Wednesday, June 3, 2026
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अभिशप्त

देश की राजनीति में हर तरफ जादू हो रहा है। कोई लटक रहा है, तो कोई लटका रहा है। कोई उछल रहा है, तो...

दिल्ली में ओबीसी, एससी, एसटी और अल्पसंख्यकों के एक कार्यक्रम में (डायरी 19 दिसंबर, 2021) 

दिल्ली पटना जैसा शहर नहीं है। पटना की बात अलग थी। एक तो यह कि पटना बहुत छोटा शहर है दिल्ली के मुकाबले और...

ब्राह्मणवादी चुनौतियां मेरे आगे (डायरी 22 नवंबर, 2021)

परिजनों से दूर दिल्ली में रहकर ब्राह्मणवादी परंपराओं का विरोध बहुत आसान है मेरे लिए। चूंकि मैं नास्तिक आदमी हूं तो मुझे कोई फर्क...

मुल्कराज आनंद ने मुझसे पहला ही सवाल किया कि क्या तुम टॉयलेट साफ़ कर सकते हो?

 भारत के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता और चिन्तक-लेखक विद्या भूषण रावत सही अर्थों में एक जिंदादिल व्यक्ति हैं. अकेले बूते पर उन्होंने जितना काम किया...

छठ का परित्याग करें दलित-पिछड़े, ब्राह्मण वर्ग ने इसे प्रदूषित कर दिया है (डायरी 11 नवंबर, 2021)

बात उन दिनों की है जब मुझे इतनी समझ तो थी कि मेरे घर में क्या हो रहा है और मेरे गांव-समाज में क्या...

शहीद शब्द का खेल (डायरी 9 नवंबर 2021)

शब्द महत्वपूर्ण होते हैं। कई बार सामान तरह की घटनाओं के लिए अलग-अलग शब्द होते हैं। उदाहरण के लिए एक घटना है। मैं इसे...

सत्ता और जनसत्ता (डायरी, 13 अक्टूबर 2021)

जीवन को लेकर मेरी एक मान्यता है। यह मान्यता विज्ञान पर आधारित है। मेरी मान्यता है कि ब्रह्मांड में कुछ भी स्वतंत्र  नहीं है।...

स्त्री सशक्तीकरण और जागरुकता के लिए स्त्री विमर्श एक कारगर औजार है

आधुनिकता और उदार सोच के तमाम दावों के बावजूद स्त्री की सामाजिक स्थिति या उत्थान में कोई बड़ा क्रांतिकारी परिवर्तन नहीं आया है। आज भी वे समझौतों और दोहरे कार्यभार के बीच पिस रही हैं। पुरुश सत्ता की नीवें हमारे समाज में बहुत गहरे तक धंसी हुई हैं। इसे तोडना, बदलना या संवारना एक लम्बी लड़ाई है। हर क्षेत्र में स्त्रियां अपनी- अपनी तरह से अपनी लड़ाई लड़ रही हैं।

हिम्मत नगर के अच्छेलाल

‘नमस्कार, चाचा। मैं हिम्मत नगर से अच्छेलाल बोल रहा हूँ।’ हर दूसरे-तीसरे महीने किसी रविवार की सुबह मोबाइल पर यह वाक्य सुनने को मिल...

साजिश की थ्योरी (डायरी 11 अक्टूबर 2021)

सियासत में और सियासत को समझने में आवश्यक अध्ययन में एक थ्योरी होती है। इसे मैं षडयंत्र की थ्योरी मानता हूं। इसमें होता यह...

सुप्रीम कोर्ट का सहज संज्ञान और सरकार का रवैया

लखीमपुर खीरी की बर्बरतापूर्ण घटना के बाद इंटरनेट पर वायरल हुये वीडियो और मारे गए किसानों के साथ प्रदर्शन में शामिल किसानों के बयान...

मुकेश ने कबीर की परंपरा में मगहर का प्रकाशन चुना

मुकेश मानस का 50 से कम की उम्र में हमारे बीच न रहना जीवन की अनिश्चितता और शरीर की नश्वरता को नज़दीक से बता गया...

किसान आंदोलन का हासिल और भविष्य की चुनौतियां

किसान आंदोलन का एक हासिल यह भी है कि इसने सत्ता और कॉरपोरेट मीडिया के चरित्र, उसकी प्राथमिकताओं एवं रणनीतियों को आम लोगों के सम्मुख उजागर किया है। हमारी सरकारें जन आंदोलनों से निपटने के लिए उन्हीं रणनीतियों का सहारा लेती दिख रही हैं जो गुलाम भारत के अंग्रेज शासकों द्वारा अपनाई जाती थीं।

चरणजीत सिंह चन्नी, लालू प्रसाद और जीतनराम मांझी  डायरी (1 अक्टूबर, 2021)

बदलाव की अनेक परिभाषाएं मुमकिन हैं। सबसे महत्वपूर्ण यह कि बदलाव अदिश नहीं होते। उनके साथ एक दिशा होती ही है। और फिर यह...

साहित्यिक एवं सामाजिक कार्यों के लिए लेखकों को मिला सम्मान

उत्तर प्रदेश। सहारनपुर मेें हिंदी दिवस के अवसर पर साहित्यिक संस्था 'साहित्य चेतना मंच', ने अपने द्वितीय "ओमप्रकाश वाल्मीकि स्मृति साहित्य सम्मान" के लिए...

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