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जनसत्ता

किसके लिए हैं हिंदी के ‘अखबार’? (डायरी 28 फरवरी, 2022)

ब्राह्मण धर्म के जैसे ही लेखन धर्म भी विशुद्ध रूप से धंधा है। धंधा का मतलब व्यापार है। कुछ लोगों के लिए यह रोजगार भी है। और जैसा कि हर धंधे…
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एक हथियार के रूप में भाषा : डायरी (12 फरवरी, 2022) : 

भाषा बड़ी कमाल की चीज है। इसका आविष्कार इसीलिए ही किया गया होगा ताकि इंसान अपनी बात कह सके और दुनिया भर की तमाम चीजों को संबोधित…
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और अब प्रधानमंत्री की करोड़टकिया ‘कार’ (डायरी 30 दिसंबर, 2021) 

खबरों से जुड़ी दुनिया ही अलग होती है। इसको ऐसे समझिए कि एक पत्रकार खबरों के बीच ही जीता है। खबरें भी एक जैसी नहीं होतीं। किस्म-किस्म की…
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शहीद शब्द का खेल ( डायरी 9 नवंबर 2021)

शब्द महत्वपूर्ण होते हैं। कई बार सामान तरह की घटनाओं के लिए अलग-अलग शब्द होते हैं। उदाहरण के लिए एक घटना है। मैं इसे दिल्ली से प्रकाशित…
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 बिहार का अंधा हुक्मरान, बेजुबान अखबार (डायरी 4 नवंबर, 2021) 

बचपन में यह नाटक पढ़ा था– अंधेर नगरी, चौपट राजा। यह कमाल का नाटक है। कमाल इसलिए कि यह हर समय प्रासंगिक है। आज के दौर में भी जबकि बिहार सहित…
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 प्रेस विज्ञप्तियों के सहारे भी दिखाया जा सकता है कि राजा नंगा है (डायरी 31 अक्टूबर, 2021) 

आज पटना प्रवास का दूसरा दिन है। मन में कई सारे विचार हैं। परंतु सबसे महत्वपूर्ण है– प्रेस विज्ञप्ति। दरअसल, पत्रकारिता में प्रेस…
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आरक्षण मजाक का विषय नहीं है जज महोदय (डायरी 22 अक्टूबर, 2021)

समाज को देखने-समझने के दो नजरिए हो सकते हैं। फिर चाहे वह दाता और याचक के नजरिए से देखें या फिर श्रमजीवी और परजीवी के नजरिए से। संसाधन रहित…
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आधुनिक भारत में ब्राह्मणों और राजपूतों के बीच ऐसे हो रही लड़ाई  (डायरी 14 अक्टूबर, 2021)  

भारत के शासकों ने देश के अखबारों के जैसे अपनी परिभाषा बदल ली है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे इस देश के पुलिस थाने करते हैं। मतलब यह कि सीमा…
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सत्ता और जनसत्ता (डायरी, 13 अक्टूबर 2021)

जीवन को लेकर मेरी एक मान्यता है। यह मान्यता विज्ञान पर आधारित है। मेरी मान्यता है कि ब्रह्मांड में कुछ भी स्वतंत्र  नहीं है। इसे दूसरे रूप…
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