Friday, June 21, 2024
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किसान आंदोलन : मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ 14 मार्च को रामलीला मैदान में होगी ‘महापंचायत’

प्रदर्शनकारी किसान फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी सहित अपनी अन्य मांगों को स्वीकार करवाने के लिए केंद्र पर दबाव बनाने के लिए पंजाब और हरियाणा की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं।

किसान आंदोलन : सरकार ने किसानों को दिल्ली सीमा में रोकने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती की  

13 फरवरी से चल रहे किसान आंदोलन 'दिल्ली चलो' के नारे के साथ चल रहा है। हरियाणा के शंभू सीमा पर एकत्रित किसान किसी भी कीमत पर दिल्ली पहुँचना चाहते हैं। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर आज दिल्ली सीमा पर सुरक्षा बलों की भारी तैनाती को देखते हुए कहा कि सरकार ने इस किसान आंदोलन को राष्ट्रव्यापी मान लिया है। 

राजतंत्र के शिकंजे में कसमसाता देश का लोकतंत्र

लोकतंत्र में चुनाव में जीते हुए लोग जब शासन व्यवस्था संभालते हैं, तो वे ऐसे नियम और कानूनों का प्रावधान करते हैं, जिससे कि लोगों का कल्याण हो सके। इन नियम कानूनों के लिए सरकार पूरी तरह से जनता के प्रति जवाबदेह होती है।

अंबाला पुलिस ने आंदोलनकारी किसानों पर रासुका लगाया

13 फरवरी से शुरू हुए किसान आंदोलन को कुचलने के लिए हरियाणा पुलिस ने तरह-तरह के हथकंडे अपनाए हैं। कल 22 फरवरी को अंबाला पुलिस ने किसान संगठनों के मुख्य पदाधिकारियों और आंदोलनकारियों के विरुद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा कानून 1980 के तहत कार्रवाई शुरू की है।

शंभू बॉर्डर पर पुलिस की गोली से एक युवा किसान की मौत, राजनीतिक पार्टियों ने की घटना की निंदा

सरवन सिंह पंढेर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि खनौरी और शंभू बोर्डर पर सरकार ने बर्बरतापूर्वक आँसू गैस के गोले दागे। केंद्र सरकार के अर्द्ध सैनिक बालों ने पंजाब की सीमा में जबरिया घुसकर आंदोलनकारियों पर हमला किया। जिसमें युवा किसान शुभकारण सिंह की मौत हो गई। तीन लोग बुरी तरह घायल हो गए और अनेक युवाओं का कुछ पता नहीं चल रहा है, वे लापता हैं।

पीयूसीएल ने किसानों के दमन के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की

पीयूसीएल किसानों के मार्च पर केंद्र सरकार की अलोकतांत्रिक, अत्याचारी प्रतिक्रिया की कड़ी निंदा करता है। केंद्र सरकार ने हिंसक कदम उठाए हैं किसानों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने से रोकना घोर अन्याय है।

किसान पूछ रहे हैं हमारी जायज़ मांग क्यों नहीं मान रही है

2021 में हुए किसान आंदोलन में तीन कृषि क़ानूनों को रद्द करने के बाद सरकार ने आने वाले दिनों में एमएसपी की गारंटी देने...

बोले किसान, इस बार हमें आश्वासन नहीं चाहिए, सरकार ने पंजाब में 16 तक इंटरनेट सेवाएं बंद की

पंजाब-हरियाणा सीमा पर हरियाणा प्रशासन द्वारा तैनात सुरक्षाकर्मियों द्वारा किसानों के खिलाफ की गई कार्रवाई का जिक्र करते हुए किसान नेताओं ने किसानों के खिलाफ 'बल' प्रयोग करने के लिए अर्धसैनिक बल के जवानों की आलोचना की। इस कार्रवाई में कई लोग घायल हो गए थे। उन्होंने आंसू गैस के कुछ गोले भी दिखाए।

भूविस्थापितों के आंदोलन को ‘कुचलना’ चाहता है एसईसीएल

एसईसीएल ने स्वीकारा, भूविस्थापितों की आर्थिक नाकेबंदी से 5.39 करोड़ का नुकसान कोरबा। एसईसीएल ने स्वीकार किया है कि 11-12 सितम्बर को छत्तीसगढ़ किसान सभा...

विकास के नाम पर भू-अधिग्रहण के अनुभव, परिदृश्‍य और सबक

दूसरा हिस्सा  दक्षिण बस्तर में बीजापुर-सुकमा जिले की सीमा पर स्थित सिलगेर गांव में राजकीय दमन के खिलाफ चल रहे प्रतिरोध आंदोलन को एकसाल से...

