कर रहे हैं जिसका नाम है लोकल हीरो। इसमें हम उन लोगों की कहानियाँ ढूंढकर लाएँगे जिन्होंने स्थानीय स्तर पर अपने-अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज सेवा, पानी, पर्यावरण, संस्कृति, सामाजिक सद्भाव , स्त्रियों के अधिकारों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों, बच्चों, बूढ़ों, किसानों, मजदूरों, वंचितों और हाशिये के समाजों की बेहतरी के लिए काम करने वाले ऐसे अनेक लोग पूर्वाञ्चल में हैं जिनके बारे में जानकर हमें गर्व का अनुभव होता है और उनके काम से प्रेरणा मिलती है। यह कॉलम प्रत्येक रविवार को प्रकाशित होगा। आज इसकी पहली कड़ी में बनारस के एक महत्वपूर्ण युवा अमन कबीर के बारे में जानिए।

