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सीडीएस बिपिन रावत की मौत (डायरी, 9 दिसंबर 2021)
सैन्य सेवा प्रमुख बिपिन रावत समेत 13 लोगों की मौत कल तमिलनाडु में हेलीकॉप्टर हादसे में हो गई। इस हादसे के बाद कई तरह...
आपका रंग क्या है मिस्टर प्राइम मिनिस्टर? (डायरी, 8 दिसंबर, 2021)
जीवन में रंगों का बड़ा महत्व है। लेकिन रंगों का उपयोग भी अलग-अलग अर्थों में किया जाता है। मतलब यह कि रंगों का उपयोग...
ममता बनर्जी के बयानों पर हंगामा क्यों? (डायरी, 3 दिसंबर 2021)
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इन दिनों फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह उनका कांग्रेस के खिलाफ बयान देना है। अनेक राजनीतिक...
संविधान पर चल रहे विमर्श के निहितार्थ
संविधान दिवस पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों और संगोष्ठियों का एक उद्देश्य यह भी होता है कि संघ परिवार एवं उसके विचारकों की संविधान...
जाति तोड़ने के लिए जरूरी है सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक बराबरी (डायरी, 2 दिसंबर, 2021)
विविधता और भेदभाव में एक बुनियादी फर्क है। जहां एक ओर विविधता का संबंध रहन-सहन, क्षेत्रीय परिस्थितियां एवं संस्कृति व परंपराओं से है, वहीं...
भाजपा ने ही परिवार आधारित पार्टियों को पोसा है
कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि परिवार आधारित राजनीतिक दल लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। मोदीजी के इस...
देश के लिए जरूरी हैं शरद यादव, लालू यादव और मुलायम सिंह यादव का पराक्रम(डायरी, 27 नवंबर 2021)
संविधान दिवस का फेसबुकिया सेलिब्रेशन कल देर रात चलता रहा। कल ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी संविधान को लेकर अपना ज्ञान बांटा। सुप्रीम...
जवन कर दिही अन्हार, उ अंजोर का करी…(डायरी 24 नवंबर, 2021)
आज मेरी जेहन में एक बात चल रही है। मैं यह सोच रहा हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना सांड़ कहे जानेवाले पशु...
मोहनसराय में हाइवे का सीवरेज उफनने से ग्रामीणों में आक्रोश
यूपी की सरकार पिछले चार सालों से चिल्ला-चिल्लाकर कह रही कि सड़कें गड्ढा मुक्त हो गयी हैं। शेष गड्ढे जो किसी कारण वश बन...
अलोकतांत्रिक नरेंद्र मोदी का ‘मोदीयापा’ (डायरी, 20 नवंबर, 2021)
अहा! कल का दिन बहुत खूबसूरत था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल सुबह नौ बजे देश को संबोधित करते हुए घोषणा की कि वे...
वाराणसी : सत्ता की मनमानी के खिलाफ पीड़ित मुसहरों ने डीएम को सौंपा ज्ञापन
वाराणसी के करसड़ा गाँव में मुसहरों को बेदखल कर बुलडोजर चला दिया गया। उनके घर खाक में मिल गए और अब वे सड़क पर हैं।
देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कठपुतली हैं और इन्हें नचानेवाले अंबानी-अदानी हैं
बातचीत का अंतिम हिस्सा
माओवादियों के वार्ताकार होने के आधार पर आप तब कैसा महसूस करते हैं जब मीडिया माओवाद को ‘आंतरिक आतंकवाद’ और...
मोदी सरकार सावरकर को ‘भारत-रत्न’ क्यों देना चाहती है?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भारतीय जनता पार्टी और केंद्र की मोदी सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद अब भी देश में विनायक दामोदर सावरकर को...
वाराणसी के करसड़ा गांव की घटना पहुंची हाईकोर्ट
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यह भी मांग की है कि पीड़ित 13 परिवारों को तत्काल इनकी जमीन पर बसाये जाने का आदेश पारित करते हुए सभी मूलभूत सुविधाएँ जैसे- आवास, राशन कार्ड, जॉब कार्ड आदि अविलंब बनवाने की भी व्यवस्था किया जाय। उधर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री मनोज राय 'धूपचंडी' ने उक्त मामले में लेखपाल नीलम प्रकाश के निलंबित हो जाने के बाद पीएमओ को ट्वीट करके यह मांग रखी है कि तहसीलदार, एसडीएम और डीएम को भी दोषी ठहराते हुए इनके ख़िलाफ़ भी उचित कार्रवाई की जाए।
वाराणसी के करसड़ा से उजाड़े गये मुसहर नहीं मनाएंगे दिवाली
करसड़ा गांव में मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत बनने वाले अटल आवासीय विद्यालय हेतु मुसहर बिरादरी के तेरह परिवारों के घर बीते शनिवार को शासन द्वारा उजाड़ दिये गये। जिसके चलते उनका पूरा परिवार सड़क पर है।
घरविहीन हुए करसड़ा के मुसहरों ने न्याय के लिए किया सत्याग्रह
रोहनिया थाना क्षेत्र के करसड़ा गांव में बीते शुक्रवार को मुसहर परिवारों के घर राजस्व विभाग ने ढहवा दिया था। पीड़ितों का आरोप है...
करसड़ा से उजाड़े गये बाशिंदो ने सामाजिक संगठनों को सुनाया अपना दुःख
31 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में बीते शुक्रवार को करसड़ा मुसहर बस्ती से उजाड़े गये बाशिंदो से विभिन्न सामाजिक...
ग्लोबल हंगर इंडेक्स को लेकर भी असहिष्णु सरकार
कुपोषण और भुखमरी के यह हालात तब हैं जब राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून(2013) का कवच हमारे पास है जिसके जरिए हम 75 प्रतिशत ग्रामीण आबादी और 50 प्रतिशत शहरी आबादी को खाद्य और पोषण की सुरक्षा दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त फरवरी 2006 से अस्तित्व में आई मनरेगा जिसका प्रारंभिक उद्देश्य कृषि क्षेत्र की बेरोजगारी से मुकाबला करना था, आज कोविड-19 के कारण शहरों से वापस लौटे प्रवासी मजदूरों को भी रोजगार मुहैया करा रही है।
पीएस-4 ने पीएम मोदी के कार्यक्रम के विरोध में मनाया काला दिवस
25 अक्टूबर को वाराणसी प्रजापति शोषित समाज संघर्ष समिति (पीएस4) ने मेंहदीगंज में आयोजित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा का विरोध करते हुए आज...
किसान आंदोलन के परिप्रेक्ष्य में विगत दशकों में चल रहे आंदोलन का एक सिलसिला
यह समय का पहिया घूमने जैसी बात है। दस साल हो रहे हैं जब 2009 में आई ग्रामीण विकास मंत्रालय एक मसविदा रिपोर्ट के 160 वें पन्ने पर भारत के आदिवासी इलाकों में कब्जाई जा रही ज़मीनों को धरती के इतिहास में 'कोलंबस के बाद की सबसे बड़ी लूट' बताया गया था। कमिटी ऑनस्टेट अग्रेरियन रिलेशंस एंड अनफिनिश्ड टास्क ऑफ लैंडरिफॉर्म्स शीर्षक से यह रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा नहीं बन पाई है, जिसने छत्तीसगढ़ और झारखण्ड के कुछ इलाकों में सरकारों और निजी कंपनियों (नाम समेत) की मिली भगत से हो रही ज़मीन की लूट से पैदा हो रहे गृहयुद्ध जैसे हालात की ओर इशारा किया था।