किसान मुद्दे पर बीएचयू के छात्र-छात्राओं से पुलिस की नोंक-झोंक

बीएचयू(वाराणसी): केन्द्र सरकार द्वारा किये गये वादाखिलाफी के विरोध में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा सोमवार के शाम लंका गेट पर विश्वासघात दिवस...

संयुक्त किसान मोर्चा ने मनाया वादाखिलाफी प्रतिकार दिवस

पिंडरा तहसील पर संयुक्त किसान मोर्चा, वाराणसी ने वादाखिलाफी प्रतिकार दिवस मनाया। राष्ट्रपति को सभा का संबोधित ज्ञापन सौंपा। सभा को रामजनम, अफलातून, लक्ष्मण...

पूर्वांचल किसान यूनियन के अध्यक्ष को पुलिस ने किया नजरबंद

वाराणसी: जन्सा थाना क्षेत्र के हरसोस गांव में रविवार की रात करीब नौ बजे पुलिस ने पूर्वांचल किसान के अध्यक्ष योगीराज सिंह पटेल को...

नरेंद्र मोदी सरकार की सीनाजोरी और मुंहचोरी (डायरी 30 नवंबर, 2021)

किसान जिस एमएसपी गारंटी के कानून की बात कर रहे हैं, उसे लेकर देश का कारपोरेट जगत सदमे में है। दरअसल, यदि यह कानून बन गया तब किसानों को हर हाल में न्यूनतम समर्थन मूल्य प्राप्त होगा। ऐसे में वे खुले बाजार में न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम मूल्य में किसानों की उपज नहीं खरीद सकेंगे।

किसान आंदोलन के परिप्रेक्ष्य में विगत दशकों में चल रहे आंदोलन का एक सिलसिला

यह समय का पहिया घूमने जैसी बात है। दस साल हो रहे हैं जब 2009 में आई ग्रामीण विकास मंत्रालय एक मसविदा रिपोर्ट के 160 वें पन्‍ने पर भारत के आदिवासी इलाकों में कब्जाई जा रही ज़मीनों को धरती के इतिहास में 'कोलंबस के बाद की सबसे बड़ी लूट' बताया गया था। कमिटी ऑनस्‍टेट अग्रेरियन रिलेशंस एंड अनफिनिश्‍ड टास्‍क ऑफ लैंडरिफॉर्म्‍स शीर्षक से यह रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक विमर्श का हिस्‍सा नहीं बन पाई है, जिसने छत्‍तीसगढ़ और झारखण्‍ड के कुछ इलाकों में सरकारों और निजी कंपनियों (नाम समेत) की मिली भगत से हो रही ज़मीन की लूट से पैदा हो रहे गृहयुद्ध जैसे हालात की ओर इशारा किया था।

फासिस्ट सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए छालों की परवाह नहीं

दोलन कई सरकारी षडयंत्रों का निशाना बनाया गया है। लखीमपुर खीरी में निर्दोष किसानों पर गाड़ी चढ़ा दिया गया जिसमें चार किसान शहीद हुये। लेकिन लगता है आंदोलन की आंच अब पूरे देश में फैल रही है। ये लोग जो चंपारण से पदयात्रा करके यहाँ तक आए हैं वे अपने हिस्से का संघर्ष उन तमाम लोगों के बीच ले जाना चाहते हैं जिनके भीतर किसानों के लिए संवेदना है।

सियासत और समाज  ( डायरी 6 अक्टूबर, 2021)  

सियासत यानी राजनीति की कोई एक परिभाषा नहीं हो सकती है। साथ ही यह कि सत्ता पाने का मतलब केवल प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री बनना...

भारत के ब्राह्मणों से कम नहीं हैं पश्चिम के श्वेत (डायरी  5 अक्टूबर, 2021)  

बीता हुआ कल सिर्फ मेरे लिए ही नहीं, दुनिया भर के लोगों के लिए महत्वपूर्ण रहा। देर शाम करीब सवा नौ बजे सोशल मीडिया...

अराजकता फैलती नहीं, फैलाई जाती है… (डायरी 4 अक्टूबर, 2021)

कल उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में एक नरसंहार को अंजाम दिया गया। जैसी खबरें मुझे प्राप्त हुई हैं, उनके हिसाब से चार किसान...

आंदोलन नहीं, क्रांति कर रहे हैं भारतीय किसान डायरी (6 सितंबर,2021)

जाति व्यवस्था भारतीय समाज की कड़वी सच्चाई है और इसे कायम रखने में व्यापारी वर्ग के लोगों के साथ ही उच्च जातियों की बड़ी...

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