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पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव: कोलकाता HC ने दी SEC को अवमानना कार्यवाही की चेतावनी
हिंसा के लिए ममता ने ठहराया माकपा, SFI को दोषी
पश्चिम बंगाल। कोलकत्ता उच्च न्यायालय ने संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने और केंद्रीय बलों...
कर्नाटक विजन से एमपी मिशन की बिसात बिछाने में किन मोहरों से चाल चलेंगे डीके शिवकुमार
कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा को जोरदार पटखनी देने की वजह से कांग्रेस के उत्साह में जबर्दस्त इजाफा हुआ है। इस इजाफे से मुग्ध...
पाठ्यक्रम पर सियासत, कर्नाटक को भाजपा के प्रतीकों से मुक्त करने में लगी कांग्रेस
योगेन्द्र यादव और सुहास पाल्शीकर ने केंद्र सरकार को पत्र लिख कर एनसीईआरटी सलाहकार बोर्ड से अपना नाम हटाने की मांग की
कर्नाटक राज्य में...
पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव में टीएमसी पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप, मुर्शिदाबाद में कांग्रेसी कार्यकर्ता की हत्या
मुर्शिदाबाद (प. बंगाल)। राजनीतिक और चुनावी हिंसा के लिए चर्चित पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव 2023 के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने के पहले...
नई संसद के उद्घाटन का विपक्ष द्वारा बहिष्कार लोकतांत्रिक विरोध का एक रूप है
सार्वजनिक जीवन में प्रतीकों का बहुत महत्व होता है। प्रतीकों का चुनाव और प्रक्षेपण विचारधारा, संस्कृति, इतिहास, विश्वदृष्टि आदि-इत्यादि को दर्शाता है। 75 साल...
उचित नहीं है प्रधानमंत्री द्वारा संसद भवन का उद्घाटन
भोपाल। संपूर्ण देश में इस बात पर बहस छिड़ी हुई है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नए संसद भवन का उद्घाटन संविधान के प्रावधानों...
कर्नाटक का सन्देश
कर्नाटक चुनाव परिणाम आये सप्ताह भर हो चले हैं, पर इसे लेकर चर्चा का दौर आज भी थमा नहीं है। इस चुनाव का सबसे...
अहिंदा के दम पर सिद्धारमैया बनेंगे मुख्यमंत्री, डीके शिवकुमार संभालेंगे पार्टी की कमान
खत्म हुआ टशन, शुरू हुआ जश्न
डीके शिवकुमार की रणनीतिक कारीगरी के दम पर कांग्रेस 2024 के लोकसभा चुनाव तक ले जाना चाहेगी इस जीत...
मोहब्बत का शोरूम तो खुल चुका है पर क्या घृणा की दुकान पर ताला लगा सकेंगे राहुल गांधी
मोदी है तो मुमकिन है... की अवधारणा पर कर्नाटक के चुनाव परिणाम ने बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है
जब आपके खिलाफ हवाओं में ज़हर...
ख़बरदार! किसी ने इसे मोदीजी की ‘हार’ कहा तो…!
माना कि कर्नाटक में पब्लिक ने मोदी की मन की बात नहीं सुनी है। मोदीजी ने पूरे राज्य में घूम-घूमकर सुनाई, पर पब्लिक ने...
उत्तर प्रदेश के निकाय चुनाव में भाजपा ने मारी बाजी सभी सीटों पर मेयर बनाने में कामयाब
शहरी क्षेत्रों में भाजपा का दबदबा बरकरार, ग्रामीण क्षेत्रों में भी धीमी रही सायकिल की चाल
मरणासन्न हाथी के लपेटे में कई उम्मीदवारों की उम्मीद...
कर्नाटक चुनाव में फेल हुआ मोदी मैजिक, काँग्रेस ने भाजपा से छीना सत्ता का ताज
यह जीत राहुल के विजन ‘घृणा के खिलाफ प्यार’ के मिशन को आगे बढ़ा सकती है
चुनावी सर्वेक्षण की उम्मीदें सच साबित हुई और...
क्या बजरंग बली का पर्याय हो सकता है बजरंग दल?
