देव दीपावली में दीये जलाने हेतु शिक्षक से चपरासी बने यूपी प्राइमरी स्कूल के अध्यापक

भुवाल यादव, संवाददाता, गाँव के लोग डॉट कॉम

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कहा जाता है कि शिक्षक राष्ट्र निर्माता होता है। वह ईश्वर का रूप भी होता है क्योंकि ईश्वर पूरे ब्रह्माण्ड का निर्माता होता है, तो शिक्षक एक अच्छे राष्ट्र का निर्माता माना जाता है। शिक्षक समाज में बहुत प्रतिष्ठित लोग होते हैं, जो पढ़ाने के अपने जादू के माध्यम से आम लोगों की जीवन शैली और दिमागी स्तर को बढ़ाने की जिम्मेदारी उठाते हैं। बच्चों के माता-पिता शिक्षक से बहुत उम्मीद रखते हैं, क्योंकि शिक्षक की भूमिका कक्षा से खेल के मैदान तक विद्यार्थी के लिए महत्वपूर्ण होती है। व्यक्ति के जीवन में शिक्षक बहुत महत्वपूर्ण इंसान होता है, जो हमारे जीवन में अलग-अलग कार्य करता प्रतीत होता है। परंतु आज के समय में शिक्षकों की भूमिका और बढ़ गयी है। यह भूमिका सकारात्मक दिशा में बढ़ी है या नकारात्मक, उसे आपको तय करना है; क्यों कि सरकार आपके पैसे से चलती है और उसके सभी नुमाइंदे आप ही के पैसे से तनख्वाह पाते हैं। यूपी के प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों की स्थिति चपरासी जैसी हो गयी है। उन्हें कभी दूल्हे-दुल्हन संवारने के लिए सामूहिक विवाह समारोह में भेज दिया जाता है तो कभी स्टेशनों पर यात्रियों की निगरानी में।

प्रधानमंत्री जी कहते हैं कि हम विश्वगुरु बनने वाले हैं, मैं उनसे पूछना चाहता हूॅ कि किनके बलबूते आप विश्वगुरु बनियेगा। दुल्हन और दूल्हे संवारने वाले अध्यापकों या यात्रियों की निगरानी में लगाये गये टीचर्स के सहारे या बैल की तरह हांककर पंडालों के बीच खड़े किये गये अध्यापकों के दम पर। अंत में उन्होंने कहा- हम चाहते हैं कि सरकार किसी की हो, हमारा जो काम है वह काम लिया जाए। भले उसके लिए आप हमसे जितनी मेहनत करा लीजिए, कोई बात नहीं है।

 

शिक्षक का सबसे मजेदार पहलू तब सामने आता है जब जिला प्रशासन के आदेश पर प्रधानमंत्री जी का भाषण सुनने के लिए उन्हें गाय-भैंसों की तरह हांककर पंडालों के बीच खड़ा कर दिया जाता है। शिक्षकों को ऐसी स्थिति का सामना आये दिन करना पड़ता है। बनारस में कल देव दीपावली का महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी, वाराणसी के दिशा निर्देशन में खंड शिक्षा अधिकारियों के सहयोग से बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा सभी घाटों के ठीक सामने ‘गंगा रेती पार’ पर 350000(तीन लाख पचास हजार) दीपकों को जलाकर दीपोत्सव मनाने का आयोजन किया गया है। सरकार द्वारा जिस धनराशि को जनता की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और रोजगार के लिए व्यय करने की जरूरत है, उन्हें दीपोत्सव में खर्च किया जा रहा है।

एक जगह दीपोत्सव का मामला रहता तो बातें समझ में भी आती, लेकिन पिछले कई सालों से ऐसे आयोजन जगह-जगह हो रहे हैं। यह एक तरह से देखा जाए तो पर्व-त्योहारों के नाम तुष्टिकरण की राजनीति हो रही है। सरकार किसी की हो, पर्व-त्योहार किसी जाति, धर्म और संप्रदाय की हो; उस पर सरकारी राजस्व का व्यय करना बन्द होना चाहिए। यदि अपवाद को छोड़ दिया जाए तो जनता सरकार का चुनाव अपनी भलाई के लिए करती है न कि तुष्टिकरण की राजनीति के लिए। इसलिए ऐसे आयोजन बंद होने चाहिए।

जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी, वाराणसी के दिशा निर्देशन में खंड शिक्षा अधिकारियों के सहयोग से बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा सभी घाटों के ठीक सामने 'गंगा रेती पार' पर 350000(तीन लाख पचास हजार) दीपकों को जलाकर दीपोत्सव मनाने का आयोजन किया गया है।

दीपोत्सव के सफल आयोजन के लिए कायदे से प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों को सब सेक्टर प्रभारी और पंक्ति प्रभारी बनाया गया है। इस आयोजन में लगे शिक्षकों को 17,18-19 नवंबर को किसी प्रकार का अवकाश लेने की छूट नहीं है। एक पंक्ति प्रभारी बनाये गये अध्यापक ने नाम न लिखने के शर्त पर बताया कि अब हम लोग शिक्षक नहीं रहे हैं, बल्कि सत्ता और प्रशासन के लिए चपरासी बनकर रह गये हैं। सरकार और प्रशासन के उपर्युक्त रवैए के खिलाफ हम विरोध प्रदर्शन नहीं कर सकते हैं; क्यों हमें नौकरी से निकाला जा सकता है। ऐसे में हम सब क्या करें? प्रधानमंत्री जी कहते हैं कि हम विश्वगुरु बनने वाले हैं, मैं उनसे पूछना चाहता हूॅ कि किनके बलबूते आप विश्वगुरु बनियेगा। दुल्हन और दूल्हे संवारने वाले अध्यापकों या यात्रियों की निगरानी में लगाये गये टीचर्स के सहारे या बैल की तरह हांककर पंडालों के बीच खड़े किये गये अध्यापकों के दम पर। अंत में उन्होंने कहा- हम चाहते हैं कि सरकार किसी की हो, हमारा जो काम है वह काम लिया जाए। भले उसके लिए आप हमसे जितनी मेहनत करा लीजिए, कोई बात नहीं है।

निम्न फाइल में सब सेक्टर प्रभारियों और पंक्ति प्रभारियों के नामों की सूची है।

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