कर्नाटक विधानसभा चुनाव (मई 2023) के लिए अपने घोषणापत्र में कांग्रेस ने नफरत फैलाने वाले संगठनों पर प्रतिबंध लगाने का वादा किया है। अपने...
रमाकांत यादव : सामंतवाद के खिलाफ उठी आवाज सियासी गलियारे में पहुँचकर स्वयं सामंती चेहरे में बदल गई
बाहुबल का ऐसा रसूख कि पत्नी के खिलाफ जब पूर्व मुख्यमंत्री ने चुनाव लड़ा तो पूर्व मुख्यमंत्री को ना झण्डा उठाने वाले मिले, ना झण्डा लगाने की जगह मिली। आज भी हवा में फैली हुई यह बात मन को कंपा देती है कि इन्होंने चार ठाकुरों को जिंदा ही दफना दिया था, पर यह बात ना किसी कानून के पन्ने में दर्ज हुई है, ना इतिहास इसका कोई साक्ष्य देता है। लोग आज भी इस बात पर बस इतना बोलते हैं कि ‘सुना तो है पर जानते नहीं हैं कि सच्चाई क्या है?’ उत्तर प्रदेश की हर बड़ी पार्टी से मुहब्बत भी की और बगावत भी। दिग्गज राजनेता मुलायम सिंह यादव के खिलाफ भाजपा ने जब चुनाव मैदान में उतारा तो जीत के लिए मुलायम को भी लोहे के चने चबाने पड़ गए। जिस आदमी ने कभी पिता के दिखाए हुए रास्ते पर चलकर सामंतवाद के खिलाफ सामाजिक न्याय की लड़ाई शुरू की वही आगे चलकर आजमगढ़ का सामंती चेहरा बन गया। आज भी रमाकांत के खिलाफ बोलना गुनाह से कम नहीं है। RKY का स्टीकर होना ही किसी भी गलत पर पर्दा डालने के लिए काफी था। फिलहाल 2017 के बाद से रुतबे पर योगी के अंकुश का असर दिखने लगा है।
निकाय चुनाव में उसे ही वोट देंगे जो संपर्क मार्ग बनवाएगा
प्रयागराज के कई क्षेत्रों में कहीं पेयजल, कहीं ड्रेनेज तो कहीं संपर्क मार्ग बना मुद्दा
लखनऊ। प्रयागराज समेत 37 जिलों में पहले चरण के तहत होने...
सिंधिया ही नहीं कई और भी थे अंग्रेजों के वफादार
जब सोवियत रूस में क्रांति हो गई तो व्लादिमीर लेनिन ने पूरे राष्ट्र को संबोधित करते हुए यह कहा कि 'क्रांति के पूर्व पूरे...
जयपुर हाइकोर्ट के ‘फैसले’ के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाना राजस्थान सरकार की सांप्रदायिक मानसिकता
लखनऊ। रिहाई मंच ने आजमगढ़ के चार नौजवानों, जिन्हें निचली अदालत से फांसी की सजा हो चुकी थी, को बरी करने वाले जयपुर हाईकोर्ट...
कांग्रेस के इतिहास में पहली बार सोशल जस्टिस का पिटारा
तृणमूल 2024 का लोकसभा चुनाव अकेले लड़ेगी और उनकी पार्टी किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगी। कहने की जरूरत नहीं कि एक बच्चा भी बता देगा कि 2 मार्च को आये तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों ने मोदी को इतना ताकतवर बना दिया है कि उनके खिलाफ लगातार ताल ठोकने वाली ममता सरेंडर की मुद्रा में आ गयी हैं और उनके रास्ते का अनुसरण अन्य कई आग मार्का विपक्षी नेता भी कर सकते हैं,यह सोचकर ही 2024 में मोदी-मुक्त भारत का सपना देखने वाले सदमे में आ गए हैं।
गुजरात चुनाव में भाजपा की जीत में ध्रुवीकरण की भूमिका
हाल में गुजरात एवं हिमाचल प्रदेश विधानसभा एवं दिल्ली नगर निगम के चुनावों के परिणाम घोषित हुए। जहां गुजरात में भाजपा ने शानदार जीत...

